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Noida News: तीन होटलों में अवैध भूजल दोहन, जलबोर्ड-एनडीएमसी को एनजीटी की फटकार

Thu, 13 Nov 2025 07:28 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 13 Nov 2025 07:28 PM IST
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Illegal groundwater extraction in three hotels; NGT reprimands Jal Board, NDMC
वर्ष 2018 में पारित आदेश के बावजूद पूर्ण अनुपालन न होने पर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। एनजीटी ने अवैध भूजल दोहन के मामले में दिल्ली के प्रमुख होटलों द सूर्या, सिद्धार्थ और ललित पर सख्त रुख अपनाया है। वर्ष 2018 में पारित आदेश के सात वर्ष बीतने के बावजूद पूर्ण अनुपालन न होने पर एनजीटी ने बृहस्पतिवार को दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) को फटकार लगाते हुए शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही, भूजल निकासी के बदले कोई शुल्क न वसूले जाने को गंभीर मुद्दा बताते हुए आगे विचार की बात कही। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल ने सुनवाई के दौरान निष्पादन आवेदन पर यह आदेश पारित किया।

मामले में आवेदक शैलेश सिंह ने आरोप लगाया था कि ये होटल बिना अनुमति के भूमिगत जल का दोहन कर रहे हैं। 23 अगस्त 2018 के मूल आदेश में होटलों को एक माह में सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेने और केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) को निकासी की जानकारी देने का निर्देश दिया गया था ताकि पर्यावरणीय मुआवजा तय हो सके। डीजेबी की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि होटल द सूर्या में दो पुराने बोरवेल पाए गए। डिस्ट्रिक्ट लेवल एडवाइजरी कमिटी (डीएलएसी) ने 2 सितंबर को शर्तों के साथ अनुमति दी थी। इसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (डीपीसीसी) का पर्यावरण मुआवजा भी शामिल था। इसके अलावा होटल सिद्धार्थ में हैरानी की बात यह रही कि कोई बोरवेल ही नहीं मिला। वहीं, होटल ललित में तीन बोरवेल थे। एक सील कर दिया गया। बाकी दो के लिए पानी की जरूरत का आंकलन लंबित है।
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एनडीएमसी को निर्देश, 5 दिसंबर तक फैसला लो
अदालत ने एनडीएमसी को निर्देश दिया कि 5 दिसंबर तक फैसला ले नहीं तो कार्रवाई होगी। एनजीटी ने एनडीएमसी को देरी पर फटकार लगाई। साथ ही, डीपीसीसी के साथ मिलकर मुआवजा तय करने को कहा। एनडीएमसी के वकील ने स्वीकार किया कि आवेदन निपटाया नहीं गया। डीजेबी और सीजीडब्ल्यूए ने कबूल किया कि दिल्ली में भूजल निकालने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। वजह यह है कि पानी की सटीक मात्रा मापने का कोई तरीका नहीं है। सिर्फ अतिरिक्त सीवर चार्ज वसूला जाता है। एनजीटी ने इसे गंभीर बताते हुए कहा कि यह पर्यावरण के लिए खतरा है। जल निकासी के बदले कोई पैसे नहीं तो चोरी क्यों रुकेगी। कोर्ट ने फैसला किया कि इस मुद्दे पर गहराई से सोचा जाएगा क्योंकि यह दिल्ली जैसे जल संकटग्रस्त शहर के लिए बेहद अहम है।
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