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Noida News: आयुर्वेद के नाम पर लाइसेंस, एलोपैथ विधा से हो रहा इलाज
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जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आयुर्वेद विधा के नाम पर लाइसेंस लेकर ज्यादातर निजी अस्पताल और क्लीनिक एलोपैथ पद्धति से इलाज करते हैं।
विभागीय नियमों की अनदेखी कर ऐसे संस्थान खुलेआम संचालित हो रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि स्वास्थ्य विभाग की छापे और अभियान के दौरान ये अस्पताल, क्लिनिक और पैथोलॉजी बंद कर दिए जाते हैं।
अभियान के ठंडा होते ही फिर से संचालित होने लगते हैं। इसका सीधा खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को उठाना पड़ता है, चाहे वह स्वास्थ्य संबंधी हो या आर्थिक नुकसान।
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पिछले तीन वर्षों का आंकड़ा देखें तो हर साल 5 से 7 नए निजी अस्पताल, क्लिनिक और पैथोलॉजी खुल जाते हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में जनपद में 160 अस्पताल, 42 क्लिनिक और 60 पैथोलॉजी संचालित हो रहे थे।
इस दौरान विभागीय अभियान में 4 से 5 संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की गई। वहीं 2024-25 में इनकी संख्या बढ़कर 168 अस्पताल, 46 क्लिनिक और 67 पैथोलॉजी हो गई।
इस साल भी अभियान चलाया गया और दो पैथोलॉजी व दो क्लिनिक पर शिकंजा कसा गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 172 अस्पताल, 32 क्लिनिक और 63 पैथोलॉजी पंजीकृत हैं। इनमें से दो संस्थानों पर विभाग ने कार्रवाई भी की है, जबकि वर्ष अभी बाकी है।
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बिना पंजीकरण के चल रहे संस्थान
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जनपद में कई अस्पताल, पैथोलॉजी और क्लिनिक बिना पंजीकरण के ही संचालित होते हैं। ये संस्थान किसी न किसी विधि के नाम पर लाइसेंस लेकर नियम विरुद्ध इलाज करते हैं। जब विभागीय टीम कार्रवाई के लिए निकलती है तो ये संस्थान ताले में बंद मिलते हैं। यही वजह है कि अभियान खत्म होते ही ये दोबारा शुरू हो जाते हैं।
जनपद में निजी अस्पताल, पैथोलॉजी और क्लिनिक पर समय-समय पर अभियान चलाकर जांच की जाती है। जिन संस्थानों का पंजीकरण नहीं है, उन्हें तत्काल पंजीकरण कराने का निर्देश दिया गया है। अगर बिना पंजीकरण के संस्थान संचालित होते पाए गए तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -डॉ.एस.के.सिंह, जिला नोडल अधिकारी, चंदौली
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विभागीय नियमों की अनदेखी कर ऐसे संस्थान खुलेआम संचालित हो रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि स्वास्थ्य विभाग की छापे और अभियान के दौरान ये अस्पताल, क्लिनिक और पैथोलॉजी बंद कर दिए जाते हैं।
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अभियान के ठंडा होते ही फिर से संचालित होने लगते हैं। इसका सीधा खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को उठाना पड़ता है, चाहे वह स्वास्थ्य संबंधी हो या आर्थिक नुकसान।
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पिछले तीन वर्षों का आंकड़ा देखें तो हर साल 5 से 7 नए निजी अस्पताल, क्लिनिक और पैथोलॉजी खुल जाते हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में जनपद में 160 अस्पताल, 42 क्लिनिक और 60 पैथोलॉजी संचालित हो रहे थे।
इस दौरान विभागीय अभियान में 4 से 5 संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की गई। वहीं 2024-25 में इनकी संख्या बढ़कर 168 अस्पताल, 46 क्लिनिक और 67 पैथोलॉजी हो गई।
इस साल भी अभियान चलाया गया और दो पैथोलॉजी व दो क्लिनिक पर शिकंजा कसा गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 172 अस्पताल, 32 क्लिनिक और 63 पैथोलॉजी पंजीकृत हैं। इनमें से दो संस्थानों पर विभाग ने कार्रवाई भी की है, जबकि वर्ष अभी बाकी है।
बिना पंजीकरण के चल रहे संस्थान
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जनपद में कई अस्पताल, पैथोलॉजी और क्लिनिक बिना पंजीकरण के ही संचालित होते हैं। ये संस्थान किसी न किसी विधि के नाम पर लाइसेंस लेकर नियम विरुद्ध इलाज करते हैं। जब विभागीय टीम कार्रवाई के लिए निकलती है तो ये संस्थान ताले में बंद मिलते हैं। यही वजह है कि अभियान खत्म होते ही ये दोबारा शुरू हो जाते हैं।
जनपद में निजी अस्पताल, पैथोलॉजी और क्लिनिक पर समय-समय पर अभियान चलाकर जांच की जाती है। जिन संस्थानों का पंजीकरण नहीं है, उन्हें तत्काल पंजीकरण कराने का निर्देश दिया गया है। अगर बिना पंजीकरण के संस्थान संचालित होते पाए गए तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -डॉ.एस.के.सिंह, जिला नोडल अधिकारी, चंदौली