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ईंट के भावों में उछाल

Wed, 01 Jan 2020 11:18 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jan 2020 11:18 PM IST
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Bricks price doubled in Nooh region
पुन्हाना। जिले में चालक का काम करने के बाद ईंट भट्ठों पर काम करने वाले लोगों की संख्या अधिक है। क्षेत्र में करीब 110 ईंट भट्ठे हैं जहां करीब 60 हजार मजदूर काम करते हैं। करीब दो महीने परले राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) द्वारा दिल्ली और एनसीआर में चलने वाले सभी ईंट भट्ठों, क्रेशर जोन और फैक्ट्रियों को प्रदूषण की वजह से बंद करने का आदेश दे दिया था।
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अब एनजीटी ने अपने आदेश को एक महीना और बढ़ा दिया है, जिसकी वजह से ईंट भट्टो पर काम करने वाले मजदूरों के लिए रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। वहीं चार हजार रुपये में एक हजार बिकने वाली ईंटों की कीमत सात से आठ हजार रुपये प्रति हजार हो गई है। जिसकी वजह से जरूरतमंदों को अपना आशियाना बनाना में मुश्किल हो रही है। अधिकतर भट्ठों पर ईंटे खत्म हो जाने और जिनके पास हैं उनके द्वारा अधिक कीमत पर ईंटेें बेची जा रही है। भट्ठों से जुडे़ मैसन, मजदूर और ईंटों की थपाई करने वाले मजबूरों को काम नहीं मिल रहा हैे।
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नगीना के गांव अटेरना शमशाबाद स्थित मुम्ताज ब्रिक्स कंपनी के मालिका मुमताज खान ने बताया कि उन्होंने करीब दो करोड़ रुपये की लागत से नया ईंट भट्ठा लगवाया है। दो महीने पहले इसे शुरू हो जाना चाहिए था लेकिन एनजीटी ने इनपर रोक लगा दी है। उनका कहना है कि मेवात जिले में करीब 110 ईंट भट्ठे हैं। उनका कहना है कि जब सरकार ने जिले के सभी भट्ठों को प्रदूषण रहित का सर्टिफिकेट दे रखा है तो फिर उनके भट्ठे क्यों बंद किए गए हैं ये उनकी समझ से परे हैं।
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गर्ग ब्रिक्स उद्योग लाहाबास के मालिक यादराम गर्ग का कहना है कि एनजीटी ने भट्टों को बंद कराए करीब दो महीना हो गया है। जिसकी वजह से ईंट थापने वाले मजदूरों को बैठाकर मजदूरी देनी पड़ रही है। जिसकी वजह से उनपर दोहरी मार पड़ रही है। उन्होंने जिला प्रशासन से सभी ईंट भट्टो को शुरू करने की मांग की है।

गांव गांव राजपुर निवासी निज्जर सरपंच का कहना है कि कुछ भट्ठों वालों के पास खराब और पुरानी ईंटें पड़ी हुई थी उनको ही महंगे दामों में बेचा जा रहा है। उनका आरोप है कि भट्ठे वाले ही इनको चलाना नहीं चाहाते जिससे उनकी पुरानी ईंटें महंगे दामों में बिक सके।
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