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एनजीटी के आदेशों का नहीं हो रहा पालन, अरावली में खुले में डाला जा रहा मलबा

Wed, 08 Jun 2016 01:35 AM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Wed, 08 Jun 2016 01:35 AM IST
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NGT do not follow orders, to be inserted into the open in the Aravali debris
अरावली की जमीन पर मलबा - फोटो : अमर उजाला

अरावली की हसीनवादियों पर मलबा का बदनुमा दाग को हटाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का आदेश भी काम नहीं आ रहा है।

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ट्रिब्यूनल ने 17 मई को औद्योगिक कचरा और निर्माण मलबा फेंकने वाले पर लगाम लगाने के लिए फरीदाबाद-गुडग़ांव के पुलिस आयुक्त को माकूल इंतजाम करने का निर्देश दिया था, लेकिन इस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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इसी का नतीजा है कि निर्माण मलबा और औद्योगिक कचरा का ढेर अरावली की जमीन को बदसूरत बनाने के साथ फिजां को दूषित कर रही है।

दरअसल, गुडग़ांव की हरियाली संस्था की ओर से करीब सात महीने पहले एनजीटी में याचिका दायर कर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई थी।

जिसके बाद से लगातार एनजीटी इस मामले में आदेश दे रहा है, लेकिन इसके बावजूद अरावली क्षेत्र में मलबा फेंकने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। गुडग़ांव-फरीदाबाद रोड पर चढने के बाद कचरा चौक से लेकर वजीराबाद और ग्वाल पहाड़ी तक के क्षेत्र में कचरे का अंबार सड़क की दोनों ओर लगे हुए है।
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स्थानीय लोगों की मानें तो डीएलएफ और सिकंदरपुर के क्षेत्र में निर्माण करा रहे बिल्डर रात के अंधेरे में यहां कचरा गिरा कर चले जाते हैं। इसकी मुख्य वजह इन सड़कों पर रात को अंधेरा रहता है।

सड़क की दोनों को कोई रेलिंग भी नहीं है और न ही कोई पुलिस की गश्त है। ऐसे में यहां मलबा डालकर चले जाना आसान होता है। बंधवाड़ी वेस्ट प्लांट जाने वाली गाडिय़ां भी लापरवाही कर कचरा अरावली के क्षेत्र में डाल कर चले जाते हैं।


निगम फेंक कर प्रदूषित करता था जमीन
इस मामले में एनजीटी में चल रहे केस के बावजूद नगर निगम ने अरावली के क्षेत्र में मृत पशुओं को फेंक कर जल, जमीन और वायु को प्रदूषित कर रहे थे। जिस पर वन विभाग ने आपत्ति उठाई थी, इसके बावजूद रोक नहीं लगी थी। जिसके खिलाफ वन विभाग ने नोटिस देते हुए इस क्षेत्र में खुदाई करवा दी है।

दोबारा होनी है सुनवाई
याचिकाकर्ता विवेक कंबोज का कहना है कि अरावली को लेकर पुलिस और प्रशासन दोनों का रवैया ठीक नहीं है। नगर निगम ने ही यहां मृत पशुओं को फेंकवाया था, जबकि यह अरावली के क्षेत्र में प्रतिबंधित है। मौजूदा स्थिति को पीठ की अगली सुनवाई में 13 जुलाई को रखा जाएगा।

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