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Noida News: हिंडन नदी में कचरा गिरा रहीं 310 इंडस्ट्री
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- एनजीटी ने कहा, पर्यावरण को क्षति के लिए हर्जाना लगाए यूपीपीसीबी
- अधिकारी सुनिश्चित करें कि कोई भी नाला हिंडन नदी में नहीं गिरे
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। 310 इंडस्ट्री अपना औद्योगिक कचरा गिराकर हिंडन नदी को प्रदूषित कर रही हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिया है कि जो इंडस्ट्री हिंडन नदी को प्रदूषित होने से रोकने के लिए गंभीर नहीं है, उसके खिलाफ हर्जाना लगाने की कार्रवाई की जाए। वहीं, अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया है कि कोई भी नाला हिंडन नदी में नहीं गिरे।
एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव, सदस्य जस्टिस सुधीर अग्रवाल, डॉ. ए सेंथिल वेल ने अभिष्ट कुसुम गुप्ता की एक याचिका की सुनवाई पर यह आदेश दिया है। इस याचिका पर एक संयुक्त टीम से जांच करवाने के बाद रिपोर्ट एनजीटी ने मांगी थी। इस जांच रिपोर्ट में बताया गया कि 310 इंडस्ट्री हिंडन नदी को प्रदूषित करने का काम कर रही हैं। एनजीटी के आदेश पर यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरणीय क्षति के लिए हर्जाने का नोटिस भी इन इंडस्ट्री को जारी कर दिया है। यह हर्जाना इंडस्ट्री के कुल टर्नओवर का 10 फीसदी तक हो सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने नदी में कचरा गिरने से रोकने के लिए कोई कार्ययोजना एनजीटी से साझा नहीं की।
एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि यूपीपीसीबी के अधिकारी यह भी देखें कि ऐसी कौनसी इंडस्ट्री हैं जो नदी को प्रदूषित करने के लिए दोषी है। हर इंडस्ट्री के केस को सुनवाई का मौका देते हुए विधिक रूप से हर्जाना लगाने की कार्रवाई की जाए।
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- अधिकारी सुनिश्चित करें कि कोई भी नाला हिंडन नदी में नहीं गिरे
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। 310 इंडस्ट्री अपना औद्योगिक कचरा गिराकर हिंडन नदी को प्रदूषित कर रही हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिया है कि जो इंडस्ट्री हिंडन नदी को प्रदूषित होने से रोकने के लिए गंभीर नहीं है, उसके खिलाफ हर्जाना लगाने की कार्रवाई की जाए। वहीं, अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया है कि कोई भी नाला हिंडन नदी में नहीं गिरे।
एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव, सदस्य जस्टिस सुधीर अग्रवाल, डॉ. ए सेंथिल वेल ने अभिष्ट कुसुम गुप्ता की एक याचिका की सुनवाई पर यह आदेश दिया है। इस याचिका पर एक संयुक्त टीम से जांच करवाने के बाद रिपोर्ट एनजीटी ने मांगी थी। इस जांच रिपोर्ट में बताया गया कि 310 इंडस्ट्री हिंडन नदी को प्रदूषित करने का काम कर रही हैं। एनजीटी के आदेश पर यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरणीय क्षति के लिए हर्जाने का नोटिस भी इन इंडस्ट्री को जारी कर दिया है। यह हर्जाना इंडस्ट्री के कुल टर्नओवर का 10 फीसदी तक हो सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने नदी में कचरा गिरने से रोकने के लिए कोई कार्ययोजना एनजीटी से साझा नहीं की।
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एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि यूपीपीसीबी के अधिकारी यह भी देखें कि ऐसी कौनसी इंडस्ट्री हैं जो नदी को प्रदूषित करने के लिए दोषी है। हर इंडस्ट्री के केस को सुनवाई का मौका देते हुए विधिक रूप से हर्जाना लगाने की कार्रवाई की जाए।
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