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दोषी करार दिए बिना दंड स्वरूप तबादला किया जाना गलत : हाईकोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Updated Fri, 16 Nov 2018 08:23 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कर्मचारी को दोषी करार दिए बिना दंड स्वरूप तबादला अवैध है। कोर्ट ने जहरीली शराब से हुई मौत के मामले में कानपुर नगर और कानपुर देहात के नौ आबकारी निरीक्षकों के तबादले को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। जहरीली शराब पीने से नौ लोगों की मौत हुई थी, जिसके लिए इन निरीक्षकों को दोषी मानते हुए दंड स्वरूप तबादला किया गया था।
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कोर्ट ने कहा कि घटना में लापरवाही की जवाबदेही तय किये बगैर निरीक्षकों को दंड स्वरूप स्थानांतरित कर दिया गया। ऐसे तबादले को जनहित या प्रशासनिक नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जांच रिपोर्ट में जिन्हें दोषी माना गया है, उसमें याचीगण शामिल नहीं हैं तो इनका तबादला नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने चार सितंबर 18 और छह सितंबर 18 के तबादला आदेशों को विधिविरुद्ध व अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति बी अमित स्थालकर तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने आनंद कुमार पाठक और अन्य की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिया है। याची अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि कानपुर नगर के सेक्टर सात और कानपुर देहात के सर्किल तीन में माधुरी ब्रांड की जहरीली शराब पीने से दर्जनों लोग बीमार हो गए थे, इसमें से नौ की मौत हो गई।
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आबकारी विभाग की टीम ने जांच की और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट शासन को भेजी थी। मरने वाले सचेंडी के दूल, हेतपुर, भूल और सुरार गांव के लोग थे।
एक विधायक के रिश्तेदार रूरा के विनय सिंह ने उन्नाव डिस्टिलरी के पास बनी अवैध शराब की आपूर्ति की थी। सेक्टर सात के आबकारी निरीक्षकों पर कार्रवाई की गई। किंतु अन्य जगहों पर तैनात याचियों का भी तबादला कर दिया गया। जबकि इन्हें जांच में दोषी नहीं पाया गया था, इसलिए कोर्ट ने तबादले को दंडात्मक मानते रद्द कर दिया है।