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रामजन्म व ताड़का वध लीलाओं का हुआ मंचन
Updated Thu, 11 Oct 2018 11:32 PM IST
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भये प्रकट कृपाला दीनदयाला... कौशाल्या हितकारी
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तावडू। जय भारत रामलीला क्लब की ओर से बुधवार को दूसरे दिन रामजन्म से ताड़का वध की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने राम जन्म की कथा का ऐसा मंचन किया, जिसे देख दर्शक खुद ऐसा महसूस कर रहे थे मानो वह खुद दशरथ के महल में सभी को राम जन्म की बधाईयां दे रहेे हों। जैसे ही भगवान राम का जन्म होता वैसे ही पूरे पंडाल में भये प्रकट कृपाला दीन दयाला ......कौशाल्या हितकारी आदि शब्दों से गूंजने लगा। दूर-दूर तक राम के नाम के जयकारे गूंजने लगे।
इसके बाद कलाकारों ने भगवान शिव का माता कौशल्या के साथ संवाद और गुरु वशिष्ठ द्वारा चारों भाइयों के नामकरण करने की कथा का मनोहारी मंचन किया। इसके बाद गुरू विश्वामित्र द्वारा भगवान राम और लक्ष्मण को शिक्षा दीक्षा के ले जाने की कथा और यज्ञ की रक्षा के लिए ताड़का व सुबाहु केा वध की कथा को दर्शाया। विश्वामित्र जब यज्ञ करने लगते हैं तब मारिच ओर सुबाहु अपने साथियों के साथ यज्ञ पर धावा बोलते हैं। इस पर भगवान राम उसको एक बाण से सौ योजन पार पहुंचा देते हैं। इसके बाद राक्षस सुबाहु का भी वध कर देते हैं। देवता व ऋषि मुनि भगवान की स्तुति करते हैं और सीता स्वयंवर के लिए जनकपुरी जाते समय रास्ते में भगवान अहिल्या का उद्धार करते हैं।
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तावडू। जय भारत रामलीला क्लब की ओर से बुधवार को दूसरे दिन रामजन्म से ताड़का वध की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने राम जन्म की कथा का ऐसा मंचन किया, जिसे देख दर्शक खुद ऐसा महसूस कर रहे थे मानो वह खुद दशरथ के महल में सभी को राम जन्म की बधाईयां दे रहेे हों। जैसे ही भगवान राम का जन्म होता वैसे ही पूरे पंडाल में भये प्रकट कृपाला दीन दयाला ......कौशाल्या हितकारी आदि शब्दों से गूंजने लगा। दूर-दूर तक राम के नाम के जयकारे गूंजने लगे।
इसके बाद कलाकारों ने भगवान शिव का माता कौशल्या के साथ संवाद और गुरु वशिष्ठ द्वारा चारों भाइयों के नामकरण करने की कथा का मनोहारी मंचन किया। इसके बाद गुरू विश्वामित्र द्वारा भगवान राम और लक्ष्मण को शिक्षा दीक्षा के ले जाने की कथा और यज्ञ की रक्षा के लिए ताड़का व सुबाहु केा वध की कथा को दर्शाया। विश्वामित्र जब यज्ञ करने लगते हैं तब मारिच ओर सुबाहु अपने साथियों के साथ यज्ञ पर धावा बोलते हैं। इस पर भगवान राम उसको एक बाण से सौ योजन पार पहुंचा देते हैं। इसके बाद राक्षस सुबाहु का भी वध कर देते हैं। देवता व ऋषि मुनि भगवान की स्तुति करते हैं और सीता स्वयंवर के लिए जनकपुरी जाते समय रास्ते में भगवान अहिल्या का उद्धार करते हैं।
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