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फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार
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नोएडा। पुलिस और एक टेलीकॉम कंपनी ने सोमवार को सेक्टर-63 में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर दो लोगों को गिरफ्तार किया है। विदेशों से कॉल लैंड कराई जाती थी जो विभिन्न लोकेशन पर जाती थीं। इस तरह सरकार को राजस्व में बड़ा घाटा हो रहा था। गिरोह का सरगना अब भी फरार है। तलाश के लिए पुलिस टीमें गठित की गई हैं।
डीसीपी सेंट्रल नोएडा राजेश एस ने बताया कि सेक्टर-63 थाना पुलिस को कुछ दिन पहले क्षेत्र में सर्वर को डायवर्ट करने की शिकायत मिली थी। सोमवार को सूचना के आधार पर सेक्टर 63 के सी ब्लॉक में पहुंचे तो यहां चल रहे फर्जी टेलीकॉम एक्सचेंज का खुलासा हुआ। पुलिस ने मौके से स्वीटी डोगरा निवासी दिल्ली और पंकज निवासी बिहार को गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपी नोएडा में किराये के मकान में रहकर पिछले कई सालों से यही काम कर रहे थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से बैट्री, सीपीयू , कीबोर्ड, माउस, पावर केबल, 12 हार्ड डिस्क, 32 सिग्नल एंटीना, 26 नेटवर्किंग केबल, फोन, विजिटिंग कार्ड, 24 सिम कार्ड, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड बरामद किए हैं।
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खाड़ी देशों से आ रही कॉल करते थे डायवर्ट
शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि यह खाड़ी देशों से आने वाली कॉल को डायवर्ट करते थे। इसका फायदा कोई आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने वाला व्यक्ति भी कर सकता था। सऊदी अरब, कतर, ऑस्ट्रेलिया समेत करीब बीस से अधिक खाड़ी देशों से आने वाली कॉल को डायवर्ट करता था। यह आरोपी यहां से कॉल डायवर्ट कराकर दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई राज्यों के लोगों की कॉलिंग करा रहे थे। खाड़ी देशों में रहने वाले लोग अपने परिजनों से कम पैसे में बात कर रहे थे। तकनीकी फ्रॉड करके आरोपियों ने भारत सरकार से अलग ही अपनी एक लाइन बना ली थी, जिसका कुछ भी पैसा नहीं लगता था। इससे विदेश से कॉल करने वाले लोगों को कम पैसे में बात हो जाती थी। हालांकि कॉल करने वाले और कॉल लेने वालों को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। यहां से हो रहा पूरा फायदा इसी गैंग को मिल रहा था। दूसरी ओर आतंकी गतिविधि में शामिल यदि कोई इस लाइन का फायदा उठाकर कॉल कर लेता तो उसकी जानकारी भी सरकार को नहीं हो पाती। डीसीपी ने बताया कि इससे टेलीकॉम कंपनी को तो नुकसान हो ही रहा था। इसके साथ भारत सरकार को हर महीने कई लाख रुपयों का नुकसान हो रहा था।
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रिमोट से चल रहा था पूरा सिस्टम
डीसीपी ने बताया कि गैंग ने ऑफिस बनाकर पूरा सिस्टम तैयार कर लिया था। यहां कोई व्यक्ति नहीं बैठता था बल्कि पूरा सिस्टम एक रिमोट पर चल रहा था। पकड़े गए आरोपी दूसरे शहरों में अलग-अलग जगहों पर बैठकर कई और साथियों की मदद से फर्जी कॉल सेंटर को चला रहे थे। यह जीओ टेलीकॉम से कनेक्शन लेकर गेटवे के माध्यम से सर्वर में कनेक्ट कर इंटरनेट से कंट्रोल करते थे। इसके बाद इंटरनेशनल कॉलिंग को इंडिया में गेटवे के माध्यम से लैंड करवाते थे। इसमें लोकेशन विदेश का शो नहीं हो रहा था लेकिन टेलीकॉम कंपनी का नंबर नोएडा एसटीडी कोड से दिख रहा था। पूरे सर्वर को एक खास सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्वीटी कंट्रोल कर रहा था।
