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गौतमबुद्ध नगर बार अध्यक्ष पर कार्रवाई: वकालत का लाइसेंस निरस्त, एलएलबी डिग्री को बताया अमान्य; क्या है मामला?

Tue, 06 Oct 2026 04:12 PM IST
Rahul Kumar Tiwari माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Tue, 06 Oct 2026 04:12 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अनुशासन समिति ने गौतमबुद्ध नगर बार एसोसिएशन अध्यक्ष अधिवक्ता मनोज कुमार भाटी का लाइसेंस निरस्त कर दिया। समिति ने वायुसेना में सेवा के दौरान हासिल एलएलबी डिग्री को अमान्य बताते हुए इसे अधिवक्ता अधिनियम के तहत कदाचार माना।
 

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Bar Association President Manoj Bhati license cancelled in fake LLB degree case
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी का लाइसेंस रद्द - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अनुशासन समिति ने जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन गौतमबुद्ध नगर के अध्यक्ष अधिवक्ता मनोज कुमार भाटी का वकालत का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। समिति ने अपने आदेश में कहा कि मनोज भाटी ने भारतीय वायुसेना में सेवारत रहते हुए विभाग की अनुमति और अनापत्ति प्रमाण पत्र के बिना शैक्षिक योग्यताएं हासिल कीं। समिति के अनुसार उनकी तीन वर्षीय एलएलबी डिग्री पूरी तरह अमान्य व अवैध है। आदेश की सत्यापित प्रति सचिव, यूपी बार काउंसिल के पत्र के साथ संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है। वहीं उपाध्यक्ष छत्रपाल सिंह को अग्रिम आदेश तक कार्यवाहक अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया।
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मामला वीरेंद्र सिंह की शिकायत पर दर्ज परिवाद से जुड़ा है। वीरेंद्र सिंह ने 22 फरवरी 2021 को शपथ पत्र सहित शिकायत दी थी। इसमें कहा गया कि मनोज कुमार भाटी 22 फरवरी 1991 से 30 अप्रैल 2009 तक वायुसेना में रहे। सेवा के दौरान उन्होंने बिना विभागीय अनुमति उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद से पत्राचार के जरिए स्नातक की डिग्री ली। इसी के आधार पर उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से संबद्ध जनहित कॉलेज ऑफ लॉ ग्रेटर नोएडा में 2004 में एलएलबी की तीन वर्षीय डिग्री में प्रवेश लिया। 
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भाटी का कॉलेज से करीब 2000 किलोमीटर दूर तैनात रहते हुए नियमित कक्षाओं में 76 प्रतिशत उपस्थिति दिखाकर 2007 में डिग्री पाना संभव नहीं था। मनोज भाटी ने 26 अप्रैल 2009 को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में पंजीकरण कराया। उनके शपथ पत्र पर 24 अप्रैल 2009 की तारीख है। जिसमें उन्होंने किसी नौकरी या व्यवसाय में न होने की घोषणा की थी, जबकि वे 30 अप्रैल 2009 तक वायुसेना में थे।

समिति ने नौ वाद बिंदु तय किए दोनों पक्षों को सुना। सभी बिंदु शिकायतकर्ता के पक्ष में निस्तारित हुए। समिति ने निष्कर्ष निकाला कि इन परिस्थितियों में हर सत्र में 76 प्रतिशत उपस्थिति किसी भी तरह संभव नहीं थी। वायुसेना की सेवा नियमावली में सेवारत एयरमैन और सार्जेंट के लिए नियमित रूप से कोई व्यावसायिक डिग्री लेने का प्रावधान नहीं है। आदेश के अनुसार कॉलेज की अटेंडेंस शीट से संकेत मिलता है कि मनोज भाटी की जगह किसी अन्य व्यक्ति को कक्षाओं में उपस्थित कराया गया।यह पूरी तरह सिद्ध है कि उनकी तीन वर्षीय एलएलबी डिग्री अमान्य और अवैध है। समिति ने इसे अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 35 के तहत कदाचार माना। समिति ने मनोज भाटी का लाइसेंस निरस्त करने का आदेश दिया। 
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वहीं भाटी ने अपने जवाब में आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि शिकायत अनुशासन समिति द्वारा संज्ञान के योग्य नहीं है और उनके खिलाफ कोई व्यावसायिक कदाचार का आरोप नहीं है। उनके अनुसार वायुसेना से विधिवत अनुमति लेकर 75 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई थी और डिस्चार्ज बुक में सेवा के दौरान बीए और एलएलबी हासिल करने का उल्लेख है। उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय की एक वर्षीय बैचलर डिग्री को यूजीसी नियमों के तहत वैध बताया।  इसी तरह का एक मामला 4 नवंबर 2016 को खारिज हो चुका है और शिकायतकर्ता पर 25 हजार रुपये की कॉस्ट लगी थी। उन्होंने शिकायत को द्वेषपूर्ण बताया।

उनके मुताबिक वे 2018 में जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद का चुनाव जीते थे, लेकिन विपिन भाटी और उनके साथियों ने मतपत्र फाड़े और लूटे। शिकायतकर्ता वीरेंद्र सिंह के बारे में उन्होंने कहा कि वे अपने को कांग्रेस का स्थानीय नेता मानते हैं और पार्टी से निष्कासित हैं। भाटी के अनुसार वे एक आपराधिक मामले में शिकायतकर्ता की अग्रिम जमानत का विरोध कर रहे अधिवक्ता थे, इसी रंजिश में यह शिकायत की गई। समिति ने आदेश में दर्ज किया कि उन्होंने अपने बचाव में कोई साक्ष्य नहीं दिया।

उपाध्यक्ष छत्रपाल सिंह बने कार्यवाहक अध्यक्ष
गौतमबुद्ध नगर जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन की छह अक्तूबर को हुई आपात बैठक में सर्वसम्मति से उपाध्यक्ष छत्रपाल सिंह एडवोकेट को अग्रिम आदेश तक कार्यवाहक अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक में कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्य करने का निर्णय लिया गया।
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