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Noida News: फसलों पर पाले का असर
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निबाड़ीकला। दलहन, तिलहन व आलू की फसलों पर पाले का असर दिखने लगा है। कृषि विभाग ने किसानों को समय से दवा का छिड़काव करने की सलाह दी है।
रमपुरा सोनासी क्षेत्र के किसान जागेश्वर दयाल व सर्वेश कुमार ने बताया कि आलू की पौध में पत्तियां पीली पड़ती दिख रही हैं। अगर पाले का असर ज्यादा हुआ तो नुकसान उठाना पड़ेगा। दलहन की फसलों पर भी खतरा मंडरा रहा है। आलू में झुलसा रोग लग सकता है।
राजकीय बीज भंडार के प्रभारी बृजेंद्र सिंह ने बताया कि रिडोमिल एम जेड 78 नाम की दवा दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें। कुछ किसान प्राकृतिक तरीके से आलू की खेती करते हैं। इसमें कोल्ड इंजरी नामक रोग पनपता है। पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। बचाव के लिए ट्राइकोडरमा और सूडोमोनास को मिलाकर स्प्रे कर सकते हैं। इसके लिए चार ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से घोल बना लें। इसमें गुड़ के घोल का भी स्प्रे कर सकते हैं। इसके फसलों में पानी लगाते रहें। मेड़ों पर धुआं करके भी फसल को पाले से बचाया जा सकता है।
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रमपुरा सोनासी क्षेत्र के किसान जागेश्वर दयाल व सर्वेश कुमार ने बताया कि आलू की पौध में पत्तियां पीली पड़ती दिख रही हैं। अगर पाले का असर ज्यादा हुआ तो नुकसान उठाना पड़ेगा। दलहन की फसलों पर भी खतरा मंडरा रहा है। आलू में झुलसा रोग लग सकता है।
राजकीय बीज भंडार के प्रभारी बृजेंद्र सिंह ने बताया कि रिडोमिल एम जेड 78 नाम की दवा दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें। कुछ किसान प्राकृतिक तरीके से आलू की खेती करते हैं। इसमें कोल्ड इंजरी नामक रोग पनपता है। पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। बचाव के लिए ट्राइकोडरमा और सूडोमोनास को मिलाकर स्प्रे कर सकते हैं। इसके लिए चार ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से घोल बना लें। इसमें गुड़ के घोल का भी स्प्रे कर सकते हैं। इसके फसलों में पानी लगाते रहें। मेड़ों पर धुआं करके भी फसल को पाले से बचाया जा सकता है।
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