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दावा: आयुर्वेद ने बढ़ाई दिल की कार्यक्षमता
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लखनऊ। आयुर्वेद न सिर्फ दिल का ध्यान रख सकता है, बल्कि उसकी कार्यक्षमता भी बढ़ा सकता है। यह दावा है राजकीय आयुर्वेद काॅलेज में गठिया शोध केंद्र के पूर्व निदेशक प्रो. संजीव रस्तोगी का। प्रो. रस्तोगी के मुताबिक, आयुर्वेद की दवाओं से दिल के कार्य करने की क्षमता में बढ़ोतरी का मामला सामने आया है।
प्रो. रस्तोगी ने बताया कि नई दिल्ली के रहने वाले 49 वर्षीय फिजियोथेरेपिस्ट पिछले साल 17 जनवरी को काम पर जाते हुए अचानक सड़क पर गिर गए थे। एम्स में जांच करने पर पता चला कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। उनके दिल से शरीर को पहुंचाए जाने वाले रक्त का प्रवाह मात्र 20 प्रतिशत रह गया था। रक्त का प्रवाह कम होने से वे दैनिक काम भी नहीं कर पा रहे थे। इलाज से ज्यादा राहत न मिलने पर उन्होंने आयुर्वेद का सहारा लिया।
उन्हें करवीर योग 250 मिलीग्राम दो बार, अर्जुनारिष्ट 10 मिलीलीटर दिन में दो बार पानी के साथ, प्रभाकर वटी एक-एक गोली दिन में दो बार पानी से, पुनर्नवा मंडूर 250 मिग्रा शहद के साथ दिन में दो बार और ओम का जाप तीन बार प्रातः और संध्या करने को कहा गया। एक महीने के इलाज के बाद उनकी इको कार्डियोग्राफी कराने पर दिल की कार्यक्षमता बढ़कर 40 फीसदी हो गई। इस साल जनवरी में जांच कराने पर दिल की कार्यक्षमता 50 फीसदी हो गई। अब वे सामान्य रूप से अपने सभी काम कर लेते हैं।
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उम्र के अनुसार 55 से 70 प्रतिशत होती है दिल की कार्यक्षमता
डाॅ. रस्तोगी ने बताया कि आयु के अनुरूप सामान्य व्यक्ति में इजेक्शन फ्रेक्शन (दिल के कार्य करने की क्षमता) 55 से 70 प्रतिशत तक होती है। इस मामले में कार्य क्षमता 50 फीसदी तक पहुंच गई, जो सामान्य के निकट है।
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अंतरराष्ट्रीय जर्नल में भेजा गया केस
डॉ. संजीव रस्तोगी ने बताया कि हृदय रोग में आयुर्वेद की संभावनाओं पर एक केस रिपोर्ट के रूप में प्रकाशन के लिए इसे अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल में भेजा गया है।
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प्रो. रस्तोगी ने बताया कि नई दिल्ली के रहने वाले 49 वर्षीय फिजियोथेरेपिस्ट पिछले साल 17 जनवरी को काम पर जाते हुए अचानक सड़क पर गिर गए थे। एम्स में जांच करने पर पता चला कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। उनके दिल से शरीर को पहुंचाए जाने वाले रक्त का प्रवाह मात्र 20 प्रतिशत रह गया था। रक्त का प्रवाह कम होने से वे दैनिक काम भी नहीं कर पा रहे थे। इलाज से ज्यादा राहत न मिलने पर उन्होंने आयुर्वेद का सहारा लिया।
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उन्हें करवीर योग 250 मिलीग्राम दो बार, अर्जुनारिष्ट 10 मिलीलीटर दिन में दो बार पानी के साथ, प्रभाकर वटी एक-एक गोली दिन में दो बार पानी से, पुनर्नवा मंडूर 250 मिग्रा शहद के साथ दिन में दो बार और ओम का जाप तीन बार प्रातः और संध्या करने को कहा गया। एक महीने के इलाज के बाद उनकी इको कार्डियोग्राफी कराने पर दिल की कार्यक्षमता बढ़कर 40 फीसदी हो गई। इस साल जनवरी में जांच कराने पर दिल की कार्यक्षमता 50 फीसदी हो गई। अब वे सामान्य रूप से अपने सभी काम कर लेते हैं।
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उम्र के अनुसार 55 से 70 प्रतिशत होती है दिल की कार्यक्षमता
डाॅ. रस्तोगी ने बताया कि आयु के अनुरूप सामान्य व्यक्ति में इजेक्शन फ्रेक्शन (दिल के कार्य करने की क्षमता) 55 से 70 प्रतिशत तक होती है। इस मामले में कार्य क्षमता 50 फीसदी तक पहुंच गई, जो सामान्य के निकट है।
अंतरराष्ट्रीय जर्नल में भेजा गया केस
डॉ. संजीव रस्तोगी ने बताया कि हृदय रोग में आयुर्वेद की संभावनाओं पर एक केस रिपोर्ट के रूप में प्रकाशन के लिए इसे अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल में भेजा गया है।