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Noida News: पैसा वापसी के लिए एक हफ्ते में करें करार, चार महीने में बिल्डर देगा पैसे
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चिनटेल्स सोसाइटी के टावर डी, ई और एफ के निवासियों के साथ बैठक करते हुए उपायुक्त निशांत कुमार या
उपायुक्त की अध्यक्षता में चिनटेल्स पैराडाइसो के डेवलपर और टावर डी, ई व एफ के निवासियों की हुई बैठक
पैसा वापसी के साथ स्टांप शुल्क व इंटीरियर का खर्च भी मिलेगा, उपायुक्त ने डेवलपर को दिए भुगतान के निर्देश
ई और एफ टावर के इंटीरियर के मूल्यांकन करने की प्रक्रिया भी जल्द होगी शुरू, डीटीपी प्रवर्तन ने दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सेक्टर-109 स्थित चिनटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी में रहने के लिए असुरक्षित घोषित किए गए टावर डी, ई और एफ के संबंध में प्रशासन ने तय किया है कि अगर खरीदार पहले विकल्प का चयन करते हैं तो एक सप्ताह में उन्हें एग्रीमेंट करना होगा। 6500 रुपये स्क्वायर फीट की दर से फ्लैट मालिकों को भुगतान किया जाएगा। साथ में रजिस्ट्री और इंटीरियर का खर्च भी दिया जाएगा। पैसा वापसी के लिए चार महीने की समय सीमा तय की गई है, तब तक बिल्डर को दूसरी जगह रहने का किराया देते रहना होगा। दूसरे विकल्प के तहत बिल्डर द्वारा तीन साल की अवधि में नए फ्लैटों का निर्माण किया जाएगा, जिसमें निवासियों को प्रति वर्ग फीट का निर्धारित शुल्क देना होगा।
उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने बुधवार को लघु सचिवालय में हुई बैठक में निवासियों को बताया कि पहले हुई बैठकों में टावर डी, ई व एफ के निवासियों ने डेवलपर की ओर से समझौते के विकल्प तैयार करने की मांग रखी थी। इसके आधार पर डेवलपर ने समझौते के दो विकल्प तैयार किए हैं। उपायुक्त ने आश्वस्त किया कि वे इन दोनों विकल्पों में से किसी एक विकल्प का चुनने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं।
उपायुक्त ने कहा कि निवासियों की मांग पर जिला प्रशासन ने एक स्वतंत्र एजेंसी से टावर डी की इंटीरियर वैल्यूएशन रिपोर्ट तैयार करवाई है। इसी क्रम में अगले एक सप्ताह में टावर ई व एफ की भी इंटीरियर वैल्यूएशन रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उन्होंने डेवलपर को निर्देश दिए कि एजेंसी की जांच रिपोर्ट में इंटीरियर का जो भी वैल्यूएशन होगा, उसका भुगतान रेजीडेंट्स को किया जाएगा। डीसी ने डेवलपर को यह भी निर्देश दिए कि यदि कोई निवासी पहले विकल्प का चुनाव करता है तो डेवलपर को अगले चार महीने में पूरी राशि का भुगतान करना होगा। उन्होंने साफ किया कि जब तक डेवलपर पूरी राशि का भुगतान नहीं करता है, तब तक डेवलपर की ओर से विस्थापित निवासियों को जो किराये का भुगतान किया जा रहा है वह इसी प्रकार जारी रहेगा। उन्होंने डेवलपर से कहा कि वे अगले एक हफ्ते में समझौते का ड्राफ्ट तैयार कर उसे निवासियों की लीगल टीम के साथ साझा करे।
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बैठक में यह विषय भी आया कि डेवलपर द्वारा सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) द्वारा टावर डी, ई व एफ की ऑडिट रिपोर्ट तैयार करवाई जा रही है। इस पर उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने कहा कि डेवलपर अपने स्तर पर किसी भी प्रकार की ऑडिट कराने के लिए स्वतंत्र है। फिर भी यदि सीबीआरआई की रिपोर्ट आईआईटी की रिपोर्ट से भिन्न आती है तो जिला प्रशासन द्वारा तीसरी स्वतंत्र एजेंसी से इसकी ऑडिट रिपोर्ट तैयार करवाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई रेजीडेंट्स दूसरे विकल्प का चुनाव करते हैं तो निर्माण पूरा होने पर जिला प्रशासन द्वारा उन फ्लैट्स की स्ट्रक्चर ऑडिट रिपोर्ट कराकर ही रेजीडेंट्स को सौंपा जाएगी। बैठक में लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता प्रवीण चौधरी, डीटीपी (प्रवर्तन) मनीष यादव भी मौजूद थे।
