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Noida News: एनजीटी ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर अवैध खनन की रिपोर्ट खारिज की
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यूपी ऑल, दिल्ली के ध्यानार्थ।
एनजीटी ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर अवैध खनन की रिपोर्ट खारिज की
जांच समिति को निरीक्षण में कहीं भी अवैध खनन नहीं मिला
अधिकारियों ने कहा, खनन से तो सिंचाई के लिए उपयोगी तालाब बन गए
एनजीटी ने अब यूपी के मुख्य सचिव सहित पांच अधिकारियों को नोटिस जारी किया
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट में अवैध खनन की जांच करने वाली अधिकारियों की संयुक्त समिति की रिपोर्ट को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने खारिज कर दिया है। जांच समिति को निरीक्षण में कहीं भी अवैध खनन नहीं मिला। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि खनन के दौरान तालाब बनाए गए। इससे वहां सिंचाई करना किसानों के लिए आसान हो गया है। इस रिपोर्ट से नाराज एनजीटी ने अब यूपी के मुख्य सचिव सहित पांच वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर दोबारा रिपोर्ट मांगी है।
एनजीटी के सदस्य जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस अरुण कुमार त्यागी, डॉ. ए सेंथिल वेल ने अपने आदेश में कहा है कि इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। रिपोर्ट में यह तो कहा गया कि जरूरी अनुमति के साथ खनन हुआ, लेकिन पर्यावरण सुरक्षा के नियमों का पालन करते हुए खनन किया गया, यह रिपोर्ट में नहीं बताया गया है। इन नियमों के अनुपालन पर कुछ भी रिपोर्ट शामिल नहीं है। एनजीटी ने अब मुख्य सचिव, डीएम जालौन, सदस्य सचिव यूपीपीसीबी, परियोजना निदेशक एनएचएआई झांसी, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड पीडब्ल्यूडी को नोटिस जारी किया है। इन सभी को अपना जवाब एक महीने में एनजीटी में देना होगा। एनजीटी अब 26 फरवरी को इस मामले की फिर से सुनवाई करेगा।
क्या है मामला?
जालौन जिले के नार्चा गांव के अरुण तिवारी ने एनजीटी में याचिका दी कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट में 10 से 15 मीटर गहराई तक मिट्टी खोदी गई। अवैध खनन का यह आरोप यूपीडा की कार्यदायी संस्था गावर कंस्ट्रक्शन पर लगा है। याचिका में कहा गया है कि फरवरी 2020 से खनन शुरू हो गया। वहीं खनन के लिए अनुमति का आवेदन 2021 में हुआ। दो मीटर तक खनन की अनुमति की जगह इससे कई गुना अधिक खुदाई की गई। कई किसानों की जमीन से तो बिना अनुमति के ही मिट्टी खोद ली गई। इन गड्ढाें में गिरकर सैकड़ों जानवरों की मौत हो चुकी है। पर्यावरण को भी इससे खतरा होने की बात याचिका में कही गई। इसके बाद एनजीटी ने संयुक्त जांच के लिए यूपीपीसीबी, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के प्रतिनिधियों, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता और डीएम जालौन को शामिल करते हुए समिति बनाई थी।
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एनजीटी ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर अवैध खनन की रिपोर्ट खारिज की
जांच समिति को निरीक्षण में कहीं भी अवैध खनन नहीं मिला
अधिकारियों ने कहा, खनन से तो सिंचाई के लिए उपयोगी तालाब बन गए
एनजीटी ने अब यूपी के मुख्य सचिव सहित पांच अधिकारियों को नोटिस जारी किया
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट में अवैध खनन की जांच करने वाली अधिकारियों की संयुक्त समिति की रिपोर्ट को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने खारिज कर दिया है। जांच समिति को निरीक्षण में कहीं भी अवैध खनन नहीं मिला। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि खनन के दौरान तालाब बनाए गए। इससे वहां सिंचाई करना किसानों के लिए आसान हो गया है। इस रिपोर्ट से नाराज एनजीटी ने अब यूपी के मुख्य सचिव सहित पांच वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर दोबारा रिपोर्ट मांगी है।
एनजीटी के सदस्य जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस अरुण कुमार त्यागी, डॉ. ए सेंथिल वेल ने अपने आदेश में कहा है कि इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। रिपोर्ट में यह तो कहा गया कि जरूरी अनुमति के साथ खनन हुआ, लेकिन पर्यावरण सुरक्षा के नियमों का पालन करते हुए खनन किया गया, यह रिपोर्ट में नहीं बताया गया है। इन नियमों के अनुपालन पर कुछ भी रिपोर्ट शामिल नहीं है। एनजीटी ने अब मुख्य सचिव, डीएम जालौन, सदस्य सचिव यूपीपीसीबी, परियोजना निदेशक एनएचएआई झांसी, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड पीडब्ल्यूडी को नोटिस जारी किया है। इन सभी को अपना जवाब एक महीने में एनजीटी में देना होगा। एनजीटी अब 26 फरवरी को इस मामले की फिर से सुनवाई करेगा।
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क्या है मामला?
जालौन जिले के नार्चा गांव के अरुण तिवारी ने एनजीटी में याचिका दी कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट में 10 से 15 मीटर गहराई तक मिट्टी खोदी गई। अवैध खनन का यह आरोप यूपीडा की कार्यदायी संस्था गावर कंस्ट्रक्शन पर लगा है। याचिका में कहा गया है कि फरवरी 2020 से खनन शुरू हो गया। वहीं खनन के लिए अनुमति का आवेदन 2021 में हुआ। दो मीटर तक खनन की अनुमति की जगह इससे कई गुना अधिक खुदाई की गई। कई किसानों की जमीन से तो बिना अनुमति के ही मिट्टी खोद ली गई। इन गड्ढाें में गिरकर सैकड़ों जानवरों की मौत हो चुकी है। पर्यावरण को भी इससे खतरा होने की बात याचिका में कही गई। इसके बाद एनजीटी ने संयुक्त जांच के लिए यूपीपीसीबी, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के प्रतिनिधियों, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता और डीएम जालौन को शामिल करते हुए समिति बनाई थी।
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