{"_id":"61b2274d7f02ba2a8e76d061","slug":"chithera-land-scam-adm-sought-details-related-to-land-from-sdm-in-a-week-grnoida-news-noi6204105183","type":"story","status":"publish","title_hn":"चिटहेरा भूमि घोटाला : एडीएम ने एसडीएम से एक सप्ताह में मांगा जमीन से जुड़ा ब्योरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चिटहेरा भूमि घोटाला : एडीएम ने एसडीएम से एक सप्ताह में मांगा जमीन से जुड़ा ब्योरा
विज्ञापन
ग्रेटर नोएडा। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) ने उपजिलाधिकारी दादरी से चिटहेरा भूमि घोटाले से जुड़ी जमीन का पूरा ब्योरा मांगा है। एसडीएम को एक सप्ताह में पूरी रिपोर्ट देनी होगी। वहीं, एडीएम के आदेश पर एसडीएम ने ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। घोटाले से जुड़ी जमीन करीब 1200 बीघा है, जो पट्टों के रूप में भूमिहीनों को दी गई थी। भूमाफिया ने चिटहेरा गांव में भूमिहीनों के पट्टों और सरकारी जमीन को अपने नाम करा लिया। इसमें से काफी जमीन का प्राधिकरण से मुआवजा उठा लिया है। साथ ही कॉलोनी काटी जा रही हैं। शिकायतकर्ता की शिकायत पर डीजीपी ने एसटीएफ को इसकी जांच सौंपी। साथ ही जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने एडीएम वित्त एवं राजस्व वंदिता श्रीवास्तव को इस घोटाले की जांच सौंपी है। एडीएम वंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि दादरी एसडीएम से गांव में पट्टों और अन्य सरकारी जमीन से जुड़ी जानकारी मांगी है। एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट देनी होगी। जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज को मंगवाया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब भी पट्टेदारों के नाम है काफी जमीन
प्रशासन की जांच में पता चला है कि अब भी काफी जमीन पट्टेदारों के नाम पर दर्ज है। राजस्व रिकॉर्ड में पट्टेदारों का नाम दर्ज हैं। हालांकि, काफी जमीन पर प्राधिकरण का नाम भी दर्ज है। वहीं, कई पट्टेदारों का केस हाईकोर्ट और मेरठ कमिश्नरी में भी लंबित है। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 1970 और 1997 में भूमिहीनों को पट्टे किए गए थे, जो करीब 1200 बीघा है। एसडीएम दादरी का कहना है कि जल्द ही रिकॉर्ड एडीएम को भेज दिया जाएगा।
चिटहेरा में घोटाले वाली जमीन पर प्लॉटिंग का काम रुकवाया
चिटहेरा गांव में घोटाले वाली जमीन पर प्लॉटिंग के मामले में राजस्व विभाग ने मौके पर जाकर काम रुकवा दिया है। साथ ही जांच पूरी होने तक इस तरह की कोई भी गतिविधि नहीं करने की हिदायत दी है। बता दें कि भूमाफिया जमीन पर कॉलोनी का नक्शा बनवाकर योजनाबद्ध ढंग से प्लॉटिंग कर रहे थे। बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने चिटहेरा में घोटाले से जुड़ी जमीन पर की जा रही प्लॉटिंग के मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। ग्रामीणों ने प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया था। खबर प्रकाशित होने के बाद लोगों ने इसे सोशल मीडिया पर साझा किया।
विज्ञापन
साथ ही प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की। मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। इसके बाद दादरी उपजिलाधिकारी आलोक गुप्ता राजस्व विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जहां समतलीकरण का काम चलता पाया गया। उन्होंने तत्काल कार्य रुकवा दिया है। साथ ही हिदायत दी कि जब तक जमीन घोटाले की जांच पूरी नहीं हो जाती है, तब तक न तो मिट्टी का भराव और न ही प्लॉटिंग की जाएगी। वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि पूरी रात डंपर आदि से मिट्टी का भराव कर भूमि को समतल किया जा रहा था। इसके लिए जिला प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई थी। वहीं, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी ने निर्माण आदि काम पर रोक लगा रखी है। इसके बाद भी काम जारी था। प्रशासन ने काम तो रुकवा दिया, लेकिन एनजीटी के आदेशों की अवहेलना करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
विज्ञापन
अब भी पट्टेदारों के नाम है काफी जमीन
प्रशासन की जांच में पता चला है कि अब भी काफी जमीन पट्टेदारों के नाम पर दर्ज है। राजस्व रिकॉर्ड में पट्टेदारों का नाम दर्ज हैं। हालांकि, काफी जमीन पर प्राधिकरण का नाम भी दर्ज है। वहीं, कई पट्टेदारों का केस हाईकोर्ट और मेरठ कमिश्नरी में भी लंबित है। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 1970 और 1997 में भूमिहीनों को पट्टे किए गए थे, जो करीब 1200 बीघा है। एसडीएम दादरी का कहना है कि जल्द ही रिकॉर्ड एडीएम को भेज दिया जाएगा।
विज्ञापन
चिटहेरा में घोटाले वाली जमीन पर प्लॉटिंग का काम रुकवाया
चिटहेरा गांव में घोटाले वाली जमीन पर प्लॉटिंग के मामले में राजस्व विभाग ने मौके पर जाकर काम रुकवा दिया है। साथ ही जांच पूरी होने तक इस तरह की कोई भी गतिविधि नहीं करने की हिदायत दी है। बता दें कि भूमाफिया जमीन पर कॉलोनी का नक्शा बनवाकर योजनाबद्ध ढंग से प्लॉटिंग कर रहे थे। बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने चिटहेरा में घोटाले से जुड़ी जमीन पर की जा रही प्लॉटिंग के मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। ग्रामीणों ने प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया था। खबर प्रकाशित होने के बाद लोगों ने इसे सोशल मीडिया पर साझा किया।
विज्ञापन
साथ ही प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की। मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। इसके बाद दादरी उपजिलाधिकारी आलोक गुप्ता राजस्व विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जहां समतलीकरण का काम चलता पाया गया। उन्होंने तत्काल कार्य रुकवा दिया है। साथ ही हिदायत दी कि जब तक जमीन घोटाले की जांच पूरी नहीं हो जाती है, तब तक न तो मिट्टी का भराव और न ही प्लॉटिंग की जाएगी। वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि पूरी रात डंपर आदि से मिट्टी का भराव कर भूमि को समतल किया जा रहा था। इसके लिए जिला प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई थी। वहीं, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी ने निर्माण आदि काम पर रोक लगा रखी है। इसके बाद भी काम जारी था। प्रशासन ने काम तो रुकवा दिया, लेकिन एनजीटी के आदेशों की अवहेलना करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की है।