पढ़ाई को रोचक और सहज बनाने के लिए अब विद्यालयों में नवाचारों का सहारा लिया जा रहा है। संगीत और कला के माध्यम से बच्चों को भाषा और गणित की शिक्षा दे रही हैं। सरगम, गीत और लय के जरिए बच्चे स्वर, व्यंजन और संख्याओं को आसानी से सीख रहे हैं। छोटे बच्चों को पारंपरिक तरीके की अपेक्षा गीत-संगीत के माध्यम से पढ़ाना अधिक प्रभावी साबित हो रहा है। जब पढ़ाई को सुर और ताल से जोड़ा जाता है तो बच्चे पूरे उत्साह के साथ गतिविधियों में भाग लेते हैं। इससे उनकी सीखने में रुचि बढ़ती है और विषयों को लंबे समय तक याद रखने में भी मदद मिलती है। संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के बौद्धिक, भाषाई और भावनात्मक विकास का प्रभावी साधन भी है। इस नवाचार से बच्चे बिना किसी दबाव के भाषा और गणित की बुनियादी अवधारणाएं सीख रहे हैं। विद्यालय में अपनाई गई यह पहल बच्चों को आनंददायक माहौल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का सफल उदाहरण बन रही है।
- प्रतिभा सिंह, शिक्षिका, कंपोजिट विद्यालय, पार्थला खंजरपुर, नोएडा