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ए-4 पेपर शीट के प्रयोग की व्यवहारिकता की कर रहे पड़ताल: हाईकोर्ट
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाएं दाखिल करने के लिए ए-4 साइज पेपर के प्रयोग की व्यवहारिकता की पड़ताल की जा रही है और जल्द ही इस पर कोई निर्णय लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि अभी लीगल साइज के पेपर पर एक ओर टाइप कर ही याचिकाएं दाखिल की जाती हैं।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने सेंटर फोर एकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टेमेटिक चेंज (सीएएससी) की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस मांग की प्रशासनिक पहलू से पड़ताल की जा रही है। खंडपीठ ने याचिका पर 16 अप्रैल की तारीख तय करते हुए कहा कि अगली तारीख तक इस पर कोई निर्णय ले लिया जाएगा। सीएएससी ने अपनी याचिका में कहा कि ए-4 साइज के पेपर पर दोनों लिखकर याचिकाएं दाखिल की जाएं तो इससे केवल पर्यावरण सुरक्षित होगा बल्कि पेपर की मांग भी आधी हो जाएगी। इससे याचिकाओं के रखरखाव में भी कम स्थान की जरूरत होगी।
याची के वकील विराग गुप्ता ने कहा कि अगर हाईकोर्ट अगर ए-4 साइज पेपर के प्रयोग की अनुमति देता है तो इससे 6.7 लाख पन्नों की सालाना बचत केवल हाईकोर्ट में होगी। इससे हर माह 80 पेड़ कटने से बचेंगे और 67 लिटर पानी की भी बचत होगी। अगर ए-4 साइज के पेपर पर दोनों ओर टाइप कर प्रयोग करने की अनुमति जिला अदालतों में भी दे दी गई तो इससे 72.50 लाख पन्नों की बचत होगी। इससे 870 पेड़ों को कटने से बचाया जा सकेगा और 7.25 करोड़ लिटर पानी की एक माह में बचत होगी। याचिकाकर्ताओं को लीगल पेपर लेने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है जबकि ए-4 साइज पेपर आसानी से उपलब्ध है। सुप्रीम कोर्ट व देश के हाईकोर्ट पेपर के दोनों ओर टाइप की हुई याचिकाएं दायर करने की अनुमति प्रदान कर चुके हैं। -एजेंसी
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने सेंटर फोर एकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टेमेटिक चेंज (सीएएससी) की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस मांग की प्रशासनिक पहलू से पड़ताल की जा रही है। खंडपीठ ने याचिका पर 16 अप्रैल की तारीख तय करते हुए कहा कि अगली तारीख तक इस पर कोई निर्णय ले लिया जाएगा। सीएएससी ने अपनी याचिका में कहा कि ए-4 साइज के पेपर पर दोनों लिखकर याचिकाएं दाखिल की जाएं तो इससे केवल पर्यावरण सुरक्षित होगा बल्कि पेपर की मांग भी आधी हो जाएगी। इससे याचिकाओं के रखरखाव में भी कम स्थान की जरूरत होगी।
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याची के वकील विराग गुप्ता ने कहा कि अगर हाईकोर्ट अगर ए-4 साइज पेपर के प्रयोग की अनुमति देता है तो इससे 6.7 लाख पन्नों की सालाना बचत केवल हाईकोर्ट में होगी। इससे हर माह 80 पेड़ कटने से बचेंगे और 67 लिटर पानी की भी बचत होगी। अगर ए-4 साइज के पेपर पर दोनों ओर टाइप कर प्रयोग करने की अनुमति जिला अदालतों में भी दे दी गई तो इससे 72.50 लाख पन्नों की बचत होगी। इससे 870 पेड़ों को कटने से बचाया जा सकेगा और 7.25 करोड़ लिटर पानी की एक माह में बचत होगी। याचिकाकर्ताओं को लीगल पेपर लेने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है जबकि ए-4 साइज पेपर आसानी से उपलब्ध है। सुप्रीम कोर्ट व देश के हाईकोर्ट पेपर के दोनों ओर टाइप की हुई याचिकाएं दायर करने की अनुमति प्रदान कर चुके हैं। -एजेंसी
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