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बिल्डर पद्मिनी इंफ्रास्ट्रक्चर पर 60 लाख का जुर्माना

Thu, 30 Sep 2021 10:27 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 30 Sep 2021 10:27 PM IST
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Builder Padmini Infrastructure fined 60 lakhs
सेक्टर-61 ‌स्थित इसी रॉयल गार्डन सोसाइटी को लेकर आया कोर्ट का फैसला ।
नई दिल्ली/नोएडा। सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डर पद्मिनी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स लिमिटेड को नोएडा के रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) से किए वादे के अनुसार सुविधाएं न देने पर 60 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। इसके अलावा दो सप्ताह में क्लब हाउस को खाली कराकर आरडब्ल्यूए को सौंपने के भी आदेश दिए गए।
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जस्टिस हेमंत गुप्ता और वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने बिल्डर को नोएडा सेक्टर-61 के रॉयल गार्डन आरडब्ल्यूए को वाटर सॉफ्टनिंग प्लांट, एक दूसरा हेल्थ क्लब, एक स्विमिंग पूल, क्लब हाउस और फायर फाइटिंग सिस्टम को चालू करने में विफल रहने का जिम्मेदार ठहराते हुए मुआवजा देने के लिए कहा है। बिल्डर ने नोएडा में 282 अपार्टमेंट के साथ हाउसिंग प्रोजेक्ट का निर्माण किया और उनकी बिक्री की। फ्लैट खरीदारों को वर्ष 1998-2001 के दौरान फ्लैटों पर कब्जा दिया गया। खरीदारों ने रॉयल गार्डन रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के नाम से सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत 2003 को पंजीकृत कराया।
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रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने नवंबर, 2003 को बिल्डर के साथ अपार्टमेंट परिसर का रखरखाव को लेकर एक करार किया, चूंकि बिल्डर ने सुविधाओं के वादों को पूरा नहीं किया इसलिए आरडब्ल्यूए ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) का दरवाजा खटखटाया। एनसीडीआरसी ने साइट का निरीक्षण करने और एक रिपोर्ट जमा करने के लिए एक स्थानीय आयुक्त के रूप में एक वास्तुकार को नियुक्त किया। आयुक्त की रिपोर्ट ने सुविधाओं के पूरा न होने के संबंध में आरडब्ल्यूए की शिकायतों का समर्थन किया।
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एनसीडीआरसी ने जनवरी 2010 में एक आदेश पारित किया जिसमें बिल्डर को आदेश की तारीख से 10 सप्ताह के भीतर विवादित सिस्टम और सुविधाओं को पूरा करने का निर्देश दिया गया और बिल्डर पर 25 हजार रुपये का जुर्माना किया। आयोग के आदेश से खफा एसोसिएशन ने सुप्रीम का रुख किया। वर्ष 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के आदेश पर रोक लगा दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया है।
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