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सीसीटीवी की निगरानी में होगा जिला, स्थान हो रहे चिह्नित
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ग्रेटर नोएडा। जिलेवासियों की वर्षों की मांग जल्द पूरी होने की संभावना है। जल्द पूरा जिला क्लोज सर्किट टेलीविजन (सीसीटीवी) कैमरों की जद में होगा। इसके लिए 132 करोड़ का बजट पास हुआ है। आलाधिकारियों के निर्देश पर हर थाना क्षेत्र में स्थान चिह्नित किए जा रहे हैं। हर थाना क्षेत्र के 20 स्थान चिह्नित किए जा रहे हैं, लेकिन ग्रेनो वेस्ट, बीटा-2, दादरी, सेक्टर-20 आदि क्षेत्र में इनकी संख्या 20 से भी अधिक रहने की संभावना है। सीसीटीवी कैमरों से अपराध नियंत्रित होगा। साथ ही महिलाओं की सुरक्षा भी बढ़ेगी।
गौतमबुद्ध नगर को प्रदेश की शो विंडो माना जाता है। हाईटेक जिला होने के बावजूद सीसीटीवी की कमी यहां अक्सर आड़े आती है। यहां जब भी नए अधिकारी की तैनाती होती तो वह सबसे पहले सीसीटीवी लगवाने के दावे करता है, लेकिन फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। निजी स्तर पर कंपनी, दफ्तर, मकान आदि पर सीसीटीवी लगे तो हैं, लेकिन बड़ी वारदात होने पर पता चलता है कि घटनास्थल के आसपास लगा सीसीटीवी कैमरा या तो बंद था या फिर फुटेज साफ नहीं है।
इससे आरोपियों की पहचान नहीं हो पाती है। ग्रेनो वेस्ट में गौरव चंदेल हत्याकांड के बाद वहां के क्षेत्र के सीसीटीवी की निगरानी में नहीं होने की बात सामने आई थी। इससे पुलिस को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। सोमवार रात मैनेजर पद पर कार्यरत महिला से गौड़ सिटी के पास चेन लूटी गई थी। वहां के सीसीटीवी फुटेज की क्वालिटी बेहतर नहीं है। इससे बदमाशों को पहचान पाना मुश्किल है।
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चौकी प्रभारी से तक से ली जा रही राय
जिले में किस स्थान पर सीसीटीवी की सबसे अधिक आवश्यकता है। इसके लिए चौकी प्रभारी से लेकर आला अधिकारी तक से राय ली जा रही है। जिन स्थानों पर पहले से बेहतर सीसीटीवी लगे हैं, उन्हें छोड़कर अन्य अधिक आवश्यकता वाले स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है। दूसरे जिलों और शहरों की सीमाओं के आसपास भी स्थान चिह्नित किया जा रहा है। कंट्रोल रूम बनाकर सभी सीसीटीवी की भी निगरानी की जाएगी।
सीसीटीवी लगाने के लिए स्थान चिह्नित किए जा रहे हैं। बजट अभी नहीं मिला है, लेकिन तैयारी पहले से की जा रही है। सभी मुख्य मार्ग और चौराहे सीसीटीवी की निगरानी में होंगे।
- लव कुमार, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था
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गौतमबुद्ध नगर को प्रदेश की शो विंडो माना जाता है। हाईटेक जिला होने के बावजूद सीसीटीवी की कमी यहां अक्सर आड़े आती है। यहां जब भी नए अधिकारी की तैनाती होती तो वह सबसे पहले सीसीटीवी लगवाने के दावे करता है, लेकिन फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। निजी स्तर पर कंपनी, दफ्तर, मकान आदि पर सीसीटीवी लगे तो हैं, लेकिन बड़ी वारदात होने पर पता चलता है कि घटनास्थल के आसपास लगा सीसीटीवी कैमरा या तो बंद था या फिर फुटेज साफ नहीं है।
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इससे आरोपियों की पहचान नहीं हो पाती है। ग्रेनो वेस्ट में गौरव चंदेल हत्याकांड के बाद वहां के क्षेत्र के सीसीटीवी की निगरानी में नहीं होने की बात सामने आई थी। इससे पुलिस को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। सोमवार रात मैनेजर पद पर कार्यरत महिला से गौड़ सिटी के पास चेन लूटी गई थी। वहां के सीसीटीवी फुटेज की क्वालिटी बेहतर नहीं है। इससे बदमाशों को पहचान पाना मुश्किल है।
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चौकी प्रभारी से तक से ली जा रही राय
जिले में किस स्थान पर सीसीटीवी की सबसे अधिक आवश्यकता है। इसके लिए चौकी प्रभारी से लेकर आला अधिकारी तक से राय ली जा रही है। जिन स्थानों पर पहले से बेहतर सीसीटीवी लगे हैं, उन्हें छोड़कर अन्य अधिक आवश्यकता वाले स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है। दूसरे जिलों और शहरों की सीमाओं के आसपास भी स्थान चिह्नित किया जा रहा है। कंट्रोल रूम बनाकर सभी सीसीटीवी की भी निगरानी की जाएगी।
सीसीटीवी लगाने के लिए स्थान चिह्नित किए जा रहे हैं। बजट अभी नहीं मिला है, लेकिन तैयारी पहले से की जा रही है। सभी मुख्य मार्ग और चौराहे सीसीटीवी की निगरानी में होंगे।
- लव कुमार, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था