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Noida News: 400 करोड़ सालाना खर्च, फिर भी स्वच्छ सर्वेक्षण की नेशनल रैंकिंग में पिछड़े

Sat, 13 Jan 2024 03:18 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jan 2024 03:18 AM IST
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400 crore annual expenditure, still lagging behind in the national ranking of Swachh Survekshan
-साफ-सफाई पर नोएडा करता है सालाना 400 करोड़ से अधिक का खर्च
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा को स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग में देश के पहले पायदान पर पहुंचाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया गया। हर साल करीब 400 करोड़ रुपए से अधिक साफ-सफाई में झोंक दिए गए। बावजूद इसके नोएडा नेशनल रैंकिंग में छह पायदान फिसल गया।
बीते दो वर्षों से 11वें स्थान पर अटके नोएडा को यह उम्मीद थी कि इस बार देश के 10 सबसे साफ सुथरे शहरों की कैटेगरी में पहुंच जाएगा। लेकिन रैंकिंग जारी होने के बाद निराशा हाथ लगी। नोएडा को देश भर में 17वीं रैंकिंग मिली थी। अपने आप को बेहतर बनाने के लिए नोएडा पूरे शहर की साफ-सफाई कराता है। नाले की सफाई कराता है। इसके अलावा घर-घर जाकर कूड़ा लेता है। सड़कों की मेकानिकल स्वीपिंग मशीन से सफाई कराता है।
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इसमें पूरे शहर में 1600 मजदूरों को लगाया गया था। जो हर रोज शहर की सफाई करते हैं। शहर को और बेहतर बनाने के लिए जमा हुए कूड़े का निस्तारण भी करता है। सड़कों पर पड़े अवशिष्ट को हटाकर निस्तारण कराता है। लेकिन सब ढाक के तीन पात साबित हुए। रैंकिंग की घोषणा के साथ ही मायूसी छा गई। हालांकि यूपी में पहले स्थान, फाइव स्टार दर्जा मिलने और दस लाख की कैटेगरी में दूसरे स्थान पर आने से थोड़ी लाज बची। लेकिन लक्ष्य पूरा नहीं हो सका।
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इंदौर का सामना करने के लिए प्राधिकरण की टीम ने वहां का दौरा किया। दूसरे अन्य शहरों का दौरा किया और अध्ययन किया। बाजी अपने नाम करने के लिए हर पैंतरे आजमाए। प्राधिकरण की टोली ने बेंगलुरू वृहद महानगरपालिका का भी दौरा किया। वहां के भी गुर सीखे। लेकिन यह सबकुछ काम नहीं आ पाया। देखने में आ रहा है कि जहां से सीखा जा रहा था, वहां की टीम ने इस बार कुछ नया करके दिखा दिया। यानी वह एक कदम आगे रही, जो कि नोएडा के हार का कारण बनी।

दूसरी ओर शहर में छोटी-छोटी बातों पर सफाईकर्मियों का हड़ताल करना, जन स्वास्थ्य विभाग के तीन अफसरों की एक साथ तबादले का आदेश, तत्कालीन सीईओ रितु माहेश्वरी के तबादले के बाद सफाई के काम में घोर लापरवाही करना प्राधिकरण के लक्ष्य में बाधक बन गया और प्राधिकरण को हार का सामना करना पड़ा।

मद और सालाना खर्च
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-साफ-सफाई-80 करोड़
-नाले की सफाई-10 करोड़
-डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन-40 करोड़
-मेकानिकल स्वीपिंग-24 करोड़
-कर्मचारियों को भुगतान-40 करोड़
-कूड़े का निस्तारण-30 करोड़
-प्लांट में ठोस कूड़े का निस्तारण-30 करोड़
-अन्य मदों में खर्च-करीब 150 करोड़
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