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बेटी बहुत समझदार थी: विवि में होती सुरक्षा तो बच जाती जान, स्नेहा के पिता बोले- वह नहीं कर सकती किसी का बुरा

Fri, 19 May 2023 10:08 PM IST
Digvijay Singh माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा Published by: Digvijay Singh Updated Fri, 19 May 2023 10:08 PM IST
सार

अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने अपना दुख बयां किया। साथ ही बेटी के अंतिम संस्कार के बाद उसे न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करने की बात कही।

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daughter was very intelligent if there was security in the university
घटनास्थल पर मौजूद पुलिस टीम - फोटो : अमर उजाला-फाइल फोटो

विस्तार

मेरी बेटी बहुत ही समझदार थी। वह कभी किसी का बुरा नहीं कर सकती थी। उसके साथ ऐसा होगा हमे इसका अंदाजा भी नहीं था। यूनिवर्सिटी की तरफ से फोन आया और बेटी के साथ हादसा होने की बात कही गई। आनन-फानन में हम सभी वहां से निकले की तभी समाचार चैनलों के माध्यम से पता चल गया कि बेटी अब नहीं रही। उस वक्त पैरों तले जमीन खिसक गई थी। बेटी के जाने के बाद सब कुछ उजड़ गया है। यह कहना है नेहा के पिता रामकुमार चौरसिया का जो सेक्टर- 94 स्थित पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़े होकर बेटी का शव लेने का इंतजार कर रहे थे। 

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अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने अपना दुख बयां किया। साथ ही बेटी के अंतिम संस्कार के बाद उसे न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करने की बात कही। इस दौरान नेहा के चाचा अनिल चौरसिया ने कहा कि इतना चाक चौबंदी के बीच कोई व्यक्ति पिस्टल के साथ आखिर कैसे परिसर में दाखिल हो सकता है। इससे साफ जाहिर होता है कि वह लड़का अकेला नहीं उसके साथ अभी कई और लोग इस वारदात में शामिल है। इसके पीछे की कहानी पुलिस को पता लगानी चाहिए। भतीजी के अंतिम संस्कार होते ही चाहे कितनी भी जद्दोजहद करनी पड़े करेंगे। लेकिन उसे न्याय दिला कर रहेंगे। वहीं चाचा गोविंद चौरसिया ने कहा कि यूनिवर्सिटी की दी हुई सफाई हमें संतुष्ट नहीं कर पा रही है। बेटी को मुखाग्नि देने के बाद इस मामले में एफआईआर भी दर्ज कराएंगे।

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इसके अलावा पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे अनुज के परिजन सवालों के जवाब देने से बचते नजर आए। वहीं उनके पिता लोकेश ने फोन पर जानकारी देते हुए कहा कि वह विदेश पढ़ाई के लिए जाना चाहता था यह बात उसने खुद फोन पर ही बताई थी। उनका बेटा कभी ऐसी वारदात को अंजाम नहीं दे सकता जरूर इसके पीछे कुछ बड़ा सच छिपा है इसकी जांच होनी चाहिए। कुछ दिन पहले ही वह गांव आकर मिलकर भी गया था। उसकी मां से उसकी फोन पर काफी देर तक बात भी होती रहती थी। उसने किसी से दोस्ती होने की बात भी कभी नहीं बताई थी। वह एक किसान हैं और अनुज के काफी बड़े-बड़े सपने थे। आत्महत्या की जानकारी मिलते ही पूरा परिवार सदमें में है। मां का रो-रोकर बुरा हाल है। बता दें अनुज गांव में पिता, मां और बहन के साथ रहता था।

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ये है पूरा मामला

दादरी के शिव नादर विवि में बीए अंतिम वर्ष समाजशास्त्र के अमरोहा निवासी छात्र अनुज ने सहपाठी कानपुर की स्नेहा चौरसिया की विवि परिसर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद छात्र ने बॉयज हॉस्टल के कमरे में खुद भी गोली मारकर खुदकुशी कर ली थी। पुलिस ने दोनों के शव का पोस्टमार्टम कराया है। लेकिन परिजनों ने इस मामले में कोई शिकायत नहीं दी है। अनुज के अवैध पिस्टल लेकर विवि परिसर में आने और वारदात करने को लेकर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।


 

रात भर बर्फ की सिल्ली ढूंढते रहे परिजन

नेहा के चाचा गोविंद ने बताया कि वह देर रात करीब डेढ़ बजे पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे। वहां मौजूद छह के छह एसी खराब हालत में मिले। शव को रखने की व्यवस्था तक नहीं मिल पाई। रात को ढ़ाई घंटे तक बर्फ ढूंढकर शव को उस पर रखा गया है। वहीं डॉक्टर भी समय पर नहीं आए। ऐसे में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

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