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बच्ची को पुलिस अधिकारी नहीं ले पाएंगे गोद: झाड़ियों में रोती मिली थी नवजात, कानून के हाथों 'कानून' कमजोर

Sat, 12 Oct 2024 04:51 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: श्याम जी. Updated Sat, 12 Oct 2024 04:51 PM IST
सार

गाजियाबाद में झाड़ियों में एक नवजात बच्ची मिली। सूचना मिली थी कि एक पुलिस अधिकारी बच्ची को गोद लेने चाहते हैं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के चलते ऐसे कोई भी किसी बच्चे को गोद नहीं ले सकता है। ऐसे में अगर कोई बच्ची को गोद लेना चाहता है तो उसे कानूनी प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ेगा।

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Newborn baby girl found in bushes in Ghaziabad
झाड़ियों में मिली नवजात बच्ची - फोटो : अमर उजाला

विस्तार


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गाजियाबाद के वेब सिटी थाना क्षेत्र के डासना में शनिवार को झाड़ियों में एक नवजात बच्ची को कोई छोड़कर चला गया। उसकी रोने की आवाज सुनकर लोग मौके पर पहुंचे लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी।  न्याय पीठ बाल कल्याण समिति गाजियाबाद ने थाना वेव सिटी एसचओ और चौकी इंचार्ज को निर्देशित किया गया कि डासना क्षेत्र में झाड़ियां में मिली बच्ची को एमएमजी हॉस्पिटल में नर्सरी में भर्ती कराएं। बच्ची को स्वस्थ होने पर न्याय पीठ बाल कल्याण समिति को जानकारी दें। 

किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत गठित न्यायापीठ बाल कल्याण समिति द्वारा जिले के समस्त सीएनसीपी ( चाइल्ड इन नीड एंड ऑफ केयर एंड प्रोटक्शन) एवं लावारिस शिशु की समस्त जिम्मेदारी एवं संरक्षण लेने का प्रावधान है। पुलिस बल अथवा कोई भी व्यक्ति इस प्रकार किसी भी बच्चा व बच्ची को विधिक रूप से गोद नहीं ले सकता। अतः सोशल मीडिया एवं समाचार पत्रों में छपी यह खबर पूर्णतया भ्रामक है। 
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बालक-बालिकाओं को वैधिक रूप से गोद लेने हेतु शासन के अंतर्गत कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। भारत सरकार द्वारा स्थापित सीएआरए नामक कानूनी संस्था द्वारा स्थापित तकनीकी प्रक्रिया  से चयनित माता-पिता की पूर्णतया जांच कर लेने के उपरांत बच्चों को विधिक रूप से गोद, देने का कार्य संपन्न करवाया जाता है। वर्तमान आधुनिक समय में मीडिया एवं संचार के विभिन्न माध्यमों द्वारा बिना कानूनी एवं सरकारी कार्यवाहियों की जानकारी प्राप्त किए बिना इस प्रकार की भ्रामक खबर को छापना एवं इसका प्रचार-प्रसार करना अत्यंत खेदपूर्ण एवं चिंतनीय प्रश्न है।
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मीडिया अथवा पुलिस बल द्वारा केवल आमजन में पॉपुलर होने तथा लोगों की संवेदनाओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से इस प्रकार की भ्रामक स्थिति उत्पन्न होती है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की जिम्मेदारी बनती है कि वह जनता को कानून की सही जानकारी दें एवं ऐसी खबरों को अपने समाचार पत्रों में स्थान न दें।
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