{"_id":"886586274150c1ef5e41c0df3cf222e0","slug":"noida-authority-will-make-amendment-in-far","type":"story","status":"publish","title_hn":"अथॉरिटी करेगा FAR नीति में बदलाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अथॉरिटी करेगा FAR नीति में बदलाव
अमर उजाला, नोएडा
Updated Fri, 18 Apr 2014 01:50 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोएडा में सुपरटेक के विवाद से सबक लेकर प्राधिकरण ने फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) की मौजूदा नीति में बदलाव करने का मन बनाया है।
विज्ञापन
नियोजन विभाग को इसका प्रारूप तय करने को कहा गया है। दरअसल, सुपरटेक ने एपेक्स और सियान टावर के मामले में प्राधिकरण से तीन बार एफएआर परचेज कर लिया। सबसे पहले 11 मंजिल फिर 24, उसके बाद 35 और अंत में 40 मंजिल तक फ्लैट बनाने की अनुमति ले ली।
इसका नुकसान उस प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदने वालों को हुआ। जिस समय बिल्डर ने 24 मंजिल के फ्लैट बनाकर बेचने के लिए लॉन्चिंग की, उस समय जनवरी से दिसंबर 2012 तक सभी को पजेशन देने की बात कही गई।
विज्ञापन
इस अवधि में 24 मंजिल तक काम लगभग पूरा भी हो गया था। इसके बाद बिल्डर ने 35 मंजिल तक मंजूरी ले ली। जिन फ्लैट खरीदारों को पजेशन मिलने वाला था, उनका इंतजार और बढ़ गया। इसके बाद 40 मंजिल की अनुमति लेकर निर्माण किया जाने लगा।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: सुपरटेक से घर खरीदने वालों पर आफत
इस बीच मौजूदा निवासियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी और हाईकोर्ट ने बिल्डिंग गिराने का आदेश दे दिया। फ्लैट खरीदार इसी बात का विरोध कर रहे हैं कि बार-बार एफएआर बढ़ाए जाने के कारण बिल्डर ने पजेशन देने में देरी की, जिसका परिणाम इन दो टावरों में फ्लैट खरीदने वालों को भुगतना पड़ रहा है।
इसी घटना से सबक लेते हुए प्राधिकरण एफएआर की पुरानी नीति में संशोधन करने पर विचार कर रहा है। जिससे कि आवंटन के दौरान ही आवंटी अधिकतम एफएआर की अनुमति प्राप्त कर ले। कंस्ट्रक्शन शुरू होने के बाद इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी।
विवाद को बिल्डर ने छिपाया
सुपरटेक बिल्डर ने खरीदारों से बड़ी बात छिपा ली। हाईकोर्ट में मामला चलता रहा लेकिन यह जानकारी खरीदारों को नहीं दी। हालांकि, खरीदार जिस वक्त फ्लैट खरीदता है, उस दौरान बिल्डर की तरफ से तमाम कागजात पर खरीदार के हस्ताक्षर कराए जाते हैं। खरीदारों को कई शर्तों की जानकारी भी नहीं होती है। बिल्डर दो ही जगह पर गच्चा खा सकता है, पहला यह कि उसने कोर्ट में चल रहे विवाद की जानकारी नहीं दी और दूसरा समय पर पजेशन नहीं दिया।