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दिल्ली में मोमबती जलाकर अवनी की मौत पर मांगा इंसाफ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 12 Nov 2018 05:17 AM IST
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अवनी के लिए निकाला कैंडिल मार्च
- फोटो : अमर उजाला
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नई दिल्ली। देश में बाघों की घटती संख्या के बीच अवनी (बाघिन) की मौत पर वन्य जीव प्रेमियों ने दिल्ली में कैंडल मार्च निकालकर विरोध जताया। साथ ही महाराष्ट्र सरकार के वन मंत्री को पद से हटाने और बाघिन के दोनों बच्चों की जिम्मेदारी किसी निजी संस्था को सौंपने की मांग की। यह रैली जंतर-मंतर पर ग्लोबल मार्च फॉर अवनी के नाम से निकाली गई। इस रैली में करीब 40 से अधिक संस्थाओं ने हिस्सा लिया।
प्रो. अमिता सिंह ने बताया कि दिल्ली में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचाता है तो हम पर्यावरण बचाने के लिए वनों को संरक्षण देने की बात करते हैं। जबकि हकीकत यह है कि इंसान अपने स्वार्थ के लिए जंगलों को खत्म कर रहा है।
ऐसे में जंगली जानवर कहां जाएंगे? महाराष्ट्र में जंगलों को खत्म किया जा रहा है, उसी के चलते अवनी अपने दो बच्चों के लिए इंसानों के बीच में पहुंच गई थी। वन्य जीव प्रेमियों का कहना था कि अवनी को मारने के दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।
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वनमंत्री ने वाइल्डलाइफ एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है। अवनी को मारने के लिए किराए पर उपलब्ध शिकारी अजगर अली और शौकत अली के पास बाघिन की हत्या का कोई लिखित आदेश नहीं था। अवनी को जिस समय मारा गया, वह अपने दोनों बच्चों को दूध पिला रही थी। जबकि दस दिनों से वह भूखी थी। बाघिन को मारने के दौरान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर केनियमों का भी उल्लंघन किया गया है। ऐसे में वन मंत्री के खिलाफ सीआरपीसी के तहत कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
अभिताभ की चुप्पी से आहत
प्रो. सिंह के मुताबिक, बाघ बचाओ मुहिम के अभिताभ बच्चन ब्रांड एंबेसडर हैं। जबकि अवनी की मौत पर उनकी चुप्पी वन्य जीव प्रेमियों को आहत कर रही है। जिस अभिनेता को बाघों को बचाने के लिए प्रयासरत होना चाहिए, उन्होंने एक शब्द विरोध नहीं जताया।
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प्रो. अमिता सिंह ने बताया कि दिल्ली में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचाता है तो हम पर्यावरण बचाने के लिए वनों को संरक्षण देने की बात करते हैं। जबकि हकीकत यह है कि इंसान अपने स्वार्थ के लिए जंगलों को खत्म कर रहा है।
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ऐसे में जंगली जानवर कहां जाएंगे? महाराष्ट्र में जंगलों को खत्म किया जा रहा है, उसी के चलते अवनी अपने दो बच्चों के लिए इंसानों के बीच में पहुंच गई थी। वन्य जीव प्रेमियों का कहना था कि अवनी को मारने के दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।
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वनमंत्री ने वाइल्डलाइफ एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है। अवनी को मारने के लिए किराए पर उपलब्ध शिकारी अजगर अली और शौकत अली के पास बाघिन की हत्या का कोई लिखित आदेश नहीं था। अवनी को जिस समय मारा गया, वह अपने दोनों बच्चों को दूध पिला रही थी। जबकि दस दिनों से वह भूखी थी। बाघिन को मारने के दौरान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर केनियमों का भी उल्लंघन किया गया है। ऐसे में वन मंत्री के खिलाफ सीआरपीसी के तहत कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
अभिताभ की चुप्पी से आहत
प्रो. सिंह के मुताबिक, बाघ बचाओ मुहिम के अभिताभ बच्चन ब्रांड एंबेसडर हैं। जबकि अवनी की मौत पर उनकी चुप्पी वन्य जीव प्रेमियों को आहत कर रही है। जिस अभिनेता को बाघों को बचाने के लिए प्रयासरत होना चाहिए, उन्होंने एक शब्द विरोध नहीं जताया।