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Noida News: जमीन के कामकाज के लिए बढ़ा भरोसे का दस्तावेज
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सेक्टर 33ए स्थित उप निबंधक कार्यालय : फाइल
फोटो
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- तीन महीने में 868 लोगों ने दूसरों को दी अपनी संपत्ति की जिम्मेदारी
- अगस्त के मुकाबले सितंबर में 53 फीसदी बढ़ी पीओए की संख्या
ऋषभ कौशल
नोएडा। शहर में संपत्ति मालिक अपनी जमीन और उससे जुड़े कामकाज की जिम्मेदारी भरोसेमंद लोगों को सौंप रहे हैं। जुलाई से सितंबर के बीच रजिस्ट्री विभाग में 868 पावर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) दर्ज हुईं। इनमें सितंबर में सबसे अधिक 345 पीओए दर्ज की गईं। अधिकारियों के अनुसार, शहर से बाहर या विदेश में रहने वाले संपत्ति मालिक अपनी गैरमौजूदगी में जमीन और अन्य संपत्तियों से जुड़े जरूरी काम कराने के लिए किसी विश्वासपात्र व्यक्ति को अधिकृत करते हैं।
सेक्टर-33ए स्थित रजिस्ट्री विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में 298, अगस्त में 225 और सितंबर में 345 पीओए दर्ज हुईं। अगस्त के मुकाबले सितंबर में 120 अधिक पीओए दर्ज हुईं। इस तरह एक महीने में इनकी संख्या करीब 53 प्रतिशत बढ़ गई। तीन महीनों में स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी के मामले बेहद कम रहे। जुलाई में केवल एक, जबकि अन्य महीनों में तीन से चार मामले दर्ज हुए। ज्यादातर मामलों में लोगों ने जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से दूसरे व्यक्ति को अपनी ओर से काम करने का अधिकार दिया।
रोजाना औसतन 10 पीओएः डिप्टी रजिस्ट्रार कामना राय के अनुसार, जुलाई से सितंबर के बीच दर्ज 868 पीओए के आधार पर रोजाना औसतन करीब 10 पीओए दर्ज हुईं। उन्होंने बताया कि कई संपत्ति मालिक बुजुर्ग हैं या अपने बच्चों के साथ विदेश अथवा किसी दूसरे शहर में रह रहे हैं। ऐसे लोग अपनी जमीन की देखरेख और उससे जुड़े कामों के लिए किसी भरोसेमंद व्यक्ति को अधिकृत करते हैं। इसके तहत फ्लैट, प्लॉट, दुकान और अन्य व्यावसायिक संपत्तियां भी शामिल हो सकती हैं।
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मालिकाना हक नहीं होता हस्तांतरितः नोएडा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता प्रवीण डेढ़ा ने बताया कि पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिये संपत्ति का मालिक किसी दूसरे व्यक्ति को निर्धारित कार्य करने का अधिकार देता है। पीओए में दिए गए अधिकार उसके दायरे पर निर्भर करते हैं। यदि अधिकृत व्यक्ति विश्वास के अनुरूप काम नहीं करता है तो नियमानुसार पीओए निरस्त भी कराई जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर संपत्ति का मालिकाना हक दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं होता।
एक काम के लिए स्पेशल पीओः अधिकारियों के अनुसार, स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी किसी खास काम के लिए दी जाती है। इसमें बैंक संबंधी कार्य, खाते का लेनदेन देखने या किसी विशेष कानूनी अथवा संपत्ति संबंधी काम के लिए दूसरे व्यक्ति को अधिकार दिया जाता है। वहीं, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी में संपत्ति से जुड़े कई कार्यों के लिए दूसरे व्यक्ति को व्यापक अधिकार दिए जाते हैं। हालांकि इसके अधिकार और शर्तें पीओए में स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाती हैं।
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महीना पावर ऑफ अटॉर्नी स्पेशल
जुलाई 298 1
अगस्त 225 5
सितंबर 345 3
कुल 868 9
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पावर ऑफ अटॉर्नी का उपयोग तब किया जाता है, जब वास्तविक संपत्ति का मालिक विदेश में हो या विशेष परिस्थितियों में शहर में संपत्ति से जुड़े मामलों में उपस्थित न हो सके। ऐसी स्थिति में पीओए के जरिये वह अपने विश्वासपात्र व्यक्ति को निर्धारित कामों के लिए अधिकृत कर सकता है। -अरुण कुमार शर्मा, एआईजी स्टांप प्रथम, उप निबंधक कार्यालय, गौतमबुद्ध नगर
