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Noida News: कहीं रंगीन झालरें तो कहीं दीयों के लिए भी संघर्ष

Sat, 11 Nov 2023 01:25 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 11 Nov 2023 01:25 AM IST
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At some places there are colorful fringes and at some places there is a struggle even for lamps.
आलीशान मकानों की चकाचौंध से इतर रोशनी की तलाश में झुग्गियां
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परिवार के पालन पोषण के खातिर अपनों से दूर रह कर मनाते हैं त्योहार
रंजना शर्मा
नोएडा। आलीशान मकानों की चकाचौंध से इतर शहर की झुग्गियों को चंद दीयों की तलाश है। ताकि उनका आशियाना भी रोशन हो सके। दिवाली के बीच शहर में कुछ जगहों पर अंधेरे को देख यह सवाल सहज ही उठता है। दिवाली पर दीये बेचने वालों के घरों में न वह रोशनी नजर आती है, न रंगोली के रंग बेचने वालों के घरों में रंगीन सजावट। फूल बेचने वालों की दिनभर मेहनत के बाद मुरझाई हुई शक्ल भी दिवाली का कोई दूसरा चेहरा ही दर्शाती है।
दिवाली पर हम जलते हुए दीयों की रोशनी में कई बार उन्हें बनाने वालों की जिंदगी का अंधेरा भूल जाते हैं। अपने दो साल के बेटे को लेकर प्रवीणा कंचनजंगा पर बोरी बिछाकर रंगोली के रंग बेचती हैं। उनके साथ 15 साल की बेटी भी इस काम में उनका हाथ बंटाती है। यही इनके पेट भरने का जरिया है। प्रवीण बताती हैं कि बेटी के पैरों में दिक्कत है, ऐसे में उसे काम करता देख दिल दुखता है, लेकिन घर में कोई कमाने वाला नहीं है। दो साल के बेटे की देखरेख करने वाला कोई और नहीं है, इसलिए उसे सड़क पर अपने साथ लाना मजबूरी है। करवाचौथ के बाद से यहां सुबह 10 से रात 11:30 बजे तक रहती हूं। धनतेरस से दिवाली तक भी सारा परिवार दिनभर यहीं रहेगा। ताकि दिवाली की रात हमारे घर में भी दीये जल सकें।
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त्योहारों में याद आता है घर
बेटी काजल और बेटे मोहन के साथ सेक्टर-18 स्थित अट्टा बाजार में फूल बेचने वाली ब्रजेश कहती हैं कि, त्योहारों पर घर की बहुत याद आती है। मध्यप्रदेश के गुना में मेरा घर है। सोचती हूं परिवार और रिश्तेदारों के साथ वहां जाकर पहले जैसी दिवाली मनाऊं, लेकिन जिम्मेदारी की बेड़ियां जकड़े हुए हैं। बच्चों की स्कूल की फीस भी तो देनी है। दिवाली के समय ही आमदनी कुछ आमदनी होती है, ऐसे में घर चली गई तो क्या हाथ लगेगा। वहीं दीया बेचने वाले संतोष कहते हैं कि लोग बड़ी-बड़ी गाड़ियों से खरीदारी करने आते हैं, लेकिन मिट्टी के दीया लेते समय ऐसे मोलभाव करते हैं कि लागत निकालना मुश्किल हो जाता है।
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चिराग को पसंद है दिवाली
सेक्टर-62 में सड़क किनारे रंगोली के रंग बेचने वाले 10 साल के चिराग को रोशनी का त्योहार बहुत पसंद हैं। अन्य बच्चों की तरह मिठाई, गिफ्ट, कपड़े पाने का उसका भी बहुत मन है, लेकिन हालात को कुछ और ही मंजूर है। चिराग ने बताया कि उसके दो भाई और एक बहन है। इस समय माता पिता की मदद कर रहे हैं ताकि दिवाली ठीक से मना सकें।
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