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डीयू में आइसा का जनमत सर्वेक्षण
Updated Tue, 21 Aug 2018 09:16 PM IST
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डीयू में आइसा का जनमत सर्वेक्षण
- 83 फीसदी छात्रों से मोदी सरकार के कामकाज के प्रति असंतोष
- आइसा का दावा, जनमत सर्वेक्षण में 21 हजार से भी अधिक डीयू के छात्रों ने हिस्सा लिया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में डूसू चुनाव का बिगुल बजते ही छात्र संगठन सक्रिय हो गए हैैं। चुनाव से पहले छात्र संगठन आइसा ने तो मोदी सरकार के कामकाज को लेकर छात्रों के बीच एक जनमत सर्वेक्षण किया है। आइसा का दावा है कि 83 फीसदी छात्रों ने मोदी सरकार के चार साल को खारिज किया है। इससे पहले आइसा ने कैंपस मेें एक रैली भी निकाली। आइसा के अनुसार रिपोर्ट कार्ड, मोदी सरकार के चार साल पर एक जनमत सर्वेक्षण किया हैं। जनमत सर्वेक्षण में 21 हजार से भी अधिक डीयू के छात्रों ने हिस्सा लिया, जिसमें 83 प्रतिशत से भी अधिक छात्रों ने मोदी सरकार द्वारा डीयू के संदर्भ में किए गए कामकाज के प्रति असंतोष व्यक्त किया। सर्वेक्षण में मोदी सरकार द्वारा रोजगार व उच्च शिक्षा विरोधी नीतियों और कॉलेज में जेंडर सेल, प्लेसमेंट सेल, आवास, बुनियादी ढांचे, कैंपस हिंसा व अकादमिक स्वतंत्रता और सामाजिक भेदभाव से जुड़े सवाल शामिल था, जिसमें छात्र ने अपना राय दिया और उसके आधार पर आकलन करने की कोशिश की गई।
यह अभियान दिल्ली विश्वविद्यालय के 30 कॉलेजों में चलाया गया। आइसा ने कहा कि भाजपा सरकार और उसके छात्र संघ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का कामकाज छात्र विरोधी है। जनमत सर्वेक्षण में नौकरियां और प्लेसमेंट के सवाल पर केवल 15 फीसदी छात्र संतुष्ट थे। आवास के मुद्दे पर केवल 16 फीसदी, परिवहन के मुद्दे पर केवल 13 फीसदी, यौन हिंसा के सवाल पर केवल 17 फीसदी छात्रों ने कहा कि वे मोदी सरकार से संतुष्ट है। बुनियादी ढांचे में सुधार के सवाल पर 20 फीसदी छात्रों ने संतुष्टि जताई। आइसा डीयू प्रेजिडेंट कवलप्रीत कौर ने कहा कि यह सरकार छात्रों के सवाल पर विफल साबित हो रही है।
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- 83 फीसदी छात्रों से मोदी सरकार के कामकाज के प्रति असंतोष
- आइसा का दावा, जनमत सर्वेक्षण में 21 हजार से भी अधिक डीयू के छात्रों ने हिस्सा लिया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में डूसू चुनाव का बिगुल बजते ही छात्र संगठन सक्रिय हो गए हैैं। चुनाव से पहले छात्र संगठन आइसा ने तो मोदी सरकार के कामकाज को लेकर छात्रों के बीच एक जनमत सर्वेक्षण किया है। आइसा का दावा है कि 83 फीसदी छात्रों ने मोदी सरकार के चार साल को खारिज किया है। इससे पहले आइसा ने कैंपस मेें एक रैली भी निकाली। आइसा के अनुसार रिपोर्ट कार्ड, मोदी सरकार के चार साल पर एक जनमत सर्वेक्षण किया हैं। जनमत सर्वेक्षण में 21 हजार से भी अधिक डीयू के छात्रों ने हिस्सा लिया, जिसमें 83 प्रतिशत से भी अधिक छात्रों ने मोदी सरकार द्वारा डीयू के संदर्भ में किए गए कामकाज के प्रति असंतोष व्यक्त किया। सर्वेक्षण में मोदी सरकार द्वारा रोजगार व उच्च शिक्षा विरोधी नीतियों और कॉलेज में जेंडर सेल, प्लेसमेंट सेल, आवास, बुनियादी ढांचे, कैंपस हिंसा व अकादमिक स्वतंत्रता और सामाजिक भेदभाव से जुड़े सवाल शामिल था, जिसमें छात्र ने अपना राय दिया और उसके आधार पर आकलन करने की कोशिश की गई।
यह अभियान दिल्ली विश्वविद्यालय के 30 कॉलेजों में चलाया गया। आइसा ने कहा कि भाजपा सरकार और उसके छात्र संघ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का कामकाज छात्र विरोधी है। जनमत सर्वेक्षण में नौकरियां और प्लेसमेंट के सवाल पर केवल 15 फीसदी छात्र संतुष्ट थे। आवास के मुद्दे पर केवल 16 फीसदी, परिवहन के मुद्दे पर केवल 13 फीसदी, यौन हिंसा के सवाल पर केवल 17 फीसदी छात्रों ने कहा कि वे मोदी सरकार से संतुष्ट है। बुनियादी ढांचे में सुधार के सवाल पर 20 फीसदी छात्रों ने संतुष्टि जताई। आइसा डीयू प्रेजिडेंट कवलप्रीत कौर ने कहा कि यह सरकार छात्रों के सवाल पर विफल साबित हो रही है।
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