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प्रसव पीड़ा के दौरान अस्पताल ने इलाज के बजाए दिल्ली किया रेफर, बीच रास्ते में हुई नवजात की मौत

Thu, 26 Apr 2018 09:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Thu, 26 Apr 2018 09:53 AM IST
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newborn baby died when he was delivered, hospital refused for the treatment and referred to delhi
newborn baby death - फोटो : सुदर्शन झा

सिविल लाइन स्थित नागरिक अस्पताल में एक और लापरवाही का मामला सामने आया है। बुधवार को अस्पताल में आई एक गर्भवती महिला को डॉक्टरों ने भर्ती करने से मना कर दिल्ली के लिए रेफर कर दिया।

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जिसके चलते समय पर इलाज न मिलने के कारण महिला ने एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दे दिया। प्रसव के बाद नवजात की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि घंटों इंतजार के बाद भी महिला को समय पर इलाज नहीं दिया गया, जिसके चलते बच्चे की मौत हो गई। 
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मजदूरी करने वाले दौलताबाद गांव निवासी जयदेव ने बताया कि बुधवार सुबह करीब साढ़े सात बजे वह अपनी सात माह की गर्भवती पत्नी को अचानक दर्द होने पर नागरिक अस्पताल लाए थे।
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अस्पताल लाने के बाद डॉक्टरों ने उसे यहां भर्ती करने से मना कर दिया। इलाज के लिए पत्नी इमरजेंसी में ही आधे घंटे तक व्हीलचेयर पर इंतजार करती रही। इसी बीच महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।

परिजनों ने इसकी जानकारी डॉक्टरों को दी। डॉक्टरों ने जांच के बाद महिला को सफदरजंग के लिए रेफर कर दिया। परिजन महिला को लेकर एंबुलेंस में बैठे ही थे, कि महिला ने एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दे दिया।

इसके बाद अस्पताल के स्टाफ ने महिला को एंबुलेंस से निकाल अस्पताल में भर्ती किया। इसी बीच नवजात की मौत हो गई। महिला को इससे पहले तीन लड़कियां हैं। यह उनका चौथा बच्चा था।

तीन माह में तीसरी घटना

newborn baby died when he was delivered, hospital refused for the treatment and referred to delhi
newborn baby death - फोटो : सुदर्शन झा

अस्पताल में समय पर इलाज न मिलने से प्रसव होने की तीन माह में तीसरी घटना है। इससे पहले फरवरी माह में एक गर्भवती महिला के पास आधार न होने के कारण उसे समय पर इलाज नहीं दिया गया था।

जिसके चलते उसने अस्पताल के गेट पर ही बच्चे को जन्म देे दिया था और नवजात की मौत हो गई थी। वहीं बीती 19 अप्रैल को भी एक महिला का समय पर इलाज न मिलने पर अस्पताल के ही बाथरूम में भ्रूण गिर गया था और अब यह तीसरी घटना सामने आई है। 

'यह मामला हैंड प्रोलैप्स का था। इस तरह के केस में बच्चे का हाथ बाहर आ जाता है। ऐसे मामलों में बच्चे को डिस्ट्रॉय करके ही निकाला जाता है। इस स्थिति में मरीज को रेफर करना मजबूरी है। डॉक्टर ने जांच के बाद ही महिला को रेफर किया था।' -डॉ. प्रदीप शर्मा, अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी 

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