आपदा प्रबंधन के तहत नोटिस जारी होगा
बैठक में कहा गया कि जिला प्रशासन की हिदायत के बावजूद टावर ई व एफ में अभी भी कुछ रेजीडेंट्स ने फ्लैट खाली नहीं किए हैं। इसको लेकर प्रशासन सख्त है। टावर ई और एफ को अधिकांश निवासी खाली कर चुके हैं। दोनों टावरों में करीब 20 फ्लैट मालिक ऐसे हैं जिन्होंने मकान खाली नहीं किया है। ऐसे फ्लैट मालिकों के लिए उपायुक्त ने कहा कि कि वे जल्द ही इस संबंध में आपदा प्रबंधन के तहत नोटिस जारी करेंगे। ई और एफ टावर के इंटीरियर का मूल्यांकन करने के लिए डीटीपी प्रवर्तन ने प्रक्रिया शुरू करने के लिए कह दिया है।
असमंजस में हैं तीनों टावरों के निवासी
प्रशासन के साथ बैठक के बाद तीनों टावरों के निवासी असमंजस की स्थिति में नजर आए। वह पूरी तरह न तो पहले विकल्प के साथ जा पा रहे हैं न पूरी तरह दूसरे विकल्प के साथ। सोसाइटी की सोनम कहती हैं कि विकल्प दो कोई बहुत अच्छा नहीं लग रहा है। फिर से निर्माण करके देने के लिए कोई समय सीमा नहीं रखी जा रही है। इसमें एक प्रावधान डाल दिया है कि सरकार से स्वीकृति के बाद। अब स्वीकृति कितने दिनों में होगी यह पता नहीं। दूसरा किराया देने से भी मना किया जा रहा है। यहां पर सरकार के हस्तक्षेप की जरूरत है। सोसाइटी के संदीप बरसैया कहते हैं कि दूसरे विकल्प में समस्या आ रही है। किराया देने से मना किया जा रहा है। निर्माण की अनापत्ति मिलने तक किराया भी दिया जाए। संदीप कहते हैं कि सोसाइटी में पहुंचकर सभी लोग विचार विमर्श करेंगे। इसके बाद ही कुछ तय हो पाएगा।
प्रशासन की ओर से औपचारिक आदेश आने का इंतजार है। इसके बाद विकल्पों के विषय में सोसाइटी के तीनों टावर के निवासियों के साथ बैठक में विचार विमर्श होगा। इसमें जो भी चिंताएं सामने आएंगी, उनको प्रशासन के सामने रखा जाएगा।
- राकेश हुड्डा, अध्यक्ष, आरडब्ल्यूए, चिनटेल्स
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पैसा वापसी के साथ स्टांप शुल्क व इंटीरियर का खर्च भी मिलेगा, उपायुक्त ने डेवलपर को दिए भुगतान के निर्देश
ई और एफ टावर के इंटीरियर के मूल्यांकन करने की प्रक्रिया भी जल्द होगी शुरू, डीटीपी प्रवर्तन ने दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सेक्टर-109 स्थित चिनटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी में रहने के लिए असुरक्षित घोषित किए गए टावर डी, ई और एफ के संबंध में प्रशासन ने तय किया है कि अगर खरीदार पहले विकल्प का चयन करते हैं तो एक सप्ताह में उन्हें एग्रीमेंट करना होगा। 6500 रुपये स्क्वायर फीट की दर से फ्लैट मालिकों को भुगतान किया जाएगा। साथ में रजिस्ट्री और इंटीरियर का खर्च भी दिया जाएगा। पैसा वापसी के लिए चार महीने की समय सीमा तय की गई है, तब तक बिल्डर को दूसरी जगह रहने का किराया देते रहना होगा। दूसरे विकल्प के तहत बिल्डर द्वारा तीन साल की अवधि में नए फ्लैटों का निर्माण किया जाएगा, जिसमें निवासियों को प्रति वर्ग फीट का निर्धारित शुल्क देना होगा।
उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने बुधवार को लघु सचिवालय में हुई बैठक में निवासियों को बताया कि पहले हुई बैठकों में टावर डी, ई व एफ के निवासियों ने डेवलपर की ओर से समझौते के विकल्प तैयार करने की मांग रखी थी। इसके आधार पर डेवलपर ने समझौते के दो विकल्प तैयार किए हैं। उपायुक्त ने आश्वस्त किया कि वे इन दोनों विकल्पों में से किसी एक विकल्प का चुनने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं।
