{"_id":"5c0d4c41bdec2241427bc2cd","slug":"15443754017-ashram-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट ने कार में काली फिल्म के इस्तेमाल पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट ने कार में काली फिल्म के इस्तेमाल पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब
Updated Sun, 09 Dec 2018 10:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने कार में काली फिल्म के
इस्तेमाल पर केंद्र से मांगा जवाब
- याचिका दायर कर दुर्लभ बीमारी से पीड़ित शख्स ने मांगी है अनुमति
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। क्या त्वचा की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित शख्स को कार में काली फिल्म लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह सवाल हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जेरोडर्मा पिगमेनटोसम बीमारी से पीड़ित शख्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा है। इस शख्स ने अपनी बीमारी का हवाला देते हुए कार में काली फिल्म लगाने की अनुमति मांगी है। इस बीमारी के कारण अल्ट्रा वायलेट किरणों से त्वचा को भारी नुकसान होता है।
न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट व न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की खंडपीठ ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या याची को यह अनुमति प्रदान नहीं की जा सकती। दूसरी ओर केंद्र के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट पहले खारिज कर चुकी है। केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता फरमान अली ने कहा कि काली फिल्म के अलावा भी सन स्क्रीन, सुरक्षात्मक वस्त्र जैसे कई विकल्प याची विपुल गंभीर के पास उपलब्ध हैं। याची का कहना है कि इस बीमारी के कारण डॉक्टरों ने उसे सूर्य की किरणों को नियंत्रित करने वाली काली फिल्म के इस्तेमाल की सलाह दी है। अल्ट्रा वायलट किरणों के कारण उसे काफी दिक्कत होती है।
राजधानी में अपराध की बढ़ती वारदात के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2012 में एक सीमा से अधिक काली फिल्म के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। कोर्ट ने इसे सख्ती से लागू करने का निर्देश केंद्र व राज्य सरकारों को दिया था। इस फैसले में आगे पीछे के शीशों को न्यूनतम 70 फीसदी पारदर्शी तथा साइड के शीशों को न्यूनतम 40 फीसदी पारदर्शी रखने के लिए कहा गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस्तेमाल पर केंद्र से मांगा जवाब
- याचिका दायर कर दुर्लभ बीमारी से पीड़ित शख्स ने मांगी है अनुमति
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। क्या त्वचा की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित शख्स को कार में काली फिल्म लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह सवाल हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जेरोडर्मा पिगमेनटोसम बीमारी से पीड़ित शख्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा है। इस शख्स ने अपनी बीमारी का हवाला देते हुए कार में काली फिल्म लगाने की अनुमति मांगी है। इस बीमारी के कारण अल्ट्रा वायलेट किरणों से त्वचा को भारी नुकसान होता है।
न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट व न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की खंडपीठ ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या याची को यह अनुमति प्रदान नहीं की जा सकती। दूसरी ओर केंद्र के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट पहले खारिज कर चुकी है। केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता फरमान अली ने कहा कि काली फिल्म के अलावा भी सन स्क्रीन, सुरक्षात्मक वस्त्र जैसे कई विकल्प याची विपुल गंभीर के पास उपलब्ध हैं। याची का कहना है कि इस बीमारी के कारण डॉक्टरों ने उसे सूर्य की किरणों को नियंत्रित करने वाली काली फिल्म के इस्तेमाल की सलाह दी है। अल्ट्रा वायलट किरणों के कारण उसे काफी दिक्कत होती है।
विज्ञापन
राजधानी में अपराध की बढ़ती वारदात के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2012 में एक सीमा से अधिक काली फिल्म के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। कोर्ट ने इसे सख्ती से लागू करने का निर्देश केंद्र व राज्य सरकारों को दिया था। इस फैसले में आगे पीछे के शीशों को न्यूनतम 70 फीसदी पारदर्शी तथा साइड के शीशों को न्यूनतम 40 फीसदी पारदर्शी रखने के लिए कहा गया था।
विज्ञापन