ग्रेनो में दिल्ली जैसे कई सत्य निकेतन: संकरी गलियां, जर्जर इमारतें; सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी, मंडरा रहा खतरा
इन इमारतों की स्थिति ऐसी है कि कई जगह दीवारों पर दरारें और सीलन दिखाई दे रही हैं। प्लास्टर उखड़ चुका है और पुरानी ईंटें बाहर नजर आ रही हैं। लोगों का आरोप है कि कुछ इमारतों में आरसीसी पिलर तक नहीं हैं।
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दिल्ली में सत्य निकेतन में पीजी की इमारत गिरने से छात्रों की मौत के बाद भी सूरजपुर में जर्जर और असुरक्षित इमारतों में लोग रहने को मजबूर हैं। गांव में तीन से चार मंजिला कई इमारतें बिना पर्याप्त सुरक्षा मानकों के खड़ी हैं। कम किराये के कारण बड़ी संख्या में लोग इनमें रह रहे हैं। ऐसे में किसी हादसे की स्थिति में लोगों की जान पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है।
कुछ इमारतों में आरसीसी पिलर तक नहीं
इन इमारतों की स्थिति ऐसी है कि कई जगह दीवारों पर दरारें और सीलन दिखाई दे रही हैं। प्लास्टर उखड़ चुका है और पुरानी ईंटें बाहर नजर आ रही हैं। लोगों का आरोप है कि कुछ इमारतों में आरसीसी पिलर तक नहीं हैं। वहीं, इमारतों तक पहुंचने वाली गलियां बेहद संकरी हैं। आपात स्थिति में एंबुलेंस और दमकल की गाड़ियों के पहुंचने में भी परेशानी हो सकती है। ऐसे में लोगों को पैदल या कंधे पर उठाकर बाहर निकालने की स्थिति बन सकती है।
कम किराया बना मजबूरी
कम किराये की वजह से लोग जर्जर भवनों में रहने का जोखिम उठा रहे हैं। इनमें मजदूरों के साथ निजी कंपनियों और फैक्टरियों में काम करने वाले कर्मचारी भी रहते हैं। लोगों का कहना है कि आसपास काम मिलने और कम किराया होने के कारण वे यहां रह रहे हैं। उनका कहना है कि किराये में बचने वाली रकम परिवार को भेजने में मदद मिलती है।
ब्रेड फैक्टरी में काम करता हूं। दूसरी जगहों की अपेक्षा यहां किराया कम है, इसलिए रह रहा हूं। -उमेश सिंह
राजमिस्त्री हूं और करीब दो साल से यहां किराये पर रह रहा हूं। रोज सूरजपुर से दादरी काम पर जाता हूं। -कपिल जाटव
परी चौक की तरफ किराया ज्यादा था, इसलिए यहां कमरा लिया। बची रकम घर भेज देता हूं। -आशू कुमार
चार साल से रह रहा हूं। यहां रहना और खाना सस्ता है और कंपनी पास होने से कुछ पैसे बच जाते हैं। -फकरुद्दीन
नियमित सर्वे होता है
जर्जर इमारतों का वर्क सर्किल की टीम नियमित सर्वे करती है। जहां जरूरत होती है, भवन स्वामियों को नोटिस देकर भवन तोड़ने या सुधार कराने के निर्देश दिए जाते हैं। सूरजपुर में ऐसी इमारतों का निरीक्षण कराया जाएगा। -एके सिंह, जीएम प्रोजेक्ट, ग्रेनो प्राधिकरण