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Noida News: दुर्लभ रोग दिवस समय पर जांच कराएं, नन्हीं जान को दुर्लभ बीमारी से बचाएं
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संशोधित
दुर्लभ रोग दिवस
समय पर जांच करवाएं, नन्हीं जान को दुर्लभ बीमारी से बचाएं
- डॉक्टर का दावा, सेरीन मेटाबोलिक डिसऑर्डर बीमारी का भारत में पहला केस, बच्चे का पीजीआई में चल रहा इलाज
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। चाइल्ड पीजीआई में देश में दुलर्भ बीमारी से पीड़ित बच्चे का इलाज जारी है। देश में इस बीमारी का पहला मामला है। जिसमें इलाज करा रहा तीन साल का बच्चा बोल नहीं पा रहा। उसे बार-बार दौरे पड़ते हैं। वह अपनी उम्र के सामान्य बच्चों से काफी पीछे है। उसका इलाज कर रहे डॉक्टर का कहना है कि सेरीन मेटाबोलिक डिसऑर्डर की वजह से ऐसा हो रहा है। अब बच्चे की स्थित में सुधार है।
चाइल्ड पीजीआई में दुर्लभ रोगों से पीड़ित बच्चों का इलाज चल रहा है। पिछले एक साल के जेनेटिक विभाग में ऐसे करीब 1500 रोगियों को परामर्श दिया गया है। यहां पर दिल्ली एनसीआर के अलावा पश्चिम उत्तर प्रदेश से लोग बच्चों का इलाज कराने आते हैं। ऐसी बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष फरवरी के आखिरी दिन को दुर्लभ रोग दिवस के रूप में मनाया जाता है।
बदरपुर में रहने वाले बच्चे के पिता ने बताया कि बच्चे को दौरा पड़ता है। शुरुआत में लक्षणों के आधार पर परिजनों को लगा कि मिर्गी है। बच्चे को नोएडा के चाइल्ड पीजीआई लेकर आए। यहां पर मिर्गी का इलाज शुरू हुआ। दवा शुरू होने के कुछ समय तक तो बच्चा ठीक रहा, लेकिन फिर से दौरे पड़ने शुरू हो गए। संस्थान के डॉक्टर ने जेनेटिक विभाग के डॉ. मयंक निलय के पास रेफर किया। उन्होंने बच्चे की ग्रोथ को देखकर जेनेटिक टेस्ट कराया। तब जाकर बीमारी के बारे में पता चला। दवाइयों से बच्चा ठीक हो रहा है। डॉक्टर ने बताया कि अब तक इस बीमारी का कोई और बच्चा भारत में पंजीकृत नहीं है। अस्प्ताल के मेडिकल जेनेटिक्स कंसल्टेंट डॉ. मयंक निलय ने बताया कि सरीन मेटोबोलिक डिसऑर्डर जन्मजात होती है। यह अमीनो एसिड के बनने को प्रभावित करता है। इस वजह से अमीनो एसिड की कमी हो जाती है और यह मुख्य रूप से तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। इसके अलावा भी एक साल में अन्य दुलर्भ बीमारियों के 1500 रोगियों को परामर्श प्रदान किया गया है।
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अमेरिका के डॉक्टर भेज रहे प्रोजेरिया फ्री दवा
फिल्म पा में अमिताभ बच्चन एक ऐसे बच्चे के रोल में दिखें हैं जो बचपन में बुजुर्ग हो जाते हैं। इस बीमारी को प्रोजेरिया कहते हैं। चाइल्ड पीजीआई में इस बीमारी से पीड़ित तीन बच्चों का इलाज चल रहा है। इसमें से एक बच्चा नोएडा में रहता है। बच्चे की मां ने बताया कि कई जगह पर इलाज कराने के बाद ऑनलाइन अमेरिका के डॉक्टर से संपर्क किया गया। उन्होंने माता-पिता और बच्चे के ब्लड, बाल समेत कई चीजों के सैंपल मांगे थे। वहां पर जांच में प्रोजेरिया की पुष्टि हुई। डॉ. मयंक ने बताया कि अमेरिका से निशुल्क दवाइयां आ रही हैं। इस बीमारी के दो अन्य मामले और इलाज के लिए आए हैँ।
बच्चों को को बीमारी से बचाने के उपाय
- थैलेसीमिया, एसएमए, फ्रैजाइल एक्स और सामान्य आनुवंशिक विकारों के लिए दोनों को परीक्षण कराना चाहिए।
- अगर परिवार में कोई हिस्ट्री है इलाज के दौरान डॉक्टर को जरूर बताएं।
- प्रीनेटल टेस्ट कराएं।
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दुर्लभ रोग दिवस
समय पर जांच करवाएं, नन्हीं जान को दुर्लभ बीमारी से बचाएं
- डॉक्टर का दावा, सेरीन मेटाबोलिक डिसऑर्डर बीमारी का भारत में पहला केस, बच्चे का पीजीआई में चल रहा इलाज
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। चाइल्ड पीजीआई में देश में दुलर्भ बीमारी से पीड़ित बच्चे का इलाज जारी है। देश में इस बीमारी का पहला मामला है। जिसमें इलाज करा रहा तीन साल का बच्चा बोल नहीं पा रहा। उसे बार-बार दौरे पड़ते हैं। वह अपनी उम्र के सामान्य बच्चों से काफी पीछे है। उसका इलाज कर रहे डॉक्टर का कहना है कि सेरीन मेटाबोलिक डिसऑर्डर की वजह से ऐसा हो रहा है। अब बच्चे की स्थित में सुधार है।
चाइल्ड पीजीआई में दुर्लभ रोगों से पीड़ित बच्चों का इलाज चल रहा है। पिछले एक साल के जेनेटिक विभाग में ऐसे करीब 1500 रोगियों को परामर्श दिया गया है। यहां पर दिल्ली एनसीआर के अलावा पश्चिम उत्तर प्रदेश से लोग बच्चों का इलाज कराने आते हैं। ऐसी बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष फरवरी के आखिरी दिन को दुर्लभ रोग दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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बदरपुर में रहने वाले बच्चे के पिता ने बताया कि बच्चे को दौरा पड़ता है। शुरुआत में लक्षणों के आधार पर परिजनों को लगा कि मिर्गी है। बच्चे को नोएडा के चाइल्ड पीजीआई लेकर आए। यहां पर मिर्गी का इलाज शुरू हुआ। दवा शुरू होने के कुछ समय तक तो बच्चा ठीक रहा, लेकिन फिर से दौरे पड़ने शुरू हो गए। संस्थान के डॉक्टर ने जेनेटिक विभाग के डॉ. मयंक निलय के पास रेफर किया। उन्होंने बच्चे की ग्रोथ को देखकर जेनेटिक टेस्ट कराया। तब जाकर बीमारी के बारे में पता चला। दवाइयों से बच्चा ठीक हो रहा है। डॉक्टर ने बताया कि अब तक इस बीमारी का कोई और बच्चा भारत में पंजीकृत नहीं है। अस्प्ताल के मेडिकल जेनेटिक्स कंसल्टेंट डॉ. मयंक निलय ने बताया कि सरीन मेटोबोलिक डिसऑर्डर जन्मजात होती है। यह अमीनो एसिड के बनने को प्रभावित करता है। इस वजह से अमीनो एसिड की कमी हो जाती है और यह मुख्य रूप से तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। इसके अलावा भी एक साल में अन्य दुलर्भ बीमारियों के 1500 रोगियों को परामर्श प्रदान किया गया है।
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अमेरिका के डॉक्टर भेज रहे प्रोजेरिया फ्री दवा
फिल्म पा में अमिताभ बच्चन एक ऐसे बच्चे के रोल में दिखें हैं जो बचपन में बुजुर्ग हो जाते हैं। इस बीमारी को प्रोजेरिया कहते हैं। चाइल्ड पीजीआई में इस बीमारी से पीड़ित तीन बच्चों का इलाज चल रहा है। इसमें से एक बच्चा नोएडा में रहता है। बच्चे की मां ने बताया कि कई जगह पर इलाज कराने के बाद ऑनलाइन अमेरिका के डॉक्टर से संपर्क किया गया। उन्होंने माता-पिता और बच्चे के ब्लड, बाल समेत कई चीजों के सैंपल मांगे थे। वहां पर जांच में प्रोजेरिया की पुष्टि हुई। डॉ. मयंक ने बताया कि अमेरिका से निशुल्क दवाइयां आ रही हैं। इस बीमारी के दो अन्य मामले और इलाज के लिए आए हैँ।
बच्चों को को बीमारी से बचाने के उपाय
- थैलेसीमिया, एसएमए, फ्रैजाइल एक्स और सामान्य आनुवंशिक विकारों के लिए दोनों को परीक्षण कराना चाहिए।
- अगर परिवार में कोई हिस्ट्री है इलाज के दौरान डॉक्टर को जरूर बताएं।
- प्रीनेटल टेस्ट कराएं।