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- तीन महीने में 868 लोगों ने दूसरों को दी अपनी संपत्ति की जिम्मेदारी
- अगस्त के मुकाबले सितंबर में 53 फीसदी बढ़ी पीओए की संख्या
ऋषभ कौशल
नोएडा। शहर में संपत्ति मालिक अपनी जमीन और उससे जुड़े कामकाज की जिम्मेदारी भरोसेमंद लोगों को सौंप रहे हैं। जुलाई से सितंबर के बीच रजिस्ट्री विभाग में 868 पावर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) दर्ज हुईं। इनमें सितंबर में सबसे अधिक 345 पीओए दर्ज की गईं। अधिकारियों के अनुसार, शहर से बाहर या विदेश में रहने वाले संपत्ति मालिक अपनी गैरमौजूदगी में जमीन और अन्य संपत्तियों से जुड़े जरूरी काम कराने के लिए किसी विश्वासपात्र व्यक्ति को अधिकृत करते हैं।
सेक्टर-33ए स्थित रजिस्ट्री विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में 298, अगस्त में 225 और सितंबर में 345 पीओए दर्ज हुईं। अगस्त के मुकाबले सितंबर में 120 अधिक पीओए दर्ज हुईं। इस तरह एक महीने में इनकी संख्या करीब 53 प्रतिशत बढ़ गई। तीन महीनों में स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी के मामले बेहद कम रहे। जुलाई में केवल एक, जबकि अन्य महीनों में तीन से चार मामले दर्ज हुए। ज्यादातर मामलों में लोगों ने जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से दूसरे व्यक्ति को अपनी ओर से काम करने का अधिकार दिया।
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रोजाना औसतन 10 पीओएः डिप्टी रजिस्ट्रार कामना राय के अनुसार, जुलाई से सितंबर के बीच दर्ज 868 पीओए के आधार पर रोजाना औसतन करीब 10 पीओए दर्ज हुईं। उन्होंने बताया कि कई संपत्ति मालिक बुजुर्ग हैं या अपने बच्चों के साथ विदेश अथवा किसी दूसरे शहर में रह रहे हैं। ऐसे लोग अपनी जमीन की देखरेख और उससे जुड़े कामों के लिए किसी भरोसेमंद व्यक्ति को अधिकृत करते हैं। इसके तहत फ्लैट, प्लॉट, दुकान और अन्य व्यावसायिक संपत्तियां भी शामिल हो सकती हैं।
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मालिकाना हक नहीं होता हस्तांतरितः नोएडा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता प्रवीण डेढ़ा ने बताया कि पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिये संपत्ति का मालिक किसी दूसरे व्यक्ति को निर्धारित कार्य करने का अधिकार देता है। पीओए में दिए गए अधिकार उसके दायरे पर निर्भर करते हैं। यदि अधिकृत व्यक्ति विश्वास के अनुरूप काम नहीं करता है तो नियमानुसार पीओए निरस्त भी कराई जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर संपत्ति का मालिकाना हक दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं होता।
एक काम के लिए स्पेशल पीओः अधिकारियों के अनुसार, स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी किसी खास काम के लिए दी जाती है। इसमें बैंक संबंधी कार्य, खाते का लेनदेन देखने या किसी विशेष कानूनी अथवा संपत्ति संबंधी काम के लिए दूसरे व्यक्ति को अधिकार दिया जाता है। वहीं, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी में संपत्ति से जुड़े कई कार्यों के लिए दूसरे व्यक्ति को व्यापक अधिकार दिए जाते हैं। हालांकि इसके अधिकार और शर्तें पीओए में स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाती हैं।
महीना पावर ऑफ अटॉर्नी स्पेशल
जुलाई 298 1
अगस्त 225 5
सितंबर 345 3
कुल 868 9
पावर ऑफ अटॉर्नी का उपयोग तब किया जाता है, जब वास्तविक संपत्ति का मालिक विदेश में हो या विशेष परिस्थितियों में शहर में संपत्ति से जुड़े मामलों में उपस्थित न हो सके। ऐसी स्थिति में पीओए के जरिये वह अपने विश्वासपात्र व्यक्ति को निर्धारित कामों के लिए अधिकृत कर सकता है। -अरुण कुमार शर्मा, एआईजी स्टांप प्रथम, उप निबंधक कार्यालय, गौतमबुद्ध नगर