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Noida News: 40 फीसदी बढ़ी इको-फ्रेंडली गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों की मांग

Wed, 15 Oct 2025 06:18 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 15 Oct 2025 06:18 PM IST
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Demand for eco-friendly Ganesha and Lakshmi idols increased by 40%
-पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता
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-मिट्टी, गाय के गोबर, बीजयुक्त व प्राकृतिक रंगों से बनी मूर्तियों का क्रेज
-सरोजिनी नगर, चांदनी चौक व अन्य बाजारों में ग्राहकों की जबर्दस्त भीड़
-घर की सजावट से लेकर पूजा तक के हर सामान की जमकर खरीदारी
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-300-600 रुपये तक बिक रहीं मध्यम आकार की सजावटी मूर्तियां
-800-1500 रुपये तक में मिल रहीं बड़ी और बीज से युक्त मूर्तियां
-इस साल कम हुआ सिल्वर प्लेटेड, सजावटी फाइबर मूर्तियों का चलन



संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिवाली के मौके पर दिल्ली के बाजारों में इस बार एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। राजधानी के खरीदार अब पारंपरिक प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की जगह इको-फ्रेंडली गणेश और लक्ष्मी मूर्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते मिट्टी, गाय के गोबर, बीजयुक्त और प्राकृतिक रंगों से बनी मूर्तियां ज्यादा बिक रही हैं। यह मूर्तियां बप्पा और मां की मौजूदगी को और भी खास बनाएगी। कई मूर्तियों को देख यूं लग रहा हैं कि मानो विघ्नहर्ता और मां अभी बोल उठेंगी।

सरोजिनी नगर, सदर बाजार, करोल बाग और चांदनी चौक जैसे प्रमुख बाजारों में दुकानदारों का कहना है कि इस बार मिट्टी और इको-फ्रेंडली मूर्तियों की बिक्री में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दुकानदार राकेश कुमार ने बताया कि छोटी साइज की साधारण मिट्टी की मूर्तियां 80 रुपये से शुरू हो जाती हैं, जबकि मध्यम आकार की सुंदर सजावटी मूर्तियां 300 से 600 रुपये तक बिक रही हैं। बड़ी और बीजयुक्त मूर्तियां, जो पूजा के बाद गमले में लगाकर पौधे में बदल सकती हैं, वह 800 से 1500 रुपये तक में मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि सिल्वर प्लेटेड और सजावटी फाइबर मूर्तियां अब भी बाजार में हैं, लेकिन उनका क्रेज इस साल कुछ कम हुआ है। कई ग्राहक पर्यावरणीय कारणों के चलते अब पीओपी से बनी मूर्तियों से बच रहे हैं, क्योंकि वे पानी में घुलती नहीं हैं और नदियों को प्रदूषित करती हैं।
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पूरा परिवार मूर्तियों को संवारने में जुटा

नजफगढ़ के नंगली डेयरी के पास स्थित मूर्ति बना रहे मूर्तिकार भोले ने बताया कि गणपति बप्पा की मूर्ति में हर बार की तरह इस बार भी इको-फ्रेंडली गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां की मांग है। चार इंच तक की मूर्तियां तैयार की गई हैं। इनकी कीमत तीन सौ रुपये से 100-500 रुपये के बीच में है। विभिन्न प्रकार की मिट्टी के साथ नारियल के बुरादे को मिलाकर मूर्तियां तैयार की जा रही है। सदर बाजार में एक अन्य दुकानदार हरि सिंह ने बताया, इको-फ्रेंडली मूर्तियां न केवल पूजन योग्य हैं, बल्कि जल स्रोतों को प्रदूषित होने से भी बचाती हैं।
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गिफ्ट आइटम्स की मांग भी चरम पर
दिवाली का पर्व नजदीक आते ही दिल्ली-एनसीआर के बाजारों में रौनक लौट आई है। दुकानदारों का कहना है कि इस बार बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर हो रही है। विशेष रूप से रंगोली के सामान, सजावटी लाइट्स और पूजा सामग्री की बिक्री में जबरदस्त उछाल आया है। गिफ्ट आइटम्स की मांग भी चरम पर है। लोग दोस्तों, रिश्तेदारों और सहकर्मियों को देने के लिए सूखे मेवे, मिठाइयों के डिब्बे, इलेक्ट्रॉनिक गिफ्ट्स और डेकोरेटिव आइटम्स खरीद रहे हैं। मॉल्स और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में भी विशेष छूट और ऑफर्स ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं।
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