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Noida News: बकायेदार बिल्डरों की श्रेणी बनाएगा प्राधिकरण
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जीरो पीरियड पॉलिसी में किस्तें जमा करने का समय हुआ पूरा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। फ्लैटों की रजिस्ट्री और फंसी ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के लिए अमिताभकांत समिति की सिफारिशों पर बनी जीरो पीरियड पॉलिसी में शुरुआती किस्तें जमा करने का समय शुक्रवार को खत्म हो गया। नोएडा प्राधिकरण के 48 बिल्डर इस पॉलिसी में शामिल हुए हैं।
इनमें से 35 बिल्डरों ने पूरा 25 प्रतिशत बकाया जमा किया है जबकि 13 बिल्डरों ने कुछ हिस्सा जमा किया है लेकिन इन 48 बिल्डरों में से अधिकतर ने समय पर किस्त देने का करार प्राधिकरण के साथ तोड़ दिया है। समय गुजरने के बाद प्राधिकरण अब पॉलिसी में दिए गए राहत पैकेज वापस लेगा। इसके लिए इन बिल्डरों की श्रेणी बनाई जाएगी। इसके बाद प्रस्ताव बोर्ड के बीच रखा जाएगा।
श्रेणी को लेकर प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि यह देखा जाएगा कि किस बिल्डर ने कितना बकाया जमा किया है। अगर समयावधि के अनुसार किसी बिल्डर ने बड़ी धनराशि जमा की है और एक या दो करोड़ रुपये ही शेष बचे हैं तो उसे सख्त कार्रवाई से दूर रखा जाएगा। वहीं, पॉलिसी में शामिल होने के बाद बिल्कुल बकाया न जमा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की योजना बनेगी। प्राधिकरण की एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने बताया कि 31 अक्तूबर तक का समय दिया गया था इसलिए वित्त विभाग से इन बिल्डरों का ब्योरा मांगा गया है। चार बिल्डरों ने आखिर में बकाया जमा करने की जानकारी दी है। प्राधिकरण की तरफ से छोड़े गए 1680 करोड़ रुपये के सापेक्ष बिल्डरों ने करीब 556 करोड़ 73 लाख रुपये बकाया पिछले महीने तक जमा करवाया है। 3724 फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री जमा हुए बकाया के बाद हुई हैं। अभी भी 15 हजार से ज्यादा फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री प्राधिकरण क्षेत्र में बिल्डर परियोजनाओं में फंसी हुई हैं।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। फ्लैटों की रजिस्ट्री और फंसी ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के लिए अमिताभकांत समिति की सिफारिशों पर बनी जीरो पीरियड पॉलिसी में शुरुआती किस्तें जमा करने का समय शुक्रवार को खत्म हो गया। नोएडा प्राधिकरण के 48 बिल्डर इस पॉलिसी में शामिल हुए हैं।
इनमें से 35 बिल्डरों ने पूरा 25 प्रतिशत बकाया जमा किया है जबकि 13 बिल्डरों ने कुछ हिस्सा जमा किया है लेकिन इन 48 बिल्डरों में से अधिकतर ने समय पर किस्त देने का करार प्राधिकरण के साथ तोड़ दिया है। समय गुजरने के बाद प्राधिकरण अब पॉलिसी में दिए गए राहत पैकेज वापस लेगा। इसके लिए इन बिल्डरों की श्रेणी बनाई जाएगी। इसके बाद प्रस्ताव बोर्ड के बीच रखा जाएगा।
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श्रेणी को लेकर प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि यह देखा जाएगा कि किस बिल्डर ने कितना बकाया जमा किया है। अगर समयावधि के अनुसार किसी बिल्डर ने बड़ी धनराशि जमा की है और एक या दो करोड़ रुपये ही शेष बचे हैं तो उसे सख्त कार्रवाई से दूर रखा जाएगा। वहीं, पॉलिसी में शामिल होने के बाद बिल्कुल बकाया न जमा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की योजना बनेगी। प्राधिकरण की एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने बताया कि 31 अक्तूबर तक का समय दिया गया था इसलिए वित्त विभाग से इन बिल्डरों का ब्योरा मांगा गया है। चार बिल्डरों ने आखिर में बकाया जमा करने की जानकारी दी है। प्राधिकरण की तरफ से छोड़े गए 1680 करोड़ रुपये के सापेक्ष बिल्डरों ने करीब 556 करोड़ 73 लाख रुपये बकाया पिछले महीने तक जमा करवाया है। 3724 फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री जमा हुए बकाया के बाद हुई हैं। अभी भी 15 हजार से ज्यादा फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री प्राधिकरण क्षेत्र में बिल्डर परियोजनाओं में फंसी हुई हैं।
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