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Noida : सरफेस पार्किंग के लिए एजेंसी का चयन न होने से सात करोड़ का नुकसान, कई मामले कोर्ट में

Sat, 14 Oct 2023 06:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 14 Oct 2023 06:53 AM IST
सार

इन सभी पार्किंग से पहले 60 लाख रुपये प्रतिमाह का राजस्व मिलता था। इस बार प्राधिकरण का लक्ष्य 70 लाख रुपये प्रतिमाह के राजस्व का है।

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Noida: Loss of Rs 7 crore due to non-selection of agency for surface parking
demo pic... - फोटो : सांकेतिक

विस्तार

नोएडा में 54 स्थानों पर बीते 10 माह से सरफेस पार्किंग का ठेका नहीं लगने की वजह से करीब 7 करोड़ का नुकसान हो चुका है। इन सभी पार्किंग से पहले 60 लाख रुपये प्रतिमाह का राजस्व मिलता था। इस बार प्राधिकरण का लक्ष्य 70 लाख रुपये प्रतिमाह के राजस्व का है। लेकिन एजेंसी का चयन नहीं होने से लोगों को यह पार्किंग निशुल्क मिल रही है। अभी भी पार्किंग ठेके का काम ठंडे बस्ते में है।

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दरअसल, बीते अक्तूबर 2022 में सरफेस पार्किंग के पुराने ठेके की मियाद खत्म हो गई। इसके बाद नोएडा प्राधिकरण ने टेंडर निकालकर एजेंसी चयन की प्रक्रिया पूरी करनी चाही।
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लेकिन इस राह में कई बाधाएं आईं। कभी ठेकेदार के चयन में गड़बड़ी तो कभी ठेकेदारों के ही एक दूसरे के खिलाफ की गई शिकायत बाधक बनकर सामने आईं। आलम यह है कि तीन टेंडरों के मामले अभी कोर्ट में है। इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है। वहीं, दो टेंडरों के मामलों को इसलिए रोक लिया गया है कि जब फैसला होगा तो सभी का ठेका एक साथ दिया जाएगा।
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इससे पहले इस मामले में पार्किंग ठेकेदारों की ओर से प्राधिकरण के 20 करोड़ रुपये नहीं देने की बात भी सामने आई थी। इस मामले में प्राधिकरण की ओर से कड़े कदम भी उठाए गए थे। हालांकि ठेकेदारों का तर्क था कि इसमें प्राधिकरण का पैसा नहीं बन रहा है। लेकिन अधिकारियों ने इस मामले में ठेकेदारों की ओर से की गई गड़बड़ी सामने लाई थी। यही वजह है कि पुराने टेंडर को दोबारा उन ठेकेदारों को नहीं दिया गया।


अब जब नए ठेकेदार ढूंढे जाने लगे तो पुराने ठेकेदारों ने अपने संगी साथियों व परिजनों के नाम से ठेका लेने का प्रयास किया, जो कि पकड़ में आ गया। कुछ लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इसमें नोएडा ट्रैफिक सेल के कुछ अधिकारियों ने अपनी मनमानी चलानी चाही। लेकिन यह भी नहीं हो पाया। उनकी भी शिकायतें तत्कालीन सीईओ के पास पहुंची। ऐसे में यह ठेका अब तक फाइनल नहीं हो पाया।

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