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डीसीपी सेंट्रल नोएडा राजेश एस ने बताया कि सेक्टर-63 थाना पुलिस को कुछ दिन पहले क्षेत्र में सर्वर को डायवर्ट करने की शिकायत मिली थी। सोमवार को सूचना के आधार पर सेक्टर 63 के सी ब्लॉक में पहुंचे तो यहां चल रहे फर्जी टेलीकॉम एक्सचेंज का खुलासा हुआ। पुलिस ने मौके से स्वीटी डोगरा निवासी दिल्ली और पंकज निवासी बिहार को गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपी नोएडा में किराये के मकान में रहकर पिछले कई सालों से यही काम कर रहे थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से बैट्री, सीपीयू , कीबोर्ड, माउस, पावर केबल, 12 हार्ड डिस्क, 32 सिग्नल एंटीना, 26 नेटवर्किंग केबल, फोन, विजिटिंग कार्ड, 24 सिम कार्ड, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड बरामद किए हैं।
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खाड़ी देशों से आ रही कॉल करते थे डायवर्ट
शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि यह खाड़ी देशों से आने वाली कॉल को डायवर्ट करते थे। इसका फायदा कोई आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने वाला व्यक्ति भी कर सकता था। सऊदी अरब, कतर, ऑस्ट्रेलिया समेत करीब बीस से अधिक खाड़ी देशों से आने वाली कॉल को डायवर्ट करता था। यह आरोपी यहां से कॉल डायवर्ट कराकर दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई राज्यों के लोगों की कॉलिंग करा रहे थे। खाड़ी देशों में रहने वाले लोग अपने परिजनों से कम पैसे में बात कर रहे थे। तकनीकी फ्रॉड करके आरोपियों ने भारत सरकार से अलग ही अपनी एक लाइन बना ली थी, जिसका कुछ भी पैसा नहीं लगता था। इससे विदेश से कॉल करने वाले लोगों को कम पैसे में बात हो जाती थी। हालांकि कॉल करने वाले और कॉल लेने वालों को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। यहां से हो रहा पूरा फायदा इसी गैंग को मिल रहा था। दूसरी ओर आतंकी गतिविधि में शामिल यदि कोई इस लाइन का फायदा उठाकर कॉल कर लेता तो उसकी जानकारी भी सरकार को नहीं हो पाती। डीसीपी ने बताया कि इससे टेलीकॉम कंपनी को तो नुकसान हो ही रहा था। इसके साथ भारत सरकार को हर महीने कई लाख रुपयों का नुकसान हो रहा था।
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रिमोट से चल रहा था पूरा सिस्टम
डीसीपी ने बताया कि गैंग ने ऑफिस बनाकर पूरा सिस्टम तैयार कर लिया था। यहां कोई व्यक्ति नहीं बैठता था बल्कि पूरा सिस्टम एक रिमोट पर चल रहा था। पकड़े गए आरोपी दूसरे शहरों में अलग-अलग जगहों पर बैठकर कई और साथियों की मदद से फर्जी कॉल सेंटर को चला रहे थे। यह जीओ टेलीकॉम से कनेक्शन लेकर गेटवे के माध्यम से सर्वर में कनेक्ट कर इंटरनेट से कंट्रोल करते थे। इसके बाद इंटरनेशनल कॉलिंग को इंडिया में गेटवे के माध्यम से लैंड करवाते थे। इसमें लोकेशन विदेश का शो नहीं हो रहा था लेकिन टेलीकॉम कंपनी का नंबर नोएडा एसटीडी कोड से दिख रहा था। पूरे सर्वर को एक खास सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्वीटी कंट्रोल कर रहा था।