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दिल्ली-यूपी और हरियाणा को 10 करोड़ जमा करने का आदेश, यमुना सफाई के कामकाज से नाराज एनजीटी
Tue, 29 Jan 2019 11:43 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 29 Jan 2019 11:43 PM IST
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने यमुना की सफाई के कामकाज से असंतुष्टि और नाराजगी जाहिर करते हुए मंगलवार को दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार को 10-10 करोड़ रुपये की परफॉरमेंस गारंटी जमा कराने का आदेश दिया है।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकारों से कहा कि यह राशि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पास एक महीने के भीतर जमा करें।
साथ ही पीठ ने तीनों राज्यों के मुख्य सचिव को चेताया है कि आदेश का अनुपालन नहीं किया गया तो इसके लिए वे व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार होंगे। पीठ ने कहा कि निगरानी समिति की अंतरिम रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों के अनुरूप कामकाज नहीं किया गया तो परफॉरमेंस गारंटी की राशि को जब्त कर लिया जाएगा।
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पीठ ने समिति को अपनी निर्णायक रिपोर्ट जल्द दाखिल करने का आदेश दिया है। तीनों राज्यों को ठोस कचरे के उचित निपटारे और नालों की सफाई व कचरे की सफाई सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया गया है।
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जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकारों से कहा कि यह राशि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पास एक महीने के भीतर जमा करें।
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साथ ही पीठ ने तीनों राज्यों के मुख्य सचिव को चेताया है कि आदेश का अनुपालन नहीं किया गया तो इसके लिए वे व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार होंगे। पीठ ने कहा कि निगरानी समिति की अंतरिम रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों के अनुरूप कामकाज नहीं किया गया तो परफॉरमेंस गारंटी की राशि को जब्त कर लिया जाएगा।
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पीठ ने समिति को अपनी निर्णायक रिपोर्ट जल्द दाखिल करने का आदेश दिया है। तीनों राज्यों को ठोस कचरे के उचित निपटारे और नालों की सफाई व कचरे की सफाई सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया गया है।
यह आदेश याची मनोज मिश्रा के मामले में हाल ही में निगरानी समिति की ओर से दाखिल अंतरिम रिपोर्ट के बाद आया है। इस समिति में एनजीटी के पूर्व विशेषज्ञ सदस्य बीएस सजवाण और पूर्व दिल्ली सचिव शैलजा चंद्रा हैं।
समिति ने अपनी कार्ययोजना में यमुना के हथिनीकुंड से ओखला तक पर्यावरणीय प्रवाह को लेकर अध्ययन की सिफारिश की है। समिति ने रिपोर्ट में कहा था कि पर्यावरणीय प्रवाह ठीक नहीं किया गया तो नदी का पुनर्जीवित होना संभव नहीं है।
मूर्ति विसर्जन के लिए सूरत मॉडल देखने और समझने की सिफारिश की गई है। इसके तहत कृत्रिम तालाब और गड्ढ़े बनाकर मूर्तियों के विसर्जन की सलाह दी गई है।
समिति ने अपनी कार्ययोजना में यमुना के हथिनीकुंड से ओखला तक पर्यावरणीय प्रवाह को लेकर अध्ययन की सिफारिश की है। समिति ने रिपोर्ट में कहा था कि पर्यावरणीय प्रवाह ठीक नहीं किया गया तो नदी का पुनर्जीवित होना संभव नहीं है।
मूर्ति विसर्जन के लिए सूरत मॉडल देखने और समझने की सिफारिश की गई है। इसके तहत कृत्रिम तालाब और गड्ढ़े बनाकर मूर्तियों के विसर्जन की सलाह दी गई है।