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Noida News: यूपीआईटीएस 2025 चेतक डिवाइस टटोलेगी हृदय की नब्ज
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-100 ग्राम से भी कम वजन की डिवाइस से घर पर ही हो सकेगा ईसीजी
-मरीजों को कई लीड लगाने के झंझट से मिलेगी मुक्ति
-मात्र हाथ की दो उंगली पर लगाने से हो जाएगा ईसीजी
अंकुर त्रिपाठी
ग्रेटर नोएडा। दिल की बीमारियों की समय पर पहचान के लिए अब लोगों को बड़े अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मेरठ इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के बीटेक चौथे वर्ष के छात्र हर्ष चौहान और वंश तिवारी ने हृदय चेतक डिवाइस विकसित की है। जिसका प्रदर्शन बृहस्पतिवार को वह इंटरनेशनल ट्रेड शो में मुख्यमंत्री व अन्य अधिकारियों के सामने करेंगे।
उन्होंने बताया कि यह डिवाइस एक पॉकेट साइज़ वायरलेस ईसीजी मशीन है,जो किसी भी जगह और किसी भी समय दिल की धड़कन का सटीक विश्लेषण कर सकती है। यह डिवाइस मेडिकल-ग्रेड इलेक्ट्रोड्स से हार्ट सिग्नल कैप्चर करती है। इसके साथ ही एनालॉग फ्रंट एंड व माइक्रोकंट्रोलर के जरिए सटीक ईसीजी वेवफॉर्म तैयार करती है। डेटा को ब्लूटूथ और वाईफाई के माध्यम से मोबाइल एप और क्लाउड पर भेजा जाता है, जहां एआई एल्गोरिद्म हार्ट पैटर्न का विश्लेषण करके तुरंत अलर्ट देते हैं। उन्होंने बताया कि इस डिवाइस को विकसित करने में कई सालों का समय लगा है। उनका कहना है कि हर अस्पताल में मरीजों को ईसीजी की जांच कराने में काफी समय देना पड़ता है। कभी कभी उनकी जान भी चली जाती है। हर घर में बीपी,शुगर और फीवर नापने की मशीन तो होती है,लेकिन ईसीजी मशीन नहीं होने से अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस मशीन के आने से वह इन चक्करों से मुक्ति मिलेगी।
डिवाइस का वजन 100 ग्राम से भी कम
हर्ष चौहान ने बताया कि डिवाइस का वजन 100 ग्राम से भी कम है। इसमें 24 से 48 घंटे चलने वाली रिचार्जेबल बैटरी लगी है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसका किफायती और स्केलेबल डिज़ाइन, जिससे यह ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में भी उपलब्ध कराई जा सकती है। यह डिवाइस भारत में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को एक नई दिशा दे सकती है और लाखों लोगों की जान बचाने में मदद कर सकती है। एकेटीयू के जरिए इसका फिलहाल पेटेंट प्रोसेस में है। स्टार्टअप टीम इसका बड़े पैमाने पर निर्माण कर रही है।
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ईसीजी क्या करती है?
ईसीजी या इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम, हार्ट की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को सतह रूप से दिखाती है। इससे हार्ट, उसके चैम्बर के आकार और संभावित हार्ट अटैक को रिदम, कंडक्शन के माध्यम से समझने में मदद करती है।
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-मरीजों को कई लीड लगाने के झंझट से मिलेगी मुक्ति
-मात्र हाथ की दो उंगली पर लगाने से हो जाएगा ईसीजी
अंकुर त्रिपाठी
ग्रेटर नोएडा। दिल की बीमारियों की समय पर पहचान के लिए अब लोगों को बड़े अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मेरठ इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के बीटेक चौथे वर्ष के छात्र हर्ष चौहान और वंश तिवारी ने हृदय चेतक डिवाइस विकसित की है। जिसका प्रदर्शन बृहस्पतिवार को वह इंटरनेशनल ट्रेड शो में मुख्यमंत्री व अन्य अधिकारियों के सामने करेंगे।
उन्होंने बताया कि यह डिवाइस एक पॉकेट साइज़ वायरलेस ईसीजी मशीन है,जो किसी भी जगह और किसी भी समय दिल की धड़कन का सटीक विश्लेषण कर सकती है। यह डिवाइस मेडिकल-ग्रेड इलेक्ट्रोड्स से हार्ट सिग्नल कैप्चर करती है। इसके साथ ही एनालॉग फ्रंट एंड व माइक्रोकंट्रोलर के जरिए सटीक ईसीजी वेवफॉर्म तैयार करती है। डेटा को ब्लूटूथ और वाईफाई के माध्यम से मोबाइल एप और क्लाउड पर भेजा जाता है, जहां एआई एल्गोरिद्म हार्ट पैटर्न का विश्लेषण करके तुरंत अलर्ट देते हैं। उन्होंने बताया कि इस डिवाइस को विकसित करने में कई सालों का समय लगा है। उनका कहना है कि हर अस्पताल में मरीजों को ईसीजी की जांच कराने में काफी समय देना पड़ता है। कभी कभी उनकी जान भी चली जाती है। हर घर में बीपी,शुगर और फीवर नापने की मशीन तो होती है,लेकिन ईसीजी मशीन नहीं होने से अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस मशीन के आने से वह इन चक्करों से मुक्ति मिलेगी।
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डिवाइस का वजन 100 ग्राम से भी कम
हर्ष चौहान ने बताया कि डिवाइस का वजन 100 ग्राम से भी कम है। इसमें 24 से 48 घंटे चलने वाली रिचार्जेबल बैटरी लगी है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसका किफायती और स्केलेबल डिज़ाइन, जिससे यह ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में भी उपलब्ध कराई जा सकती है। यह डिवाइस भारत में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को एक नई दिशा दे सकती है और लाखों लोगों की जान बचाने में मदद कर सकती है। एकेटीयू के जरिए इसका फिलहाल पेटेंट प्रोसेस में है। स्टार्टअप टीम इसका बड़े पैमाने पर निर्माण कर रही है।
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ईसीजी क्या करती है?
ईसीजी या इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम, हार्ट की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को सतह रूप से दिखाती है। इससे हार्ट, उसके चैम्बर के आकार और संभावित हार्ट अटैक को रिदम, कंडक्शन के माध्यम से समझने में मदद करती है।