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बाइक बोट के अतिरिक्त निदेशक की 27 केस में जमानत खारिज
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बाइक बोट के अतिरिक्त निदेशक की 27 केस में जमानत खारिज
ग्रेटर नोएडा। बाइक बोट कंपनी के अतिरिक्त निदेशक पुष्पेंद्र सिंह की 27 केस में जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। विशेष न्यायाधीश वेद प्रकाश वर्मा की अदालत ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करते हुए जमानत याचिका पर फैसला सुनाया।
एडीजीसी धर्मेंद्र जयंत ने बताया कि गर्वित फाइनेंस प्रमोटर्स लिमिटेड के पदाधिकारियों के खिलाफ दादरी थाने में शोभा बंधु और उनके सहयोगियों ने शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ितों ने बताया कि बाइक बोट के नाम से प्रमोट कंपनी की एक स्कीम में 62100 रुपये प्रति बाइक के हिसाब से लगाने पर प्रति माह 9765 रुपये मिलने की बात कही गई है। एक वर्ष में लगाई गई रकम का लगभग दोगुना अन्य फायदा होने का दावा किया गया था। उनकी तरह सैकड़ों लोगों से इस स्कीम के नाम पर धोखाधड़ी की गई। वहीं आरोपी पक्ष की ओर से कहा गया कि वह निर्दोष है। वह 2017 में जाट रेजिमेंट से सेवानिवृत्त हुआ था। अभियुक्त 22 दिसंबर 2017 से एक फरवरी 2019 तक कंपनी में अतिरिक्त निदेशक के पद पर रहा। ज्यादातर पीड़ितों ने इससे पहले अपनी रकम कंपनी में लगाई थी। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपी ने कई पूर्व सैनिकों के पैसे भी इस फर्जी कंपनी में लगवाए। उसके एक खाते में 70 लाख रुपये मिले थे। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि हजारों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की गई।
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ग्रेटर नोएडा। बाइक बोट कंपनी के अतिरिक्त निदेशक पुष्पेंद्र सिंह की 27 केस में जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। विशेष न्यायाधीश वेद प्रकाश वर्मा की अदालत ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करते हुए जमानत याचिका पर फैसला सुनाया।
एडीजीसी धर्मेंद्र जयंत ने बताया कि गर्वित फाइनेंस प्रमोटर्स लिमिटेड के पदाधिकारियों के खिलाफ दादरी थाने में शोभा बंधु और उनके सहयोगियों ने शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ितों ने बताया कि बाइक बोट के नाम से प्रमोट कंपनी की एक स्कीम में 62100 रुपये प्रति बाइक के हिसाब से लगाने पर प्रति माह 9765 रुपये मिलने की बात कही गई है। एक वर्ष में लगाई गई रकम का लगभग दोगुना अन्य फायदा होने का दावा किया गया था। उनकी तरह सैकड़ों लोगों से इस स्कीम के नाम पर धोखाधड़ी की गई। वहीं आरोपी पक्ष की ओर से कहा गया कि वह निर्दोष है। वह 2017 में जाट रेजिमेंट से सेवानिवृत्त हुआ था। अभियुक्त 22 दिसंबर 2017 से एक फरवरी 2019 तक कंपनी में अतिरिक्त निदेशक के पद पर रहा। ज्यादातर पीड़ितों ने इससे पहले अपनी रकम कंपनी में लगाई थी। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपी ने कई पूर्व सैनिकों के पैसे भी इस फर्जी कंपनी में लगवाए। उसके एक खाते में 70 लाख रुपये मिले थे। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि हजारों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की गई।
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