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Noida News: प्रदेश के शो विंडो में बंदी की कगार पर पहुंची 50 हजार औद्योगिक इकाइयां

Sat, 21 Mar 2026 10:44 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 21 Mar 2026 10:44 PM IST
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50,000 industrial units in the state's show window are on the verge of closure.
- कच्चे माल से लेकर औद्योगिक डीजल के दाम बढ़ने का दिख रहा असर, गैस की किल्लत से हो रही परेशानी
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। गैस की किल्लत और औद्योगिक डीजल के दाम बढ़ने से प्रदेश के शो विंडो कहे जाने वाले नोएडा-ग्रेनो मेें करीब 50 हजार औद्योगिक इकाइयां बंदी के कगार पर पहुंच गईं हैं। उद्यमियों ने आशंका जताई है कि ईरान-इस्राइल व अमेरिका के बीच युद्ध कुछ और दिनों तक जारी रहा तो हालात काबू के बाहर जा सकते हैं।
युद्ध शुरू होने के बाद बदले हालात में उद्यमियों को डीजल के लिए अतिरिक्त मूल्य चुकाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर आईजीएल ने उद्यमियों को नोटिस भेजकर पीएनजी का वैकल्पिक साधन खोजने की अपील की है। इससे स्थिति और खराब हो गई है। इस बीच बढ़ती महंगाई के चलते श्रमिकों ने वेतन वृद्धि की मांग कर चिंता बढ़ा दी है। शनिवार को अमर उजाला संवाद में शामिल उद्यमियों ने बताया कि जिले में 2200 से ज्यादा प्लास्टिक विनिर्माण इकाइयां हैं। इसके अलावा होजरी व गारमेंट की 15 हजार से ज्यादा इकाइयां और ऑटोमोबाइल की लगभग 4 हजार इकाइयां हैं। इसके अलावा सिल्क, सिंथेटिक फाइबर, रबर समेत अन्य उत्पादन इकाईयां भी शामिल हैं। इनमें बनने वाले उत्पाद देश विदेशों में निर्यात किए जाते हैं। युद्ध के चलते कच्चे माल की उपलब्धता कम होती जा रही है।
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उद्यमी वीके सेठ के अनुसार, नोएडा एनसीआर की कंपनियों ने डीजल के विकल्प की जगह पीएनजी का उपयोग शुरू किया था। अब उद्यमियों को इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड की ओर से भेजे गए नोटिस में वैश्विक उथल पुथल के बीच वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा गया है। पीएनजी की सप्लाई कभी भी बाधित होने की आशंका से जूझ रहे उद्यमियों ने कहा कि सरकारी विभागों से भी उन्हें कोई राह भी नहीं बताई जा रही कि वह किस विकल्प को खोजें। दूसरी ओर शुक्रवार को बढ़े औद्योगिक डीजल के दाम बढ़ने से भी हजारों उद्योगों में उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका है।
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जिले में हर माह होती है 3000 मीट्रिक टन औद्योगिक डीजल की खपत
सरकारी आकड़ों के अनुसार जिले में उद्योग जगत में उत्पादन विनिर्माता कंपनियां हर माह औसतन 3000 मीट्रिक टन औद्योगिक डीजल की खपत होती है। इसके रेट बढ़ने से उत्पादन क्षमता में सीधा असर पड़ेगा और लागत क्षमता बढ़ेगी।

जिले के 2000 धातु कारोबारी चुका रहे दोगुना दाम
स्टील कारोबारी सतनारायण गोयल ने बताया कि जिले में करीब 2000 से ज्यादा धातु कारोबारी हैं। इनमें स्टील, लोहा, कॉपर, तांबा समेत अन्य धातुएं भी शामिल हैं। युद्ध शुरू होने के तीन दिन बाद से ही इनके दाम तीन गुना तक बढ़ गए। ऐसे में भवन निर्माण समेत तमाम निर्माण कार्यों की लागत भी बढ़ गई है।

महंगाई की मार झेल रहे श्रमिक कर रहे वेतन बढ़ाने की मांग
एनईए अध्यक्ष विपिन मल्हन ने बताया कि युद्ध के चलते एलपीजी गैस महंगी हुई। जिससे खाने पीने के पदार्थ भी महंगे हुए। होटल रेस्तरां समेत तमाम सेक्टर के दामों में उछाल आया है। अब उद्योगों में काम करने वाले लाखों श्रमिक वेतन बढ़ाने का दबाव बना रहे हैं साथ ही वह काम छोड़ने की भी चेतावनी दे रहे हैं।
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