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Delhi NCR News: नवजात के अखरोट आकार के दिल की हुई ओपन हार्ट सर्जरी
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली के निजी अस्पताल ने एक नवजात के अखरोट आकार के दिल की ओपन हार्ट सर्जरी कर डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी है। जन्म लेने के 24 घंटे के अंदर डॉक्टरों ने नवजात की सर्जरी कर जान बचाई है। नवजात को जन्मजात दुर्लभ इंफ्राडायफ्रैगमेटिक टोटल एनोमलस पल्मोनरी वीनस कनेक्शन (टीएपीवीसी) हृदय की बीमारी थी। नवजात को जन्म लेने के बाद ओखला स्थित निजी अस्पताल में उपचार के लिए लाया गया। अस्पताल में पीडियाट्रिक एवं कंजेनाइटल हार्ट सर्जरी के प्रमुख डॉ. के एस अय्यर और पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. आशुतोष मारवाह के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने सर्जरी को अंजाम दिया। चार घंटे तक चली सर्जरी में नवजात की ओपन हार्ट सर्जरी की गई। इसमें ऑक्सीजन से भरपूर रक्तप्रवाह को हृदय के बायीं ओर भेजा गया।
दरअसल, टीएपीवीसी बीमारी के चलते नवजात के फेफड़ों में ऑक्सीजनयुक्त रक्त हृदय तक सामान्य रूप से पहुंच नहीं पा रहा था। एक असामान्य रक्तनली की वजह से वह लिवर में जा रहा था। जिससे फेफड़े गंभीर रूप से कंजेशन का शिकार थे। हृदय के दाएं हिस्से पर दबाव बढ़ गया था। जन्म लेने के तुरंत बाद ही सांस लेने की समस्या शुरू हो गई थी। डॉ. केएस अय्यर ने बताया कि नवजात की बीमारी के बारे में गर्भावस्था के छठें हफ्ते में रूटीन एंटीनेटल अल्ट्रासाउंड के दौरान पता चला। फिर इसकी पुष्टि फीटल इकोकार्डियोग्राफी में हुई। नवजात के माता-पिता दोनों ही डॉक्टर है। सर्जरी के बाद नवजात की संतोषजनक रिकवरी हुई और 11 दिनों के बाद नवजात को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। यह सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण थी। दिल का आकार अखरोट के आकार की तरह था। इस सर्जरी टीम में डॉ पार्वती अय्यर और डॉ. विक्रम अग्रवाल भी शामिल रहे।
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नई दिल्ली।
दिल्ली के निजी अस्पताल ने एक नवजात के अखरोट आकार के दिल की ओपन हार्ट सर्जरी कर डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी है। जन्म लेने के 24 घंटे के अंदर डॉक्टरों ने नवजात की सर्जरी कर जान बचाई है। नवजात को जन्मजात दुर्लभ इंफ्राडायफ्रैगमेटिक टोटल एनोमलस पल्मोनरी वीनस कनेक्शन (टीएपीवीसी) हृदय की बीमारी थी। नवजात को जन्म लेने के बाद ओखला स्थित निजी अस्पताल में उपचार के लिए लाया गया। अस्पताल में पीडियाट्रिक एवं कंजेनाइटल हार्ट सर्जरी के प्रमुख डॉ. के एस अय्यर और पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. आशुतोष मारवाह के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने सर्जरी को अंजाम दिया। चार घंटे तक चली सर्जरी में नवजात की ओपन हार्ट सर्जरी की गई। इसमें ऑक्सीजन से भरपूर रक्तप्रवाह को हृदय के बायीं ओर भेजा गया।
दरअसल, टीएपीवीसी बीमारी के चलते नवजात के फेफड़ों में ऑक्सीजनयुक्त रक्त हृदय तक सामान्य रूप से पहुंच नहीं पा रहा था। एक असामान्य रक्तनली की वजह से वह लिवर में जा रहा था। जिससे फेफड़े गंभीर रूप से कंजेशन का शिकार थे। हृदय के दाएं हिस्से पर दबाव बढ़ गया था। जन्म लेने के तुरंत बाद ही सांस लेने की समस्या शुरू हो गई थी। डॉ. केएस अय्यर ने बताया कि नवजात की बीमारी के बारे में गर्भावस्था के छठें हफ्ते में रूटीन एंटीनेटल अल्ट्रासाउंड के दौरान पता चला। फिर इसकी पुष्टि फीटल इकोकार्डियोग्राफी में हुई। नवजात के माता-पिता दोनों ही डॉक्टर है। सर्जरी के बाद नवजात की संतोषजनक रिकवरी हुई और 11 दिनों के बाद नवजात को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। यह सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण थी। दिल का आकार अखरोट के आकार की तरह था। इस सर्जरी टीम में डॉ पार्वती अय्यर और डॉ. विक्रम अग्रवाल भी शामिल रहे।
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