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उपायुक्त ने कहा कि निवासियों की मांग पर जिला प्रशासन ने एक स्वतंत्र एजेंसी से टावर डी की इंटीरियर वैल्यूएशन रिपोर्ट तैयार करवाई है। इसी क्रम में अगले एक सप्ताह में टावर ई व एफ की भी इंटीरियर वैल्यूएशन रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उन्होंने डेवलपर को निर्देश दिए कि एजेंसी की जांच रिपोर्ट में इंटीरियर का जो भी वैल्यूएशन होगा, उसका भुगतान रेजीडेंट्स को किया जाएगा। डीसी ने डेवलपर को यह भी निर्देश दिए कि यदि कोई निवासी पहले विकल्प का चुनाव करता है तो डेवलपर को अगले चार महीने में पूरी राशि का भुगतान करना होगा। उन्होंने साफ किया कि जब तक डेवलपर पूरी राशि का भुगतान नहीं करता है, तब तक डेवलपर की ओर से विस्थापित निवासियों को जो किराये का भुगतान किया जा रहा है वह इसी प्रकार जारी रहेगा। उन्होंने डेवलपर से कहा कि वे अगले एक हफ्ते में समझौते का ड्राफ्ट तैयार कर उसे निवासियों की लीगल टीम के साथ साझा करे।
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बैठक में यह विषय भी आया कि डेवलपर द्वारा सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) द्वारा टावर डी, ई व एफ की ऑडिट रिपोर्ट तैयार करवाई जा रही है। इस पर उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने कहा कि डेवलपर अपने स्तर पर किसी भी प्रकार की ऑडिट कराने के लिए स्वतंत्र है। फिर भी यदि सीबीआरआई की रिपोर्ट आईआईटी की रिपोर्ट से भिन्न आती है तो जिला प्रशासन द्वारा तीसरी स्वतंत्र एजेंसी से इसकी ऑडिट रिपोर्ट तैयार करवाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई रेजीडेंट्स दूसरे विकल्प का चुनाव करते हैं तो निर्माण पूरा होने पर जिला प्रशासन द्वारा उन फ्लैट्स की स्ट्रक्चर ऑडिट रिपोर्ट कराकर ही रेजीडेंट्स को सौंपा जाएगी। बैठक में लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता प्रवीण चौधरी, डीटीपी (प्रवर्तन) मनीष यादव भी मौजूद थे।
आपदा प्रबंधन के तहत नोटिस जारी होगा
बैठक में कहा गया कि जिला प्रशासन की हिदायत के बावजूद टावर ई व एफ में अभी भी कुछ रेजीडेंट्स ने फ्लैट खाली नहीं किए हैं। इसको लेकर प्रशासन सख्त है। टावर ई और एफ को अधिकांश निवासी खाली कर चुके हैं। दोनों टावरों में करीब 20 फ्लैट मालिक ऐसे हैं जिन्होंने मकान खाली नहीं किया है। ऐसे फ्लैट मालिकों के लिए उपायुक्त ने कहा कि कि वे जल्द ही इस संबंध में आपदा प्रबंधन के तहत नोटिस जारी करेंगे। ई और एफ टावर के इंटीरियर का मूल्यांकन करने के लिए डीटीपी प्रवर्तन ने प्रक्रिया शुरू करने के लिए कह दिया है।
असमंजस में हैं तीनों टावरों के निवासी
प्रशासन के साथ बैठक के बाद तीनों टावरों के निवासी असमंजस की स्थिति में नजर आए। वह पूरी तरह न तो पहले विकल्प के साथ जा पा रहे हैं न पूरी तरह दूसरे विकल्प के साथ। सोसाइटी की सोनम कहती हैं कि विकल्प दो कोई बहुत अच्छा नहीं लग रहा है। फिर से निर्माण करके देने के लिए कोई समय सीमा नहीं रखी जा रही है। इसमें एक प्रावधान डाल दिया है कि सरकार से स्वीकृति के बाद। अब स्वीकृति कितने दिनों में होगी यह पता नहीं। दूसरा किराया देने से भी मना किया जा रहा है। यहां पर सरकार के हस्तक्षेप की जरूरत है। सोसाइटी के संदीप बरसैया कहते हैं कि दूसरे विकल्प में समस्या आ रही है। किराया देने से मना किया जा रहा है। निर्माण की अनापत्ति मिलने तक किराया भी दिया जाए। संदीप कहते हैं कि सोसाइटी में पहुंचकर सभी लोग विचार विमर्श करेंगे। इसके बाद ही कुछ तय हो पाएगा।
प्रशासन की ओर से औपचारिक आदेश आने का इंतजार है। इसके बाद विकल्पों के विषय में सोसाइटी के तीनों टावर के निवासियों के साथ बैठक में विचार विमर्श होगा। इसमें जो भी चिंताएं सामने आएंगी, उनको प्रशासन के सामने रखा जाएगा।
- राकेश हुड्डा, अध्यक्ष, आरडब्ल्यूए, चिनटेल्स