फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Farmers leader Bihari Singh 'Baghi' passed away

किसान नेता चौधरी बिहारी सिंह ‘बागी’ का निधन

Mon, 30 Nov 2020 12:14 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 30 Nov 2020 12:14 AM IST
विज्ञापन
Farmers leader Bihari Singh 'Baghi' passed away
किसान नेता चौधरी बिहारी सिंह - फोटो : Grnoida
किसान नेता चौधरी बिहारी सिंह ‘बागी’ का निधन
विज्ञापन

दादरी (ऋषिपाल सिंह)। किसानों के लिए सत्ता को हिला देने वाले नेता चौधरी बिहारी सिंह ‘बागी’ का रविवार को लंबी बीमारी के कारण निधन हो गया। वह 79 वर्ष के थे। उनके निधन से न केवल किसानों बल्कि स्थानीय लोगों में भी गहरा शोक है। उन्होंने छात्र जीवन से राजनीति की शुरुआत की थी। इसके बाद पूरा जीवन किसानों के लिए संघर्ष करते गुजार दिया। उन्होंने मिल्क कंट्रोल एक्ट के विरोध कर दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग को भी बाधित कर दिया था।
दादरी ब्लाक के गांव रूपवास निवासी चौधरी बिहारी सिंह बागी लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने नोएडा स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। वर्ष 1962 में उन्होंने सिकंद्राबाद स्थित अग्रवाल कॉलेज से छात्र संघ का चुनाव लड़ा था। वर्ष 1963 में गाजियाबाद के एमएमएच कॉलेज में छात्र संघ की स्थापना की। इसके बाद लाल बहादुर शास्त्री के संपर्क में आए। उस दौरान क्षेत्र के लोग ट्रेनों से दूध दिल्ली ले जाया करते थे। दिल्ली में मिल्क कंट्रोल एक्ट के तहत दूध के सैंपल लेकर लोगों को परेशान किया जाता था। वर्ष 1967 में दिल्ली में मिल्क कंट्रोल एक्ट को समाप्त कराने के लिए विरोध-प्रदर्शन था। उन्होंने दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर क्षेत्रीय लोगों के सहयोग से ट्रेनों का आवागमन बंद कर दिया था। इससे न केवल ट्रेनों का आवागमन रुक गया, बल्कि दूध आपूर्ति बंद हो गई। आंदोलन को खूब जनसमर्थन मिला था।
विज्ञापन

कांग्रेस ने नहीं दिया टिकट, शेर लाकर कहलाए ‘बागी’
मिल्क कंट्रोल एक्ट के विरोध एवं किसानों के लिए संघर्ष करने के ही कारण वर्ष 1974 में कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके चलते चौधरी बिहारी सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में कूद गए। वह शेर के चुनाव चिन्ह पर विधानसभा का चुनाव लड़े थे। प्रचार के दौरान मिहिर भोज कॉलेज में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की चुनावी सभा का आयोजन किया गया था। बिहारी सिंह गाजियाबाद में चल रहे एक सर्कस से 500 रुपये में शेर लेकर सभा में पहुंच गए। पुलिस-प्रशासन ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह शेर को रैली के समीप ले गए और सभा को फेल कर जनता को आकर्षित करने में कामयाब हो गए। इसके बाद ही उनका नाम बिहारी सिंह ‘बागी’ हो गया था। वर्ष 1991 में सपा की टिकट पर दूसरा विधानसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि, वह दोनों चुनाव हार गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

आंदोलन कर किसानों को दिलाया अधिकार
बिहारी सिंह ने नोएडा की स्थापना के दौरान किसानों की जमीन का सस्ते दाम पर अधिग्रहण का कड़ा विरोध किया। उन्होंने किसानों को जागरूक कर किसान संघर्ष समिति बनाई और किसानों को अधिकार दिलाने के लिए आंदोलन चलाया। एनटीपीसी के लिए जमीन अधिग्रहण और किसानों को मुआवजे के लिए आंदोलन कर किसान परिवारों के सदस्यों को नौकरी में आरक्षण दिलाया था।

किसान आंदोलन के बीच हुआ निधन
इस समय कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन कर रहे हैं। किसान बार-बार चौधरी बिहारी सिंह और उनके संघर्ष को याद कर रहे थे, लेकिन इसी बीच किसानों के लिए जीवन गुजारने वाले नेता के निधन से पूरा क्षेत्र शोक में डूबा है। बड़ी संख्या में लोग शोक व्यक्त करने उनके घर पहुंचे। उनका अंतिम संस्कार गांव रूपवास में किया गया। इस दौरान सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष फकीरचंद नागर, राजसिंह प्रधान, धीरज सिंह, आरके कसाना, योगेंद्र प्रधान, चिंता सिंह प्रधान समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed