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Budaun News: पालिका के शेल्टर होम में अव्यवस्थाएं हावी, रैन बसेरों में लटके हुए हैं ताले
Tue, 18 Nov 2025 12:30 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 18 Nov 2025 12:30 AM IST
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रैन बसेरा
बदायूं। सर्दी के मौसम में प्राइवेट बस स्टैंड के पास बने पालिका के 50 बेड के शेल्टर होम में अव्यवस्थाएं हावी हैं। रेलवे स्टेशन से लेकर रोडवेज बस स्टैंड व जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के रैन बसेरों में ताले लटक रहे हैं। ऐसे में गरीबों के लिए सर्दी से बचाव के सभी इंतजाम कागजों में तो नजर आ रहे हैं, लेकिन हकीकत एकदम उलट है।
शेल्टर होम में बाहरी व गरीब लोगों के ठहरने के लिए व्यवस्था की गई है। यहां अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। दो मंजिला शेल्टर होम में पुरुषों के लिए ग्राउंड फ्लोर और महिलाओं के लिए दूसरी मंजिल पर बने कमरों में ठहरने की व्यवस्था है। महिला रूम के बराबर में फेमिली रूम भी है। आलम ये है कि पुरुषों के कमरों में पड़े बेड पर गंदी चादरें बिछी हुईं हैं। वहीं महिला रूम में सभी बेड पर चादर तक नहीं बिछी है। गद्दे भी फटे हुए हैं।
शौचालय गंदे पड़े हैं। बाथरूम में लगीं तीन वॉश बेसिन में से दो की टोटियां गायब हैं। यहां इक्का दुक्का लोग ही कभी कभार रुकते हैं। अधिकांश दिनों यहां डोर टू डोर कर्मचारी ही ठहरते हैं। शेल्टर होम की देखभाल कर रहे व्यक्ति ने बताया कि अभी कम लोग आ रहे हैं। व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराया जा रहा है। इसके लिए अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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रेलवे व बस स्टैंड का शुरू नहीं हुआ रैन बसेरा
रेलवे स्टेशन के बाहर मालगोदाम रोड पर अस्थायी रैन बसेरा अब तक शुरू नहीं हो सका है। वहीं रोडवेज स्टैंड पर बने रैन बसेरे में भी ताले लटक रहे हैं, जिससे रात के समय दूरदराज से आने वाले यात्रियों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। अधिकांश समय ये रैन बसेरा बंद ही रहते हैं। इन दिनों भी रैन बसेरा पर ताला लटका हुआ है, जिससे यात्री रात के समय भटकते रहते हैं या फिर उन्हें किराये पर होटल में ठहरना पड़ता है।
महिला अस्पताल के रैन बसेरे में मिला ताला, जमीन पर लेटे तीमारदार
महिला अस्पताल की पड़ताल रविवार रात करीब दस बजे की गई। सामने आया कि रैन बसेरे में बेड पड़े हैं। उन पर गद्दे भी बिछे हैं, लेकिन गेट पर ताला लगा था। प्रथम तल पर देखा तो तमाम तीमारदार जमीन पर बिस्तर लगाकर लेटे मिले। उनका कहना था कि उनको रैन बसेरे की जानकारी नहीं है।
जिला अस्पताल का रैन बसेरा भी मिला बंद
जिला अस्पताल की पड़ताल रविवार रात 10:30 बजे टीम ने की तो सामने आया कि रैन बसेरे में ताला लटक रहा है। न कोई कर्मचारी है और न ही कोई व्यवस्था है। सर्जिकल वार्ड में लोगों को कंबल तक नहीं मिले थे। कुछ लोग जमीन पर बिस्तर लगाकर आराम कर रहे थे। अगर रैन बसेरा के ताले खुले होते तो लोग उसमें रात काट सकते थे।
नहीं मिला कंबल
शाहजहांपुर जिले के कस्बा कलान निवासी वेदराम ने बताया कि उनकी बाइक को अन्य वाहन ने टक्कर मार दी, जिसमें उनकी पत्नी प्रीति व ताऊ घायल हो गए। पत्नी को सर्जिकल वार्ड में भर्ती कराया है। अस्पताल प्रशासन की ओर से कंबल नहीं मिला है। घर से कंबल मंगाना पड़ा है। ऐसे ही अन्य मरीजों के पास भी कंबल नहीं दिखे।
सुरक्षा के भी नहीं रहते पुख्ता इंतजाम
नगर पालिका के शेल्टर होम पर तो सुरक्षा गार्डों की तैनाती है, लेकिन अन्य रैन बसेरा के आसपास सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं रहते हैं। हालांकि यहां पर पुलिसकर्मी दिन व रात में गश्त करते हैं, लेकिन नियमित रूप में यहां किसी पुलिस कर्मी की तैनाती नहीं रहती है।
