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शिक्षा के आयाम स्थापित करने में पूर्व सांसद खुर्शीद अहमद की रही अहम भूमिका

Tue, 16 Feb 2021 11:15 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 16 Feb 2021 11:15 PM IST
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khurshid important role in establing  the dimenshion of  education
चौधरी खुर्शीद अहमद (फाइल फोटो) - फोटो : Mewat
नूंह। मेवात विकास पुरुष नाम से मशहूर पूर्व मंत्री और सांसद स्व. चौधरी खुर्शीद अहमद की पहली बरसी बुधवार को नूंह स्थित कांग्रेस कार्यालय पर मनाई जाएगी। श्रद्धांजलि समारोह में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित अन्य इलाकों से सैकड़ों लोग शिरकत करेंगे।
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चौधरी खुर्शीद अहमद का जन्म 20 जून 1934 में तावडू के गांव धुलावट में चौधरी कबीर खां के यहां हुआ था। खुर्शीद अहमद सर्वोच्च न्यायालय में वकील और एक दिग्गज राजनेता भी थे। वह फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र से एक बार सांसद और पांच बार विधायक रहे। इनके सबसे बड़े बेटे आफताब अहमद को मेवात विधानसभा क्षेत्र से 2019 में दूसरी बार विधायक चुना गया। आफताब अहमद प्रदेश की कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। खुर्शीद अहमद ने छात्र नेता से राजनीति की शुरुआत की थी। खुर्शीद अहमद को एक बार मुख्यमंत्री बनने का ऑफर भी मिला, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया। मेवात में शिक्षा के आयाम स्थापित करने में खुर्शीद अहमद की अहम भूमिका रही। सबसे पहले उन्होंने नगीना के बड़कली चौक पर निजी कॉलेज खोला, जिसे बाद में सरकार को सौंप दिया था। खुर्शीद अहमद ने प्रदेश की पहली जेबीटी संस्था फिरोजपुर नमक नूंह में खुलवाई, जिससे मेवात के सैकड़ों युवा अध्यापक बने। मेवात का पहला पॉलीटेक्निक कॉलेज हथीन, रोजका मेव में खोला गया। इसके अलावा एक दर्जन से अधिक अस्पताल, हेल्थ सेंटरों, नहरों और सड़कों का जाल बिछाया। मेवात डेवलपमेंट बोर्ड भी उन्हीं की देन है। खुर्शीद अहमद का राजनैतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
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खुर्शीद अहमद ने आखिरी चुनाव 2000 में नूंह से लड़ा था। यहां इनको इनेलो के हामिद हुसैन से 9434 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद खुर्शीद अहमद ने चुनाव लड़ने सन्यास ले लिया और अपने बेटे आफताब अहमद को राजनीति सौंप दी। खुर्शीद अहमद का निधन 17 फरवरी 2020 को 86 साल की आयु में हो गया था।
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