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Noida News: ठेका श्रमिकों को लाइसेंस नवीनीकरण और संशोधन में मिली राहत
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लाइसेंस में कोई गलती तो 14 दिन में सुधरेगी, श्रम विभाग ने तय की समय-सीमा
टाइपिंग और डेटा एंट्री की गलतियां सुधारने के लिए छह चरणों की प्रक्रिया
आदित्य पाण्डेय
नई दिल्ली।
ठेका श्रमिकों को अब लाइसेंस नवीनीकरण और नाम में संशोधन को लेकर सरकार की ओर से बड़ी राहत दी है। अब से लाइसेंस के आवेदन में टाइपिंग या डेटा एंट्री की गलती होने पर उसके सुधार के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। दिल्ली सरकार के श्रम विभाग ने ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर ठेका श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम, 1970 के तहत लाइसेंस नवीनीकरण और संशोधन के आवेदनों में वास्तविक गलतियां सुधारने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। इसके तहत आवेदन में दर्ज त्रुटियों को सुधारने की प्रक्रिया 14 कार्य दिवसों में पूरी करने का लक्ष्य तय किया गया है। इससे ठेकेदारों और संबंधित प्रतिष्ठानों को लाइसेंस संबंधी कामकाज में होने वाली अनावश्यक देरी से राहत मिल सकती है।
छह चरण में सुधार और समय तय : नई व्यवस्था के तहत आवेदक को गलती के प्रमाण के साथ संबंधित जिला प्रभारी, यानी संयुक्त या उप श्रम आयुक्त के पास लिखित आवेदन देना होगा। जिला प्रभारी दो कार्य दिवसों में जांच कर मामला ई-ऑफिस से अतिरिक्त श्रम आयुक्त को भेजेंगे। सक्षम प्राधिकारी को पांच कार्य दिवसों में मंजूरी देनी होगी। इसके बाद आईटी शाखा तीन कार्य दिवसों में पोर्टल पर सुधार की सुविधा उपलब्ध कराएगी। अंतिम चरण में जिला प्रभारी दो कार्य दिवसों के भीतर स्वीकृत संशोधन दर्ज करेंगे। इस तरह पूरी प्रक्रिया के लिए चरणवार समय-सीमा तय की गई है।
लिपिकीय गलतियां सुधर सकेंगे : श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस सुविधा का इस्तेमाल केवल वास्तविक लिपिकीय, टाइपिंग या डेटा एंट्री की गलतियों को सुधारने के लिए किया जा सकेगा। आवेदक को पहले दर्ज जानकारी और प्रस्तावित संशोधन के समर्थन में दस्तावेजी प्रमाण देने होंगे। केवल गलती बताना पर्याप्त नहीं होगा, उसके सही होने का आधार भी प्रस्तुत करना पड़ेगा।
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कुछ मूल अनुबंध पहले के जैसे : नई एसओपी के तहत गलती सुधारने की आड़ में ठेकेदार, मुख्य नियोक्ता का नाम बदलने, नया अनुबंध जोड़ने या अनुबंध का मूल स्वरूप बदलने की अनुमति नहीं होगी। पोर्टल पर केवल उसी जानकारी में संशोधन किया जा सकेगा, जिसे सक्षम अधिकारी ने लिखित मंजूरी दी हो। इससे आवेदन सुधारने की प्रक्रिया में एकरूपता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।
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टाइपिंग और डेटा एंट्री की गलतियां सुधारने के लिए छह चरणों की प्रक्रिया
आदित्य पाण्डेय
नई दिल्ली।
ठेका श्रमिकों को अब लाइसेंस नवीनीकरण और नाम में संशोधन को लेकर सरकार की ओर से बड़ी राहत दी है। अब से लाइसेंस के आवेदन में टाइपिंग या डेटा एंट्री की गलती होने पर उसके सुधार के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। दिल्ली सरकार के श्रम विभाग ने ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर ठेका श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम, 1970 के तहत लाइसेंस नवीनीकरण और संशोधन के आवेदनों में वास्तविक गलतियां सुधारने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। इसके तहत आवेदन में दर्ज त्रुटियों को सुधारने की प्रक्रिया 14 कार्य दिवसों में पूरी करने का लक्ष्य तय किया गया है। इससे ठेकेदारों और संबंधित प्रतिष्ठानों को लाइसेंस संबंधी कामकाज में होने वाली अनावश्यक देरी से राहत मिल सकती है।
छह चरण में सुधार और समय तय : नई व्यवस्था के तहत आवेदक को गलती के प्रमाण के साथ संबंधित जिला प्रभारी, यानी संयुक्त या उप श्रम आयुक्त के पास लिखित आवेदन देना होगा। जिला प्रभारी दो कार्य दिवसों में जांच कर मामला ई-ऑफिस से अतिरिक्त श्रम आयुक्त को भेजेंगे। सक्षम प्राधिकारी को पांच कार्य दिवसों में मंजूरी देनी होगी। इसके बाद आईटी शाखा तीन कार्य दिवसों में पोर्टल पर सुधार की सुविधा उपलब्ध कराएगी। अंतिम चरण में जिला प्रभारी दो कार्य दिवसों के भीतर स्वीकृत संशोधन दर्ज करेंगे। इस तरह पूरी प्रक्रिया के लिए चरणवार समय-सीमा तय की गई है।
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लिपिकीय गलतियां सुधर सकेंगे : श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस सुविधा का इस्तेमाल केवल वास्तविक लिपिकीय, टाइपिंग या डेटा एंट्री की गलतियों को सुधारने के लिए किया जा सकेगा। आवेदक को पहले दर्ज जानकारी और प्रस्तावित संशोधन के समर्थन में दस्तावेजी प्रमाण देने होंगे। केवल गलती बताना पर्याप्त नहीं होगा, उसके सही होने का आधार भी प्रस्तुत करना पड़ेगा।
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कुछ मूल अनुबंध पहले के जैसे : नई एसओपी के तहत गलती सुधारने की आड़ में ठेकेदार, मुख्य नियोक्ता का नाम बदलने, नया अनुबंध जोड़ने या अनुबंध का मूल स्वरूप बदलने की अनुमति नहीं होगी। पोर्टल पर केवल उसी जानकारी में संशोधन किया जा सकेगा, जिसे सक्षम अधिकारी ने लिखित मंजूरी दी हो। इससे आवेदन सुधारने की प्रक्रिया में एकरूपता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।