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Gorakhpur News: शहर के ये दो अस्पताल भी ठगी में शामिल, फर्जी मरीज दिखाकर लिया लाखों का क्लेम- जानिए कौन है?
Thu, 18 Sep 2025 01:00 AM IST
नोएडा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 18 Sep 2025 01:00 AM IST
सार
पुलिस ने बीमा कंपनियों से मरीजों के इलाज से जुड़े सभी दस्तावेज मांगे हैं। बीएचटी, क्लेम फाइल और भुगतान संबंधी विवरण का मिलान किया जा रहा है। शुरुआती जांच में अब तक कुल 14 फर्जी क्लेम फाइलें बरामद हुई हैं। पुलिस को आशंका है कि यह ठगी करोड़ों तक पहुंच सकती है।
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हेल्थ इंश्योरेंस
- फोटो : istock
विस्तार
हेल्थ इंश्योरेंस ठगी के मामले में रामगढ़ताल थाना पुलिस को नई सफलता हाथ लगी है। डिसेंट हॉस्पिटल में 1.20 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश होने के बाद अब शहर के दो और अस्पतालों का नाम सामने आया है। बेतियाहाता रोड स्थित पुष्पांजलि नर्सिंग होम और तारामंडल क्षेत्र का उमंग अस्पताल भी ठगी के इस खेल में शामिल पाए गए हैं।
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रामगढ़ताल पुलिस दोनों अस्पतालों पर पहुंची थी, लेकिन इसके पहले ही संचालक भाग गए थे। पुलिस दोनों अस्पताल से पांच कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस की जांच में वहां से 14 फर्जी बीमा क्लेम की फाइलें बरामद की गई हैं।
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मामला तब उजागर हुआ जब बजाज आलियांस फाइनेंस कंपनी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। कंपनी ने बताया कि दिल्ली निवासी सत्यदीप के नाम पर गोरखपुर में इलाज दिखाकर 1.80 लाख रुपये का बीमा क्लेम निकाल लिया गया है। जांच में खुद सत्यदीप ने पुलिस को बताया कि वह कभी गोरखपुर इलाज कराने आया ही नहीं।
यहीं से पूरी साजिश का धागा खुलना शुरू हुआ। शिकायत के बाद पुलिस ने सबसे पहले डिसेंट हॉस्पिटल के संचालक शमशुल (निवासी गेहूंआसागर) और उसके पार्टनर प्रवीण उर्फ विकास त्रिपाठी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि गोरखपुर और बस्ती स्थित डिसेंट हॉस्पिटल में 15 मरीजों के नाम पर फर्जी भर्ती और इलाज दिखाकर करीब 1.20 करोड़ रुपये की ठगी की गई है।
यहीं से पूरी साजिश का धागा खुलना शुरू हुआ। शिकायत के बाद पुलिस ने सबसे पहले डिसेंट हॉस्पिटल के संचालक शमशुल (निवासी गेहूंआसागर) और उसके पार्टनर प्रवीण उर्फ विकास त्रिपाठी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि गोरखपुर और बस्ती स्थित डिसेंट हॉस्पिटल में 15 मरीजों के नाम पर फर्जी भर्ती और इलाज दिखाकर करीब 1.20 करोड़ रुपये की ठगी की गई है।
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पुलिस ने इस मामले में गगहा निवासी अफजल और हॉस्पिटल मैनेजर को भी जेल भिजवा दिया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जिन मरीजों का फॉलोअप एपेक्स हॉस्पिटल में दिखाया गया था, वह अस्पताल अस्तित्व में ही नहीं है।
डिसेंट हॉस्पिटल से मिले दस्तावेजों और कंप्यूटर डेटा के आधार पर पुलिस ने जब उमंग और पुष्पांजलि हॉस्पिटल की जांच की, तो वहां भी गड़बड़ियां सामने आ गईं। उमंग हॉस्पिटल में न तो कोई बीएचटी (बेड हेड टिकट) मिला और न ही कंप्यूटर सिस्टम मौजूद था।
डिसेंट हॉस्पिटल से मिले दस्तावेजों और कंप्यूटर डेटा के आधार पर पुलिस ने जब उमंग और पुष्पांजलि हॉस्पिटल की जांच की, तो वहां भी गड़बड़ियां सामने आ गईं। उमंग हॉस्पिटल में न तो कोई बीएचटी (बेड हेड टिकट) मिला और न ही कंप्यूटर सिस्टम मौजूद था।
जबकि पुष्पांजलि हॉस्पिटल से दो कंप्यूटर और नई बीएचटी बरामद की गईं, जिन्हें पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। दोनों अस्पतालों के संचालक जांच शुरू होने से पहले ही भाग गए। पुलिस ने पांच कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। इनसे मिली जानकारी पर अब अन्य अस्पतालों की भी जांच की जा रही है।
उमंग और पुष्पांजलि हॉस्पिटल में भी फर्जी हेल्थ इंश्योरेंस भुगतान के सबूत मिले हैं। दोनों अस्पतालों का नाम केस में जोड़ दिया गया है। संचालक भागा हुआ है। गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें दबिश दे रही हैं: अभिनव त्यागी, एसपी सिटी
उमंग और पुष्पांजलि हॉस्पिटल में भी फर्जी हेल्थ इंश्योरेंस भुगतान के सबूत मिले हैं। दोनों अस्पतालों का नाम केस में जोड़ दिया गया है। संचालक भागा हुआ है। गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें दबिश दे रही हैं: अभिनव त्यागी, एसपी सिटी
बीमा कंपनी से दस्तावेज मांगे गए
पुलिस ने बीमा कंपनियों से मरीजों के इलाज से जुड़े सभी दस्तावेज मांगे हैं। बीएचटी, क्लेम फाइल और भुगतान संबंधी विवरण का मिलान किया जा रहा है। शुरुआती जांच में अब तक कुल 14 फर्जी क्लेम फाइलें बरामद हुई हैं। पुलिस को आशंका है कि यह ठगी करोड़ों तक पहुंच सकती है।
पुलिस ने बीमा कंपनियों से मरीजों के इलाज से जुड़े सभी दस्तावेज मांगे हैं। बीएचटी, क्लेम फाइल और भुगतान संबंधी विवरण का मिलान किया जा रहा है। शुरुआती जांच में अब तक कुल 14 फर्जी क्लेम फाइलें बरामद हुई हैं। पुलिस को आशंका है कि यह ठगी करोड़ों तक पहुंच सकती है।