सर्दी के मद्देनजर कंबलों को खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कंबलों को जैम पोर्टल के माध्यम से खरीदा जाएगा। इस साल करीब पांच हजार कंबल की खरीद की जाएगी। जरूरत के अनुसार तहसीलाें में इनका वितरण करा दिया जाएगा। ठंड बढ़ने के साथ ही रैन बसेरा को भी शुरू कर दिया जाएगा। -डॉ. वैभव शर्मा, एडीएम
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शेल्टर होम में बाहरी व गरीब लोगों के ठहरने के लिए व्यवस्था की गई है। यहां अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। दो मंजिला शेल्टर होम में पुरुषों के लिए ग्राउंड फ्लोर और महिलाओं के लिए दूसरी मंजिल पर बने कमरों में ठहरने की व्यवस्था है। महिला रूम के बराबर में फेमिली रूम भी है। आलम ये है कि पुरुषों के कमरों में पड़े बेड पर गंदी चादरें बिछी हुईं हैं। वहीं महिला रूम में सभी बेड पर चादर तक नहीं बिछी है। गद्दे भी फटे हुए हैं।
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शौचालय गंदे पड़े हैं। बाथरूम में लगीं तीन वॉश बेसिन में से दो की टोटियां गायब हैं। यहां इक्का दुक्का लोग ही कभी कभार रुकते हैं। अधिकांश दिनों यहां डोर टू डोर कर्मचारी ही ठहरते हैं। शेल्टर होम की देखभाल कर रहे व्यक्ति ने बताया कि अभी कम लोग आ रहे हैं। व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराया जा रहा है। इसके लिए अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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रेलवे व बस स्टैंड का शुरू नहीं हुआ रैन बसेरा
रेलवे स्टेशन के बाहर मालगोदाम रोड पर अस्थायी रैन बसेरा अब तक शुरू नहीं हो सका है। वहीं रोडवेज स्टैंड पर बने रैन बसेरे में भी ताले लटक रहे हैं, जिससे रात के समय दूरदराज से आने वाले यात्रियों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। अधिकांश समय ये रैन बसेरा बंद ही रहते हैं। इन दिनों भी रैन बसेरा पर ताला लटका हुआ है, जिससे यात्री रात के समय भटकते रहते हैं या फिर उन्हें किराये पर होटल में ठहरना पड़ता है।
महिला अस्पताल के रैन बसेरे में मिला ताला, जमीन पर लेटे तीमारदार
महिला अस्पताल की पड़ताल रविवार रात करीब दस बजे की गई। सामने आया कि रैन बसेरे में बेड पड़े हैं। उन पर गद्दे भी बिछे हैं, लेकिन गेट पर ताला लगा था। प्रथम तल पर देखा तो तमाम तीमारदार जमीन पर बिस्तर लगाकर लेटे मिले। उनका कहना था कि उनको रैन बसेरे की जानकारी नहीं है।
जिला अस्पताल का रैन बसेरा भी मिला बंद
जिला अस्पताल की पड़ताल रविवार रात 10:30 बजे टीम ने की तो सामने आया कि रैन बसेरे में ताला लटक रहा है। न कोई कर्मचारी है और न ही कोई व्यवस्था है। सर्जिकल वार्ड में लोगों को कंबल तक नहीं मिले थे। कुछ लोग जमीन पर बिस्तर लगाकर आराम कर रहे थे। अगर रैन बसेरा के ताले खुले होते तो लोग उसमें रात काट सकते थे।
नहीं मिला कंबल
शाहजहांपुर जिले के कस्बा कलान निवासी वेदराम ने बताया कि उनकी बाइक को अन्य वाहन ने टक्कर मार दी, जिसमें उनकी पत्नी प्रीति व ताऊ घायल हो गए। पत्नी को सर्जिकल वार्ड में भर्ती कराया है। अस्पताल प्रशासन की ओर से कंबल नहीं मिला है। घर से कंबल मंगाना पड़ा है। ऐसे ही अन्य मरीजों के पास भी कंबल नहीं दिखे।
सुरक्षा के भी नहीं रहते पुख्ता इंतजाम
नगर पालिका के शेल्टर होम पर तो सुरक्षा गार्डों की तैनाती है, लेकिन अन्य रैन बसेरा के आसपास सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं रहते हैं। हालांकि यहां पर पुलिसकर्मी दिन व रात में गश्त करते हैं, लेकिन नियमित रूप में यहां किसी पुलिस कर्मी की तैनाती नहीं रहती है।
सर्दी के मद्देनजर कंबलों को खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कंबलों को जैम पोर्टल के माध्यम से खरीदा जाएगा। इस साल करीब पांच हजार कंबल की खरीद की जाएगी। जरूरत के अनुसार तहसीलाें में इनका वितरण करा दिया जाएगा। ठंड बढ़ने के साथ ही रैन बसेरा को भी शुरू कर दिया जाएगा। -डॉ. वैभव शर्मा, एडीएम