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Noida News: स्याही से लेकर लेमिनेशन रोल 30 फीसदी महंगे, उद्योगों की लागत बढ़ी
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ग्राहकों की मांग- पुराने रेट पर मिले उत्पाद, उद्यमियों के लिए बनी आर्थिक चुनौती
फोटो
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के चलते प्रिंटिंग, पैकेजिंग और लेमिनेशन से जुड़े उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। प्रिंटिंग के उपयोग में आने वाली स्याही, लेमिनेशन रोल, मशीनों की सफाई में इस्तेमाल होने वाले केमिकल समेत अन्य कच्चे माल की कीमतों में करीब 25 से 30 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। इससे उद्यमियों की उत्पादन लागत बढ़ने के साथ ही कारोबार पर भी आर्थिक दबाव पड़ा है।
उद्योग संचालकों का कहना है कि कई जरूरी सामग्री विदेशों से आयात की जाती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग चार्ज और डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने का सीधा असर इन उत्पादों पर पड़ा है। फरवरी तक जो लेमिनेशन रोल 200 रुपये प्रति किलो तक मिल जाता था, अब वह 300 रुपये से अधिक का मिल रहा है। इसी तरह प्रिंटिंग इंक, सॉल्वेंट और मशीन क्लीनिंग केमिकल के दाम भी बढ़े हैं, जिससे मशीनों को साफ कराना भी महंगा हो गया है।
उद्यमियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्राहकों की पुरानी दरों पर सामान उपलब्ध कराने की मांग है। उनका कहना है कि ग्राहक अब यह मांग कर रहा है कि उन्हें पुराने रेट पर ही उत्पाद उपलब्ध कराया जाए। इतना ही नहीं कई कंपनियों के पुराने ऑर्डर पहले से तय रेट पर चल रहे हैं, जबकि उत्पादन लागत काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में मुनाफा कम होने के साथ कई इकाइयों को नुकसान हो रहा है। सेक्टर-63, 10 और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के उद्यमियों का कहना है कि यदि यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो छोटे उद्योगों के संचालन पर संकट गहरा सकता है। कुछ इकाइयों ने उत्पादन घटाना शुरू कर दिया है, जबकि कई नए ऑर्डर उद्यमियों को मिलना बंद हो गए हैं।
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पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने से ढुलाई भी महंगी
उद्यमियों ने बताया कि हाल ही में सरकार ने पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं, इससे ढुलाई 25 फीसदी महंगी हो गई है। यह एक अलग आर्थिक बोझ है जो उद्यमियों पर पड़ा है, लेकिन इसका हल क्या है किसी को नहीं पता। उत्पादन के साथ माल ढुलाई महंगी होने पर उत्पाद के दाम भी बढ़ेंगे, जो ग्राहक मानने को तैयार नहीं है।
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पहले लेमिनेशन रोल 200 रुपये प्रति किलो का आता था, लेकिन अब वह 300 रुपये पार कर चुका है, ऐसे में कॉपी किताबों और पैकेजिंग महंगी हो गई है। -एसके राणा, उद्यमी
ग्राहकों की मांग है कि फरवरी में तय रेट पर ही उन्हें उत्पाद मिले, लेकिन असल में तब से उत्पादन काफी महंगा हुआ है, इससे सीधा असर सौदे पर पड़ रहा है। -अमित अग्रवाल
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के चलते प्रिंटिंग, पैकेजिंग और लेमिनेशन से जुड़े उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। प्रिंटिंग के उपयोग में आने वाली स्याही, लेमिनेशन रोल, मशीनों की सफाई में इस्तेमाल होने वाले केमिकल समेत अन्य कच्चे माल की कीमतों में करीब 25 से 30 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। इससे उद्यमियों की उत्पादन लागत बढ़ने के साथ ही कारोबार पर भी आर्थिक दबाव पड़ा है।
उद्योग संचालकों का कहना है कि कई जरूरी सामग्री विदेशों से आयात की जाती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग चार्ज और डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने का सीधा असर इन उत्पादों पर पड़ा है। फरवरी तक जो लेमिनेशन रोल 200 रुपये प्रति किलो तक मिल जाता था, अब वह 300 रुपये से अधिक का मिल रहा है। इसी तरह प्रिंटिंग इंक, सॉल्वेंट और मशीन क्लीनिंग केमिकल के दाम भी बढ़े हैं, जिससे मशीनों को साफ कराना भी महंगा हो गया है।
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उद्यमियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्राहकों की पुरानी दरों पर सामान उपलब्ध कराने की मांग है। उनका कहना है कि ग्राहक अब यह मांग कर रहा है कि उन्हें पुराने रेट पर ही उत्पाद उपलब्ध कराया जाए। इतना ही नहीं कई कंपनियों के पुराने ऑर्डर पहले से तय रेट पर चल रहे हैं, जबकि उत्पादन लागत काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में मुनाफा कम होने के साथ कई इकाइयों को नुकसान हो रहा है। सेक्टर-63, 10 और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के उद्यमियों का कहना है कि यदि यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो छोटे उद्योगों के संचालन पर संकट गहरा सकता है। कुछ इकाइयों ने उत्पादन घटाना शुरू कर दिया है, जबकि कई नए ऑर्डर उद्यमियों को मिलना बंद हो गए हैं।
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पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने से ढुलाई भी महंगी
उद्यमियों ने बताया कि हाल ही में सरकार ने पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं, इससे ढुलाई 25 फीसदी महंगी हो गई है। यह एक अलग आर्थिक बोझ है जो उद्यमियों पर पड़ा है, लेकिन इसका हल क्या है किसी को नहीं पता। उत्पादन के साथ माल ढुलाई महंगी होने पर उत्पाद के दाम भी बढ़ेंगे, जो ग्राहक मानने को तैयार नहीं है।
पहले लेमिनेशन रोल 200 रुपये प्रति किलो का आता था, लेकिन अब वह 300 रुपये पार कर चुका है, ऐसे में कॉपी किताबों और पैकेजिंग महंगी हो गई है। -एसके राणा, उद्यमी
ग्राहकों की मांग है कि फरवरी में तय रेट पर ही उन्हें उत्पाद मिले, लेकिन असल में तब से उत्पादन काफी महंगा हुआ है, इससे सीधा असर सौदे पर पड़ रहा है। -अमित अग्रवाल