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Noida News: उपभोक्ता के कहने पर बिजली कनेक्शन न काटना पड़ा भारी
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उपभोक्ता के कहने पर बिजली कनेक्शन न काटना पड़ा भारी
- जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग का आदेश - निगम नहीं वसूल सकेगा बिल
- मानसिक संताप के रूप में उपभोक्ता को तीन हजार रुपये भी देने होंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। बिजली का उपयोग न करने और बार-बार अनुरोध करने के बाद भी एक उपभोक्ता का कनेक्शन न काटना बिजली निगम को भारी पड़ गया है। जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग के आदेश के अनुसार अब निगम उपभोक्ता से इस अवधि का बिल नहीं वसूल सकेगा। वहीं उपभोक्ता को मानसिक संताप के रूप में तीन हजार रुपये भी देने होंगे।
रबुपुरा के ग्राम नंगला मटोना बांगर निवासी नरेंद्र कुमार ने पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम से बिजली का घरेलू कनेक्शन लिया था। बिल का हर माह नियमित रूप से भुगतान किया। इसके बाद फरवरी 2014 में एक मुश्त समाधान योजना के तहत समस्त धनराशि का भुगतान कर दिया और तत्कालीन कनेक्शन को काटकर पीडी कनेक्शन करने का अनुरोध किया। उसके बाद कोई बिल निगम ने नहीं भेजा। हालांकि 31 मार्च 2018 को उनका बिल 30393 रुपये आ गया। जिसको लेकर वह निगम के कार्यालय पहुंचे और गलत बिल को रद्द करने का अनुरोध किया है।
उपभोक्ता ने निगम को बताया कि कनेक्शन पीडी न होने पर उन्होंने बिजली का इस्तेमाल बंद कर दिया था। वह सौर ऊर्जा पैनल का इस्तेमाल कर रहे थे। बिल रद्द न होने पर उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया। यहां निगम ने पक्ष भी नहीं रखा आयोग ने एक पक्षीय सुनवाई करते हुए निगम को आदेश दिए कि वह उपभोक्ता से बिना बिल वसूले घरेलू कनेक्शन का स्थाई रूप से विच्छेदन करे। साथ ही मानसिक संताप के 3000 रुपये और वाद व्यय के एक हजार रुपये भी अदा करे।
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- जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग का आदेश - निगम नहीं वसूल सकेगा बिल
- मानसिक संताप के रूप में उपभोक्ता को तीन हजार रुपये भी देने होंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। बिजली का उपयोग न करने और बार-बार अनुरोध करने के बाद भी एक उपभोक्ता का कनेक्शन न काटना बिजली निगम को भारी पड़ गया है। जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग के आदेश के अनुसार अब निगम उपभोक्ता से इस अवधि का बिल नहीं वसूल सकेगा। वहीं उपभोक्ता को मानसिक संताप के रूप में तीन हजार रुपये भी देने होंगे।
रबुपुरा के ग्राम नंगला मटोना बांगर निवासी नरेंद्र कुमार ने पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम से बिजली का घरेलू कनेक्शन लिया था। बिल का हर माह नियमित रूप से भुगतान किया। इसके बाद फरवरी 2014 में एक मुश्त समाधान योजना के तहत समस्त धनराशि का भुगतान कर दिया और तत्कालीन कनेक्शन को काटकर पीडी कनेक्शन करने का अनुरोध किया। उसके बाद कोई बिल निगम ने नहीं भेजा। हालांकि 31 मार्च 2018 को उनका बिल 30393 रुपये आ गया। जिसको लेकर वह निगम के कार्यालय पहुंचे और गलत बिल को रद्द करने का अनुरोध किया है।
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उपभोक्ता ने निगम को बताया कि कनेक्शन पीडी न होने पर उन्होंने बिजली का इस्तेमाल बंद कर दिया था। वह सौर ऊर्जा पैनल का इस्तेमाल कर रहे थे। बिल रद्द न होने पर उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया। यहां निगम ने पक्ष भी नहीं रखा आयोग ने एक पक्षीय सुनवाई करते हुए निगम को आदेश दिए कि वह उपभोक्ता से बिना बिल वसूले घरेलू कनेक्शन का स्थाई रूप से विच्छेदन करे। साथ ही मानसिक संताप के 3000 रुपये और वाद व्यय के एक हजार रुपये भी अदा करे।
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