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Noida News: निवेश के नाम पर झांसा देकर सेवानिवृत इंजीनियर से 29 लाख की ठगी
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केस दर्ज, जालसाजों ने शुरू में मुनाफे के साथ रकम निकालने की दी थी अनुमति
माई सिटी रिपेार्टर
नोएडा। साइबर जालसाजों ने निवेश के नाम पर झांसा देकर सेवानिवृत्त इंजीनियर से 29 लाख रुपये ठग लिए। जालसाजों ने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर वारदात की। साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है।
सेक्टर-11 निवासी सेवानिवृत इंजीनियर ने बताया कि 18 सितंबर को उनसे मीना जोशी और आरव गुप्ता ने खुद को क्रेडिट सिक्योरिटीज का कर्मचारी बताकर बात की। इसके बाद दोनों पक्षों की व्हाट्सएप पर बात होने लगी। जालसाजों ने कहा कि अगर वह उनके बताए अनुसार, निवेश करेंगे तब बहुत फायदा होगा।
कई दिनों तक बातचीत करने के बाद जब इंजीनियर ने निवेश करने का विचार किया तो कथित स्टॉक ब्रोकर ने उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ लिया। उन्हें शेयर ट्रेडिंग का प्रशिक्षण मिलने लगा। ठगों ने उनसे एक एप भी डाउनलोड करवा दिया। जिसपर निवेश की रकम बढ़ती हुई दिख रही थी। इसके बाद पीड़ित मुनाफे के चक्कर में निवेश बढ़ाते गए।
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शुरुआत में उनको मुनाफे समेत रकम निकालने की अनुमति भी दी गई। इसके बाद इंजीनियर को यकीन हो गया कि उनका धन सही जगह पर निवेश कराया जा रहा है। उन्होंने 10 से अधिक बार में 29 लाख 19 हजार रुपये ठगों के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए।
जब पीड़ित ने रकम निकालने का प्रयास किया तब तो जालसाजों ने टैक्स के रूप में अतिरिक्त रकम जमा करने के लिए कहा। इनकार करने पर जालसाजों ने उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप से निकाल दिया। तब उन्हें ठगी की आशंका हुई। एडीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि इस मामले में मुकदमा पंजीकृत किया गया है और उन खातों की जांच की जा रही है। जिनमें रकम ट्रांसफर कराई गई है।
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माई सिटी रिपेार्टर
नोएडा। साइबर जालसाजों ने निवेश के नाम पर झांसा देकर सेवानिवृत्त इंजीनियर से 29 लाख रुपये ठग लिए। जालसाजों ने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर वारदात की। साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है।
सेक्टर-11 निवासी सेवानिवृत इंजीनियर ने बताया कि 18 सितंबर को उनसे मीना जोशी और आरव गुप्ता ने खुद को क्रेडिट सिक्योरिटीज का कर्मचारी बताकर बात की। इसके बाद दोनों पक्षों की व्हाट्सएप पर बात होने लगी। जालसाजों ने कहा कि अगर वह उनके बताए अनुसार, निवेश करेंगे तब बहुत फायदा होगा।
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कई दिनों तक बातचीत करने के बाद जब इंजीनियर ने निवेश करने का विचार किया तो कथित स्टॉक ब्रोकर ने उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ लिया। उन्हें शेयर ट्रेडिंग का प्रशिक्षण मिलने लगा। ठगों ने उनसे एक एप भी डाउनलोड करवा दिया। जिसपर निवेश की रकम बढ़ती हुई दिख रही थी। इसके बाद पीड़ित मुनाफे के चक्कर में निवेश बढ़ाते गए।
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शुरुआत में उनको मुनाफे समेत रकम निकालने की अनुमति भी दी गई। इसके बाद इंजीनियर को यकीन हो गया कि उनका धन सही जगह पर निवेश कराया जा रहा है। उन्होंने 10 से अधिक बार में 29 लाख 19 हजार रुपये ठगों के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए।
जब पीड़ित ने रकम निकालने का प्रयास किया तब तो जालसाजों ने टैक्स के रूप में अतिरिक्त रकम जमा करने के लिए कहा। इनकार करने पर जालसाजों ने उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप से निकाल दिया। तब उन्हें ठगी की आशंका हुई। एडीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि इस मामले में मुकदमा पंजीकृत किया गया है और उन खातों की जांच की जा रही है। जिनमें रकम ट्रांसफर कराई गई है।