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खराब मानसिक स्थिति से जूझ रहे लोग: ऊपरी चक्कर समझ कराते रहे झाड़-फूंक, ‘दुआ से दवा तक’ ने दी नई जिंदगी

Wed, 31 May 2023 09:42 AM IST
विजय पुंडीर नेहा शर्मा, अमर उजाला, नोएडा
नेहा शर्मा, अमर उजाला, नोएडा Published by: विजय पुंडीर Updated Wed, 31 May 2023 09:42 AM IST
सार

‘दुआ से दवा तक’ मुहिम में 60 लोगों का इलाज किया गया है, इसमें से 10 मानसिक रोगियों की स्थिति इतनी खराब थी कि उनको हायर सेंटर रेफर करना पड़ा। मुहिम के तहत मंदिर, पीर, गुरुद्वारों में जाकर डॉक्टरों की टीम मानसिक रोगियों का इलाज करती है।

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Campaign dua se dawa tak giving new life to mental patients
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

नोएडा के सेक्टर-66 ममूरा में रहने वाली 20 वर्षीय शिखा थोड़ी-थोड़ी देर में चीखने लगती थी। घर तक का सामान बाहर फेंक दिया करती थी। हद तो तब हो गई, जब शिखा ने चाकू से खुद का हाथ काट लिया। 

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शुरुआत में परिजन ऊपरी चक्कर समझकर बाबाओं को दिखाते रहे। जब आराम नहीं मिला तो परिजन शिखा को झाड़ा लगवाने मंदिर पहुंचे। संयोग से उस दिन स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों का मंदिर पर ‘दुआ से दवा तक’ मुहिम चल रही थी। शिखा की हालत देखकर डॉक्टर ने परिजनों को इलाज कराने की सलाह दी। लेकिन शिखा के पिता पढ़े लिखे नहीं है, इसलिए वो शिखा को मानसिक रोगी मानने को तैयार नहीं हुए। मंदिर प्रबंधकों के समझाने के बाद परिजनों ने इलाज कराने की हामी भरी। अब शिखा के बर्ताव में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। शिखा जैसे तमाम परिवार मानसिक बीमारी को ऊपरी चक्कर समझकर झाड़-फूंक करवा रहे हैं। डॉक्टर की टीम ने दो महीने में ऐसे ही 60 मरीजों को नई जिंदगी दी है।
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10 मानसिक रोगियों को हायर सेंटर रेफर किया
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मानसिक रोगियों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके तहत दो महीने में 413 मानसिक रोगियों की पहचान कर इलाज किया जा रहा है। ‘दुआ से दवा तक’ मुहिम में 60 लोगों का इलाज किया गया है, इसमें से 10 मानसिक रोगियों की स्थिति इतनी खराब थी कि उनको हायर सेंटर रेफर करना पड़ा। मुहिम के तहत मंदिर, पीर, गुरुद्वारों में जाकर डॉक्टरों की टीम मानसिक रोगियों का इलाज करती है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के तहत 49 मानसिक रोगियों की पहचान की गई।

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खराब मानसिक स्थिति से जूझ रहे शेल्टर होम के बच्चे
शेल्टर होम में पांच बच्चे मानसिक रूप से बीमार मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से उनकी काउंसलिंग की गई है। वहीं, जेल में 35 मानसिक रोगी मिले हैं। जिला अस्पताल में इनका इलाज चल रहा है। इसके अलावा 14 स्कूलों में भी बच्चों की काउंसलिंग की गई। ताकि अगर कोई बच्चा तनाव में हो तो उसको दूर किया जा सके।

रिलेशनशिप बना रही डिप्रेशन का शिकार
मनोचिकित्सक डॉक्टर तनुजा गुप्ता ने बताया कि मानसिक रोगियों में 40 प्रतिशत मरीज सिर्फ डिप्रेशन के हैं। जब इन मरीजों की काउंसलिंग की जाती है तब पता चलता है कि रिलेशनशिप इसका सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा साइकोसिस बीमारी के भी मरीज बढ़े हैं। इसमें मरीज को भ्रम की स्थिति होती है। वो ऐसी स्थिति पर यकीन करते हैं जो वास्तविकता में होती ही नहीं है। उनको लगता है जैसे उनको तंग किया जा रहा है। अगर इलाज न कराएं तो बीमारी बढ़ती जाती है। उन्होंने बताया कि हिस्टीरिया के मानसिक रोगी भी बढ़े हैं। जब कोई व्यक्ति मेंटली या इमोशनली परेशान होता है, तो अपनी तरफ ध्यान आकर्षित करना चाहता है और असमान्य हरकतें करता है। अगर किसी को परिवार के सदस्य में कोई बदलाव दिख रहा है तो एक बार मनोचिकित्सक को जरूर दिखाना चाहिए।

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