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Noida News: फ्लैट का कब्जा न देने पर अदालत ने पुलिस को जांच के आदेश दिए
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दो महिला निवेशकों ने लाखों की ठगी का आरोप लगाते हुए किया अदालत का रुख
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के गंभीर आरोपों पर अदालत ने सेक्टर-142 कोतवाली पुलिस को जांच के आदेश दिए हैं। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज ने सबी सिंह और वीरवती के मामलों की सुनवाई के बाद कोतवाली को कंपनी के निदेशकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना के लिए निर्देश दिए।
दोनों मामलों में पीड़ितों के आरोप है कि बिल्डर कंपनी ने अपने ब्लॉसम जेस्ट प्रोजेक्ट सेक्टर-143 में फ्लैट बुक कराने के नाम पर लाखों रुपये वसूल लिए लेकिन दस साल बीत जाने के बाद भी उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया। रूबी सिंह और गाजियाबाद की वीरवती बाला का आरोप है उन्होंने क्रमशः 22.32 लाख और 20.91 लाख की रकम कंपनी के खाते में जमा की। कंपनी ने अनुदान योजना के तहत ईएमआई चुकाने का वादा किया था, परंतु अब तक कोई भुगतान नहीं किया गया।
आरोप है कि कंपनी के निदेशक शतिनाथ, विक्रम नाथ, मीना नाथ, देवेंद्र मोहन सक्सेना, अमित कुमार अग्रवाल, मुकेश मोहन श्रीवास्तव, वेद प्रकाश प्रभाकरन मेमन, मयूर डोगरा, आशीष ठक्कर, हिमांशी खन्ना, बरखा बथला और चेतन शर्मा ने मिलकर आपराधिक षड्यंत्र के तहत फर्जी आश्वासन देकर रुपये हड़प लिए है। प्रोजेक्ट के नाम पर दिखाए गए नक्शे और अनुमोदन दस्तावेज झूठे थे जब वह कब्जे के लिए साइट ऑफिस पहुंचे, तो वहां काम बंद मिला।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के गंभीर आरोपों पर अदालत ने सेक्टर-142 कोतवाली पुलिस को जांच के आदेश दिए हैं। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज ने सबी सिंह और वीरवती के मामलों की सुनवाई के बाद कोतवाली को कंपनी के निदेशकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना के लिए निर्देश दिए।
दोनों मामलों में पीड़ितों के आरोप है कि बिल्डर कंपनी ने अपने ब्लॉसम जेस्ट प्रोजेक्ट सेक्टर-143 में फ्लैट बुक कराने के नाम पर लाखों रुपये वसूल लिए लेकिन दस साल बीत जाने के बाद भी उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया। रूबी सिंह और गाजियाबाद की वीरवती बाला का आरोप है उन्होंने क्रमशः 22.32 लाख और 20.91 लाख की रकम कंपनी के खाते में जमा की। कंपनी ने अनुदान योजना के तहत ईएमआई चुकाने का वादा किया था, परंतु अब तक कोई भुगतान नहीं किया गया।
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आरोप है कि कंपनी के निदेशक शतिनाथ, विक्रम नाथ, मीना नाथ, देवेंद्र मोहन सक्सेना, अमित कुमार अग्रवाल, मुकेश मोहन श्रीवास्तव, वेद प्रकाश प्रभाकरन मेमन, मयूर डोगरा, आशीष ठक्कर, हिमांशी खन्ना, बरखा बथला और चेतन शर्मा ने मिलकर आपराधिक षड्यंत्र के तहत फर्जी आश्वासन देकर रुपये हड़प लिए है। प्रोजेक्ट के नाम पर दिखाए गए नक्शे और अनुमोदन दस्तावेज झूठे थे जब वह कब्जे के लिए साइट ऑफिस पहुंचे, तो वहां काम बंद मिला।
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