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काम पूरा करने की गारंटी के रूप में 25 करोड़ रुपये जमा करे सरकार: एनजीटी
Tue, 29 Jan 2019 11:40 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 29 Jan 2019 11:40 PM IST
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने आगरा में पानी आपूर्ति की बदहाल व्यवस्था, ठोस कूड़े-कचरे के निस्तारण और सीवेज प्रणाली विकसित नहीं करने के खिलाफ यूपी सरकार और स्थानीय प्राधिकरणों को कड़ी फटकार लगाई है।
ट्रिब्यूनल ने यूपी सरकार से इन कमियों को दूर करने संबंधी काम को पूरा करने की गारंटी (परफॉरमेंस गारंटी) के रूप में 25 करोड़ रुपये जमा कराने को कहा है। काम पूरा नहीं करने की एवज में इस राशि को जब्त किया जा सकता है।
प्रधान पीठ ने कहा कि सरकार इसके लिए विभिन्न फंड और मंजूर परियोजनाओं की मदद ले। पीठ ने कहा कि यूपी के मुख्य सचिव 1 फरवरी को ट्रिब्यूनल में पेश होकर कार्ययोजना के साथ यह बताएं कि इन कमियों को कैसे और कब तक पूरा किया जाएगा।
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जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोशल एक्शन फॉर फॉरेस्ट एंड एनवॉयरमेंट (सेफ) के मामले में यह आदेश दिया है। पूर्व याची डीके जोशी के निधन बाद सेफ इस मामले को आगे बढ़ा रही है।
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ट्रिब्यूनल ने यूपी सरकार से इन कमियों को दूर करने संबंधी काम को पूरा करने की गारंटी (परफॉरमेंस गारंटी) के रूप में 25 करोड़ रुपये जमा कराने को कहा है। काम पूरा नहीं करने की एवज में इस राशि को जब्त किया जा सकता है।
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प्रधान पीठ ने कहा कि सरकार इसके लिए विभिन्न फंड और मंजूर परियोजनाओं की मदद ले। पीठ ने कहा कि यूपी के मुख्य सचिव 1 फरवरी को ट्रिब्यूनल में पेश होकर कार्ययोजना के साथ यह बताएं कि इन कमियों को कैसे और कब तक पूरा किया जाएगा।
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जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोशल एक्शन फॉर फॉरेस्ट एंड एनवॉयरमेंट (सेफ) के मामले में यह आदेश दिया है। पूर्व याची डीके जोशी के निधन बाद सेफ इस मामले को आगे बढ़ा रही है।
मामले को साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से एनजीटी के पास भेजा गया था। जबकि 1992 से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में ही लंबित था। पीठ ने गौर किया कि सीपीसीबी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा है कि आगरा शहर में पानी की आपूर्ति, सीवेज उपचार और ठोस कचरा प्रबंधन के लिए बुनियादी नागरिक सुविधाएं मौजूद नहीं हैं।
शहर में प्रतिदिन निकलता है 712 टन कचरा
शहर में करीब 712 टन कचरा निकलता है। करीब 690 टन कचरा बिना किसी ट्रीटमेंट के कुबेरपुर डंपिंग ग्राउंड में डाला जा रहा है। मौजूदा वक्त में पानी की मांग और आपूर्ति में 156 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) का अंतर है। सीवेज प्रणाली की बदहाल व्यवस्था के कारण बिना शोधन सीधे यमुना में 61 फीसदी (216 एमएलडी) सीवेज की निकासी की जा रही है।
शहर में प्रतिदिन निकलता है 712 टन कचरा
शहर में करीब 712 टन कचरा निकलता है। करीब 690 टन कचरा बिना किसी ट्रीटमेंट के कुबेरपुर डंपिंग ग्राउंड में डाला जा रहा है। मौजूदा वक्त में पानी की मांग और आपूर्ति में 156 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) का अंतर है। सीवेज प्रणाली की बदहाल व्यवस्था के कारण बिना शोधन सीधे यमुना में 61 फीसदी (216 एमएलडी) सीवेज की निकासी की जा रही है।