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सावधान: बड़े ही नहीं, बच्चे भी डायबिटीज का हो रहे शिकार, ICU तक में हो रहे भर्ती; जानें कारण और बचाव का तरीका

Fri, 06 Dec 2024 06:23 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 06 Dec 2024 06:23 PM IST
सार

बड़ों में टाइप टू डायबिटीज होता है। बच्चों के मामलों में इंसुलिन की कमी होने लग जाती है। इंसुलिन बनाने वाला पैनक्रियाज इसे बनाना बंद कर देता है। इसके बहुत से कारण हो सकते हैं। 

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Children also becoming victims of diabetes even being admitted to ICU
बच्चे हो रहे डायबिटीज के शिकार - फोटो : adobe stock

विस्तार

मधुमेह का खतरा अब वयस्कों, प्रौढ़ और वृद्धों को ही नहीं बल्कि बच्चों पर भी मंडरा रहा है। कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान के बाल रोग विभाग में प्रत्येक महीने चार से पांच मामले ऐसे आ रहे हैं जिनमें मरीज बच्चों को सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) तक में भर्ती करना पड़ रहा है। डाक्टर कहते हैं कि इसके लिए बच्चों और परिवार में खानपान की आदत, जीवन शैली और कुछ  मामलों में आनुवांशिक कारण जिम्मेदार हैं। 

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जिम्स के बाल रोग विभाग के आईसीयू में इन दिनों एक 12 वर्ष का बच्चा भर्ती है। उसकी हालत मधुमेह के चलते बिगड़ गई थी। उपचार के बाद अब बच्चे की तबियत में सुधार है। संस्थान की बाल रोग विभाग की विभागध्यक्ष डॉ. अनीता कुमारी कहती हैं कि यह सिर्फ एक मामला नहीं है। बच्चों में मधुमेह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। प्रत्येक महीने चार से पांच मामले ऐसे आ रहे हैं जिनमें तबियत बिगड़ने पर बच्चे को भर्ती तक करना पड़ता है। जो बच्चा यहां आईसीयू में भर्ती है। उसका इलाज चल रहा है और पहले उसकी हालत में सुधार है। 

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बच्चों में मोटापा, जिससे भी पैदा होती समस्या
डॉ. अनीता कहती हैं कि बच्चों को आजकल आसानी से हाई कैलोरी, हाई फैट और प्रोसेस्ड खाना आसानी से उपलब्ध है। बच्चे इनको ज्यादा खाना पसंद कर रहे हैं। प्राकृतिक खाना कम पसंद करते हैं। साथ ही शारीरिक गतिविधि भी कम हो गई है जिससे जितना खाते हैं उतनी शुगर को कंज्यूम नहीं कर पाते हैं। जिससे मोटापा बढ़ता है और मधुमेह की समस्या भी। 

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बच्चों और बडों के मधुमेह में फर्क है
बड़ों में टाइप टू डायबिटीज होता है। बच्चों के मामलों में इंसुलिन की कमी होने लग जाती है। इंसुलिन बनाने वाला पैनक्रियाज इसे बनाना बंद कर देता है। इसके बहुत से कारण हो सकते हैं। इसी के चलते दोनों का उपचार भी अलग है। 

माता-पिता स्वीकारते नहीं बच्चे को मधुमेह है
जिम्स में बाल रोग विभाग में ऐसे भी मामले आए जिसमें माता-पिता स्वीकार ही नहीं कर पाए कि बच्चा मधुमेह से पीड़ित है। डॉ. अनीता कहती हैं कि कई मामलों में जब अभिभावकों को बताया गया तो उनका जवाब था कि यह कैसे हो सकता है। यह तो बड़ों की बीमारी है। स्वीकार्यता की कमी के चलते वह आयुर्वेदिक दवा या कुछ मामलों में झाड़फूंक वालों तक के पास चले जाते हैं। इससे स्थिति और बिगड़ जाती है। कुछ महीने बाद जब वह वापस आते हैं तो केस बिगड़ चुका होता है। 

बच्चों के मामलों में ध्यान रखें
- बच्चे सही समय पर खाना खाएं, नाश्ता करें
- शारीरिक गतिविधियां दिन चर्या में शामिल रहें
- पर्याप्त नींद के साथ ही जंक और प्रोसेस्ड फूड से बचें
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